राजनीति को बदलने वाली महिलाओं को वोट देने से क्यों कतराते है हम?

राजनीति को बदलने वाली महिलाओं को वोट देने से क्यों कतराते है हम?

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राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना उन्हें न सिर्फ आर्थिक रूप से मजबूत करेगा बल्कि देश में सामाजिक संतुलन व शांति की संभावना भी बढ़ जाएगी।
महुआ मोइत्रा : भारतीय राजनीति में महिला सांसद का चमकता सितारा

महुआ मोइत्रा रातों रात बनीं संसद का चमकता सितारा

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लोकसभा में पहली बार ही भाषण देकर आल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (टी.एम.सी) की सांसद महुआ मोइत्रा ने विपक्षियों से अपने लिए वाहवाही लूट ली।
महिला आरक्षण विधेयक : सशक्त कदम में अब और कितनी देर?

महिला आरक्षण विधेयक : सशक्त कदम में अब और कितनी देर?

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महिला आरक्षण विधेयक के समर्थकों का मानना है कि इससे महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा मिलेगा। जमीनी स्तर पर लोकतंत्र की जड़ें मजबूत होंगी।
पंजाब विभाजन : जब पंजाबी औरतों के शरीर का हो रहा था शिकार

पंजाब विभाजन : जब पंजाबी औरतों के शरीर का हो रहा था शिकार

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भारत के बंटवारे के दौरान भी महिलाओं को निशाना बनाया गया| औरतों पर ऐसी हैवानियत की शुरुआत मार्च 1947 के रावलपिंडी के दंगों से शुरू हो गई थी|
चंद्राणी मुर्मू : बेरोज़गारी से कम उम्र की सांसद बनने का सफर

चंद्राणी मुर्मू : बेरोज़गारी से कम उम्र की सांसद बनने का सफर

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चंद्राणी मुर्मू केवल 25 साल की है औऱ वह बीजू जनता दल (बीजेडी) के टिकट पर क्योंझर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ी है औऱ सदन पहुंची हैं।
इलेक्शननामा: भारत में चुनाव का इतिहास

इलेक्शननामा: भारत में चुनाव का इतिहास

इलेक्शननामा के पीछे मक़सद ये था कि चुनाव में कौन जीत या हार रहा है से हटकर इस पर चर्चा हो कि इस चुनाव में कौन से मुद्दे हैं, ये चुनाव इतना अहम क्यों है, भारत में लोकसभा चुनाव का इतिहास क्या रहा है और नार्थ ईस्ट के राज्यों में चुनाव के दौरान क्या कुछ हो रहा है.
लोकसभा चुनाव

इस लोकसभा चुनाव से क्यों गायब थे महिलाओं से जुड़े मुद्दे

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चुनाव में अक्सर यह देखने को मिलता है कि महिलाओं से संबंधित मुद्दों को प्राथमिकता दी जाती है। लेकिन इस बार चुनाव के प्रचार प्रसार में देश की आधी आबादी यानी कि महिलाओं के मुद्दे नदारद की दिखाई पड़े ।
अब महिलाओं को राजनीति करना पड़ेगा

अब महिलाओं को राजनीति करना पड़ेगा

राष्ट्र में सही मायने में लैंगिक-समानता के लिए, महिलाओं को अपने राजनीतिक अधिकारों के बारे में जागरूक होना पड़ेगा और चुनावी राजनीति में भाग लेना पड़ेगा |
सत्ता में भारतीय महिलाएं और उनका सामर्थ्य, सीमाएँ व संभावनाएँ

सत्ता में भारतीय महिलाएं और उनका सामर्थ्य, सीमाएँ व संभावनाएँ

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राजनीति एक सार्वजनिक क्षेत्र है| पर परम्परागत रूप से भारतीय महिलाओं को सार्वजनिक क्षेत्र में आने की मनाही रही है।
बेघर लोग

चुनावी मौसम में उनलोगों की बात जो इसबार मतदान नहीं कर पायेंगें

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बेघर और वंचित तबकों मतदान के अधिकार से दूर होना न केवल शासन की बल्कि हमारे समाज, देश और विचारधारा की विफलता को दिखाता है|

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सपना राठी का वीडियो वायरल करना समाज की पितृसत्तात्मक घटिया मानसिकता है

सपना राठी का वीडियो वायरल करना समाज की पितृसत्तात्मक घटिया मानसिकता है

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सपना राठी का विरोध उनके विचारों के आधार पर किया जाना चाहिए। न की उनके शरीर और शारीरिक संबंधों के आधार पर चारित्रिक टिप्पणी करके।
इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

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संविधान सभा में हम उन प्रमुख पंद्रह महिला सदस्यों का योगदान आसानी से भुला चुके है या यों कहें कि हमने कभी इसे याद करने या तलाशने की जहमत नहीं की| तो आइये जानते है उन पन्द्रह भारतीय महिलाओं के बारे में जिन्होंने संविधान निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है|  
लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

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गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|
थप्पड़

‘थप्पड़’ – क्यों मारा, नहीं मार सकता।’- वक्त की माँग है ये ज़रूरी सवाल

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मर्दों को पीटने का हक किसने दिया, वे अपने जीवनसाथी पर हाथ कैसे उठा सकते हैं। यही सवाल पूछती नज़र आती है तापसी पन्नू और अनुभव सिन्हा की नई फिल्म- थप्पड़।
पीरियड

हमारे समाज में पीरियड का क़िस्सा : भुज में ‘पीरियड’ के दौरान भेदभाव और...

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स्वामी कृष्णस्वरुप की इन बातों से साफ़ है कि किस तरह धर्म की हवा शिक्षा पर न केवल हावी होती है, बल्कि उसकी जड़ों को भी दीमक की तरह खोखली करने लगती है।