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दुनिया में बहुत कम ही ऐसे लोग होते हैं जो अपने जीवन में कामयाबी हासिल करने के बाद उन चीज़ों पर काम करते हैं जिनके कारण उन्हें संघर्ष करना पड़ा था। यह सोचकर कि जिन-जिन कठिनाइयों से उन्हें गुज़रना पड़ा किसी और को ना गुज़रना पड़े। ऐसी ही एक महिला हैं मानसी प्रधान, जिन्हें बचपन में रुढ़ीवादी विचारधारा के फलस्वरूप अपने लड़की होने की वजह से अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए जिन-जिन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था वो उन्हें खत्म करने की कोशिश में जुटी हुई हैं। उनके इस कार्य के लिए उन्हें अब तक रानी लक्ष्मीबाई स्त्री शक्ति सहित कई अन्य पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। मानसी प्रधान एक लेखिका और भारतीय महिला अधिकार कार्यकर्ता हैं। उन्हें प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन और संगठनों द्वारा विश्व के सबसे उच्च नारीवादी लेखकों और कार्यकर्ताओं के रूप में देखा जाता है। उन्होंने भारत में व्याप्त महिलाओं के खिलाफ हिंसा को खत्म करने के लिए मानसी प्रधान ऑनर फॉर वीमेन राष्ट्रीय अभियान की स्थापना की । जिसके लिये उन्हें काफी सराहा गया और इसके साथ-साथ उन्होंने 1987 में ओयएसएस महिला संगठन और 2014 में निर्भया वाहिनी और निर्भया समारोह की स्थापना भी की।

प्रारंभिक जीवन एवं शिक्षा

मानसी प्रधान का जन्म 4 अक्टूबर 1962 में ओडिशा के खोरधा जिला के बानापुर स्थान के एक छोटे से गांव आयातपुर में हुआ था। वो अपने माता-पिता हेमलता प्रधान व गोदाबरिश प्रधान के साथ रहती थी, वो दो बहनों और एक भाई में सबसे बड़ी थी। उनके पिता किसान थे और माता घर संभालती थी। वह जहाँ रहती थी वहाँ अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की शिक्षा निषेध थी। वहाँ लड़कियों को हाईस्कूल तक भी पढ़ने का मौका नहीं मिल पाता था। मानसी प्रधान ने गाँव से अपना मिडिल स्कूल पूरा किया, जिसके बाद उनपर पढ़ाई छोड़ने का दबाव डाला जाने लगा और साथ ही वहाँ कोई हाईस्कूल भी नहीं था, जिसके चलते मानसी प्रधान प्रतिदिन 15 किलोमीटर पैदल चलकर गम्भीरमुंडा में स्थित पतितपावन हाईस्कूल जाती थी। वहाँ से उन्होंने अपनी हाईस्कूल की शिक्षा जारी रखी और अपने गाँव से हाई स्कूल पूरा करने वाली पहली महिला बनी ।

उनकी आगे कॉलेज की पढ़ाई के लिए उनके परिवार को पुरी में स्थानांतरित होना पड़ा। गाँव के खेत से कमाई ठीक ना हो पाने के कारण उनके परिवार को आर्थिक तंगी का भी सामना करना पड़ा, जिसके चलते इंटरमीडिएट परीक्षा उत्तीर्ण करते ही मानसी प्रधान ने नौकरी करनी शुरू कर दी जिससे वो उनके पिता को घर चलाने में आर्थिक मदद मिली और साथ ही अपनी शिक्षा भी जारी रख पायी। इसके बाद उन्होंने पुरी के ही गवर्नमेंट वीमेंस कॉलेज से अर्थशास्त्र में बीए की डिग्री प्राप्त की और उत्कल विश्वविद्यालय से ओडिया साहित्य में मास्टर्स किया। वे जीएम लॉ कॉलेज से कानूनशास्त्र में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने में भी सफल रहीं ।

मानसी प्रधान एक लेखिका और भारतीय महिला अधिकार कार्यकर्ता हैं। इक्कीसवीं सदी के वैश्विक नारीवादी आंदोलन के अग्रदूतों में से एक है।

उन्होंने सरकार के साथ आंध्र बैंक और वित्त विभाग में भी काम किया पर जल्द ही वहाँ से इस्तीफा दे दिया और अक्टूबर 1983 में मानसी प्रधान ने मात्र 21 वर्ष की आयु में अपना खुद का मुद्रण व्यवसाय और एक साहित्यिक पत्रिका शुरू कर दी, जिसने रातो रात खूब कामयाबी हासिल की और कुछ समय में ही उनका नाम सफल महिला उद्यमियों की लीग में आ गया ।बालिकाओं की शिक्षा हेतु वर्ष 1987 में मानसी प्रधान ने ओवाईएसएस (OYSS) वीमेन नामक एक गैर सरकारी संगठन की स्थापना की । जिसका प्रारंभिक उद्देश्य छात्राओं को उच्च शिक्षा प्रदान करवाना ही था पर आज यह कई तरह की नेतृत्व कार्यशालाओं का आयोजन, व्यावसायिक प्रशिक्षण, और महिलाओं में कानूनी जागरूकता फैलाने में संलग्न हैं और साथ ही महिलाओं को उनके अधिकार दिलाने और उन्हें आत्मरक्षा शिविर आदि प्रदान कराने का कार्य भी करता है। और 2009 में महिलाओं के साथ हो रहीं हिंसा के खिलाफ राष्ट्रव्यापी आंदोलन “ऑनर फॉर वूमेन” शुरू किया गया, जिसके तहत महिलाओं के सशक्तिकरण के लिये कई गतिविधियों को अंजाम दिया जाता है। महिलाओं के खिलाफ हिंसा को रोकने में इस संगठन में अग्रणी भूमिका निभाई है। यह संगठन सरकार पर जनता की राय लेता है और महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा को रोकने के लिए संस्थागत परिवर्तन व इसके सुधार के उपायों के लिए निरंतर कोई ना कोई अभियान चलाकर सरकार पर दबाव बनाता रहता है ।

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मानसी प्रधान की अध्यक्षता में ऑनर फॉर वूमेन राष्ट्रीय अभियान के तहत साल 2014 में भारत के सभी राज्यों की सरकार के लिए चार-सूत्रीय चार्टर जारी किया गया, जिसमें शराब के धंधे पर पूरी तरह से रोक, महिलाओं की सुरक्षा हेतु आत्मारक्षा प्रशिक्षण को उनके शैक्षिक पाठ्यक्रम के रूप में लाना, हर जिले में महिलाओं की सुरक्षा के लिये विशेष संरक्षण बल तथा साथ ही हर जिले में महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराधों के लिए विशेष जांच और फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट।

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साहित्यिक कार्य और उपलब्धियां

मानसी प्रधान एक उच्च कोटि की नारीवादी लेखिका और कवियत्री हैं। उनकी चौथी पुस्तक उर्मी-ओ-उच्च्वास का आठ भाषाओं में अनुवाद किया गया है, इसके अलावा आकाश दीपा, स्वगतिका आदि भी उनके उल्लेखनीय कार्यों में से एक माने जाते है जिसके लिये 2016 में न्यूयॉर्क की बस्टल पत्रिका में उन्हें विश्व के शीर्ष 20 नारीवादी लेखकों की सूची में रखा गया है। साल 2017 में लॉस एंजेलिस में स्थित वेलकर मीडिया इंक ने प्रधान को 12 सबसे शक्तिशाली नारीवादी परिवर्तन निर्माताओं की सूची में नामित किया और इसी वर्ष उन्हें वॉकहार्ट शांति पुरस्कार के लिये भी नामित किया गया। साल 2018 में उन्हें ऑक्सफोर्ड यूनियन में संघ को सम्बोधित करने के लिये आमंत्रित किया गया। साल 2019 में उन्हें ‘पावर ब्रांड्स ग्लोबल अवार्ड’ से भी सम्मानित किया गया। 8 मार्च 2014 में नयी दिल्ली में भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुख़र्जी द्वारा रानी लक्ष्मीबाई स्त्री शक्ति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। साल 2011 के मिशनरीज ऑफ चैरिटी की वैश्विक प्रमुख में मैरी प्रेमा पियरिक के साथ उन्हे ‘आउटस्टैंडिंग वुमन अवार्ड’ नामक पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

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तस्वीर साभार : orissadiary.com

मैं ख़ुशी वर्मा इलाहाबाद स्टेट यूनिवर्सिटी की छात्रा हूं। पढ़ाई के साथ साथ मैं लेखन कार्यों में भी रुचि रखती हूं जैसे कहानियां, गज़ल, कविताएं तथा स्क्रिप्ट राइटिंग । मैं विशेष तौर पर नारीवाद तथा लैंगिक समानता जैसे विषय पर लिखना तथा इनसे जुड़े मुद्दों पर काम करना भी पसंद करती हूँ ।

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