Thursday, October 17, 2019
आर्टिकल 15 : समाज के फ़र्क को दिखाती और फ़र्क लाने की उम्मीद जगाती ‘एक ज़रूरी फिल्म’

आर्टिकल 15 : समाज के फ़र्क को दिखाती और फ़र्क लाने की उम्मीद जगाती...

आर्टिकल 15 में समाज में बनी जाति की जटिल समस्या को दिखाते हुए ये संदेश देती है कि इन परिस्थितियों को बदलने के लिए अब हमें किसी हीरो का इंतज़ार नहीं करना है|
एक्टिंग छोड़ने के फैसले पर ज़ायरा वसीम की ट्रोलिंग : 'अभिव्यक्ति की आज़ादी' पर बढ़ते खतरे को दिखाता है

एक्टिंग छोड़ने के फैसले पर ज़ायरा वसीम की ट्रोलिंग : ‘अभिव्यक्ति की आज़ादी’ पर...

कम उम्र में सुपरहिट फिल्म करने वाली बॉलीवुड अभिनेत्री ज़ायरा वसीम ने फ़िल्मी दुनिया छोड़ने की बात कही तो उनके इस फ़ैसले पर उन्हें ट्रोल किया जाने लगा|
‘कबीर सिंह' फ़िल्म ही नहीं समाज का आईना भी है

‘कबीर सिंह’ फ़िल्म ही नहीं समाज का आईना भी है

‘कबीर सिंह’ को जैसे ही हम फिल्म के संदेश के आधार पर इसकी आलोचना करना शुरू करें तो इसे समाज के लिए बुरी फिल्म के दायरे में रखेंगें|
औरतों की अनकही हसरतें खोलती है ‘लस्ट स्टोरी’

औरतों की अनकही हसरतें खोलती है ‘लस्ट स्टोरी’

लस्ट स्टोरी समाज के अलग-अलग तबके में आधी आबादी के उस आधे किस्से को बयाँ करती है जिसे हमेशा चरित्रवान और चरित्रहीन के दायरें में समेटा गया है|

‘पैडमैन’ फिल्म बनते ही याद आ गया ‘पीरियड’

पैडमैन आने के बाद पीरियड का मुद्दा तेज़ी से सुर्ख़ियों में आया, जिसे देखकर ऐसा लग रहा है कि इससे पहले किसी को पता ही नहीं था पीरियड के बारे में|
पदमावत फिल्म के निर्देशक संजय लीला भंसाली के नाम खुलाखत

‘पदमावत’ फिल्म के निर्देशक संजय लीला भंसाली के नाम खुलाखत

विवादों में घिरी पदमावत फिल्म जाने-अनजाने ही सही कई संवेदनशील मुद्दों को कट्टरपंथ से जोड़ने का संदेश देती है, जिसके लिए निर्देशक संजय लीला भंसाली के नाम है ये खुलाखत|
स्त्री के मायनों की एक तलाश ‘बेगम जान’

स्त्री के मायनों की एक तलाश ‘बेगम जान’

बेगम जान राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्देशक श्रीजीत मुखर्जी की बांग्ला फिल्म 'राजकहिनी' का हिंदी रीमेक है। आज़ादी से पहले की यह एक ऐसी कहानी है जो आज तक अनकही थी|

फीयरलेस नादिया: बॉलीवुड की पहली स्टंट वुमन

भारतीय सिनेमा में इस नए चलन की नींव साल 1930 में आस्ट्रेलिया मूल की भारतीय मैरी एन इवांस ने रखी, जो आगे चल कर ‘फीयरलेस नादिया’ के नाम से जानी गर्इं। यह थीं - भारत की पहली महिला स्टंटवूमन।

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इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

संविधान सभा में हम उन प्रमुख पंद्रह महिला सदस्यों का योगदान आसानी से भुला चुके है या यों कहें कि हमने कभी इसे याद करने या तलाशने की जहमत नहीं की| तो आइये जानते है उन पन्द्रह भारतीय महिलाओं के बारे में जिन्होंने संविधान निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है|  

पुरुष होते नहीं बल्कि समाज में बनाए जाते हैं

हमेशा एक पुरुष से यह उम्मीद रखी जाती है कि वो अपनी भावनाओं को नियंत्रण में रखेगा जो किसी भी रूप में उसे कमजोर या असहाय दिखा सकती है।
कादम्बिनी गांगुली

कादम्बिनी गांगुली : चरित्र पर सवाल का मुँहतोड़ जवाब देकर बनी भारत की पहली...

कादम्बिनी गांगुली - भारत की सबसे पहले ग्रेजुएट हुई दो लड़कियों में से एक। शुरुआती स्त्री - चिकित्सकों में से एक !वह स्त्री जो एक पूरी व्यवस्था से लड़ गई।
भारत में स्त्री विमर्श और स्त्री संघर्ष: इतिहास के झरोखे से

भारत में स्त्री विमर्श और स्त्री संघर्ष: इतिहास के झरोखे से

भारत में स्त्री संघर्ष और स्त्री अधिकार के आन्दोलन को इसी रूप में स्वतंत्रता आन्दोलन के परिप्रेक्ष्य में देखने की आवश्यकता है|
लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|