अब ‘कागा’ नहीं ‘पीरियड’ आयेगा | #ThePadEffect

अब ‘कागा’ नहीं ‘पीरियड’ आयेगा | #ThePadEffect

हमारे समाज में मासिक धर्म पर बात नहीं की जाती है जिससे लड़कियां अपने शरीर से जुड़े तमाम तथ्यों को लेकर कई तरह की भ्रांतियों में जीने लगती है|
क्या है स्त्री-विमर्श का कैरेक्टर? – आइये जाने

क्या है स्त्री-विमर्श का कैरेक्टर? – आइये जाने

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स्त्री-विमर्श अक्सर मध्यवर्गीय स्त्री पर केन्द्रित होता है जिनका पूरा संघर्ष दैहिक स्वतंत्रता से लेकर आर्थिक स्वतंत्रता तक सिमटा हुआ है|

पितृसत्ता क्या है? – आइये जाने  

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पितृसत्ता एक ऐसी व्यवस्था के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसमें पुरुषों का महिलाओं पर वर्चस्व रहता है और वे उनका शोषण और उत्पीड़न करते हैं|
प्लास्टिक सेनेटरी पैड का खतरनाक खेल | #ThePadEffect

प्लास्टिक सेनेटरी पैड का खतरनाक खेल | #ThePadEffect

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भारत में उपलब्ध सेनेटरी पैड प्लास्टिक के बने होते है और इन्हें बनाने में इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री गैर-बायोडिग्रैडबल होती है|
संस्कारी लड़कियों के नाम एक खुला खत...

संस्कारी लड़कियों के नाम एक खुला खत…

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पितृसत्तात्मक समाज में लड़कियों का चरित्र सिर्फ दो छोर से बंधा होता है - अच्छा या बुरा| इसके तहत अच्छी लड़की यानी कि संस्कारी लड़की बनना हर लड़की का सपना बन जाता है और वो ज़िन्दगीभर इस सपने को पूरा करने के लिए जद्दोजहद करती रहती है|

“मैं और लड़कियों की तरह नहीं हूं…” वाला समावेशी स्त्री-द्वेष

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समावेशी स्त्री-द्वेष बचपन से समाजीकरण के ज़रिए जेंडर के तहत सिखाये गए व्यवहार और विचारों का नतीज़ा है - जहां अच्छी लड़कियां शादी से पहले न तो सेक्स पर बात कर सकती हैं और न सेक्स कर सकती है|
इंटरसेक्शनल फेमिनिज्म: शक्ति के सीमित दायरों और दमन के विस्तार का विश्लेषण

इंटरसेक्शनल फेमिनिज्म: शक्ति के सीमित दायरों और दमन के विस्तार का विश्लेषण

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एक समस्या के अलग-अलग दिखने वाले पर आपस में जुड़े दमन और भेदभावों के तारों को दूर करके समानता को किस तरह स्थापित किया जायें, इसका अध्ययन इंटरसेक्शनल फेमिनिज्म में किया जाता है|

कल्पना सरोज: तय किया ‘दो रूपये से पांच सौ करोड़ तक का सफर’

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दलित महिला कल्पना सरोज ने दो रूपये से अपने जीवन की शुरुआत की और वह करोड़ों की कंपनी की सीइओ हैं| इस उपलब्धि के लिए कल्पना को पद्मश्री से सम्मानित किया गया।

और यूँ पल-बढ़ रहा है देह-व्यापार: कल से आज तक

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भारत के स्वतंत्र स्त्री समूहों को मात्र देह-व्यापार तक समेटने का काम निश्चित तौर पर विक्टोरियन नैतिकता से जुड़ा हुआ है लेकिन क्या यह अर्धसामंती और अर्धपूंजीवादी मानसिक ढांचे की भी तुष्टि से नहीं जुड़ा हुआ है!

‘हर बार मेरे सुंदर दिखने में कुछ कमी रह जाती है| कहीं इसमें कोई...

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हर स्त्री सुंदर होती है| पर यह एक अर्धसत्य ही है, जिसे छिपाने के लिए यह जोड़ना पड़ता है कि कुछ स्त्रियाँ ज्यादा सुंदर होती हैं|

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ट्रेंडिंग

सपना राठी का वीडियो वायरल करना समाज की पितृसत्तात्मक घटिया मानसिकता है

सपना राठी का वीडियो वायरल करना समाज की पितृसत्तात्मक घटिया मानसिकता है

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सपना राठी का विरोध उनके विचारों के आधार पर किया जाना चाहिए। न की उनके शरीर और शारीरिक संबंधों के आधार पर चारित्रिक टिप्पणी करके।
इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

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संविधान सभा में हम उन प्रमुख पंद्रह महिला सदस्यों का योगदान आसानी से भुला चुके है या यों कहें कि हमने कभी इसे याद करने या तलाशने की जहमत नहीं की| तो आइये जानते है उन पन्द्रह भारतीय महिलाओं के बारे में जिन्होंने संविधान निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है|  
लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

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गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|
थप्पड़

‘थप्पड़’ – क्यों मारा, नहीं मार सकता।’- वक्त की माँग है ये ज़रूरी सवाल

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मर्दों को पीटने का हक किसने दिया, वे अपने जीवनसाथी पर हाथ कैसे उठा सकते हैं। यही सवाल पूछती नज़र आती है तापसी पन्नू और अनुभव सिन्हा की नई फिल्म- थप्पड़।
पीरियड

हमारे समाज में पीरियड का क़िस्सा : भुज में ‘पीरियड’ के दौरान भेदभाव और...

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स्वामी कृष्णस्वरुप की इन बातों से साफ़ है कि किस तरह धर्म की हवा शिक्षा पर न केवल हावी होती है, बल्कि उसकी जड़ों को भी दीमक की तरह खोखली करने लगती है।