Thursday, October 17, 2019

सोये रहोगे कब तक [कविता]

कौन रोक पायेगा उस ज्वाला को जो शुरू हुई थी एक चिंगारी कि तरह पर चली है आज जलाने को यह दुनिया किये बिना किसी रीती रिवाज़ कि परवाह

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इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

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संविधान सभा में हम उन प्रमुख पंद्रह महिला सदस्यों का योगदान आसानी से भुला चुके है या यों कहें कि हमने कभी इसे याद करने या तलाशने की जहमत नहीं की| तो आइये जानते है उन पन्द्रह भारतीय महिलाओं के बारे में जिन्होंने संविधान निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है|  
कादम्बिनी गांगुली

कादम्बिनी गांगुली : चरित्र पर सवाल का मुँहतोड़ जवाब देकर बनी भारत की पहली...

कादम्बिनी गांगुली - भारत की सबसे पहले ग्रेजुएट हुई दो लड़कियों में से एक। शुरुआती स्त्री - चिकित्सकों में से एक !वह स्त्री जो एक पूरी व्यवस्था से लड़ गई।
लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

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गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|
भारत में स्त्री विमर्श और स्त्री संघर्ष: इतिहास के झरोखे से

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भारत में स्त्री संघर्ष और स्त्री अधिकार के आन्दोलन को इसी रूप में स्वतंत्रता आन्दोलन के परिप्रेक्ष्य में देखने की आवश्यकता है|
उफ्फ! क्या है ये नारीवादी सिद्धांत? आओ जाने!

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नारीवाद के बारे में सभी ने सुना होगा। मगर यह है क्या? इसके दर्शन और सिद्धांत के बारे में ज्यादातर लोगों को नहीं मालूम। इसे पूरी तरह जाने और समझे बिना नारीवाद पर कोई भी बहस या विमर्श बेमानी है। नव उदारवाद के बाद भारतीय समाज में महिलाओं के प्रति आए बदलाव के बाद इन सिद्धांतों को जानना अब और भी जरूरी हो गया है।