Monday, November 18, 2019
दलित बच्चों की हत्या दिखाती है 'स्वच्छ भारत' का ज़मीनी सच

दलित बच्चों की हत्या दिखाती है ‘स्वच्छ भारत’ का ज़मीनी सच

साल 2019 तक बहुतेरे गाँव में स्वच्छ भारत मिशन की गूँज तक भी सुनाई नहीं पड़ती और खुले में शौच करने के लिए दलित बच्चों की हत्या इसका जीवंत उदाहरण है।

चिन्मयानंद जैसों की पार्टी का ‘विश्वगुरु’ बनने की कल्पना ही बेमानी है

एसआईटी ने चिन्मयानंद के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज ही नहीं किया है। बल्कि उनपर अपने पद का दुरुपयोग कर यौन शोषण की धारा लगायी गयी है।
यौन-उत्पीड़न

यौन-उत्पीड़न की शिकायतों को निगलना और लड़कियों को कंट्रोल करना – यही है ICC...

अकादमिक संस्थानों में ICC यानी इंटरनल कंप्लेण्ट्स कमिटी का मुख्य काम यौन-उत्पीड़न की शिकायतों को दबाने का होता जा रहा है।
यौन उत्पीड़न के ख़िलाफ़ बीएचयू की छात्राओं का प्रदर्शन और छुट्टी पर भेजे गये आरोपी प्रोफ़ेसर

यौन उत्पीड़न के ख़िलाफ़ बीएचयू की छात्राओं का प्रदर्शन और छुट्टी पर भेजे गये...

प्रो चौबे को छात्राओं के साथ अश्लील हरकतें करने का दोषी पाए जाने और जांच कमेटी ने कठोरतम कार्रवाई के आग्रह के बावजूद बहाल कर दिया गया है।
वर्जिनिटी का सवाल नहीं है बल्कि सवाल मेरी 'ना' का है !

वर्जिनिटी का सवाल नहीं है बल्कि सवाल मेरी ‘ना’ का है !

पिंक अपने तहत स्त्री से बिंधे गये वर्जिनिटी के सवालों से भी ऊपर उठकर, देह-शुद्धता के सवालों और देह-स्वछंदता की उसकी अपनी स्वतंत्रता सवालों को उठाया गया है।
कैसा है हमारा समाज, जहाँ औरत को स्कूटी चलाने पर आत्महत्या करनी पड़ती है ?

कैसा है हमारा समाज, जहाँ औरत को स्कूटी चलाने पर आत्महत्या करनी पड़ती है...

केया दास सालों से स्कूटी चलाने का सपना देख रही थी। जब शादी नहीं हुई, तब माँ बाप ने रोक दिया और शादी हो गयी तो, पति ने अपनी स्कूटी उसे देने से इनकार कर दिया।

पितृसत्ता का ये श्रृंगार है महिलाओं के ख़िलाफ़ मज़बूत हथियार

पितृसत्ता के श्रृंगार को समझना बेहद ज़रूरी है। क्योंकि स्त्री द्वेष जैसी समस्याओं का प्रमुख आधार है, जिसके अनुसार ये महिलाओं को बाँटने की कोशिश करती हैं।
बलात्कार की वजह 'कपड़े' नहीं 'सोच' है - बाक़ी आप ख़ुद ही देख लीजिए!

बलात्कार की वजह ‘कपड़े’ नहीं ‘सोच’ है – बाक़ी आप ख़ुद ही देख लीजिए!

ये प्रदर्शिनी रेप विक्टिम और सेक्शुअल असॉल्ट विक्टिम के कपड़ों की है। ये वो कपड़े हैं जो लड़कियों ने तब पहने थे जब उनके साथ रेप किया गया।
समाज की ये कुरीतियां आज भी कर रहीं महिलाओं को प्रताड़ित

समाज की ये कुरीतियां आज भी कर रहीं महिलाओं को प्रताड़ित

ऐसी बहुत सी प्रथाएं और मान्यताएँ हैं जो एक औरत की अंतरात्मा को खोखला कर देती हैं। ये स्त्री द्वेषी विचार एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को सौंपे जा रहे हैं।
उन्नाव बलात्कार : क्योंकि वह इंसाफ मांग रही थी इसलिए निशाने पर थी

उन्नाव बलात्कार : क्योंकि वह इंसाफ मांग रही थी इसलिए निशाने पर थी

उन्नाव केस इस बात को परिलक्षित करती है कि धन-बल से कैसे न्यायिक प्रक्रिया का गला घोंटा जा सकता है और कोर्ट के बाहर न्याय कैसा गौण हो जाता है।

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इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

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संविधान सभा में हम उन प्रमुख पंद्रह महिला सदस्यों का योगदान आसानी से भुला चुके है या यों कहें कि हमने कभी इसे याद करने या तलाशने की जहमत नहीं की| तो आइये जानते है उन पन्द्रह भारतीय महिलाओं के बारे में जिन्होंने संविधान निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है|  
लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

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गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|
भारत में स्त्री विमर्श और स्त्री संघर्ष: इतिहास के झरोखे से

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भारत में स्त्री संघर्ष और स्त्री अधिकार के आन्दोलन को इसी रूप में स्वतंत्रता आन्दोलन के परिप्रेक्ष्य में देखने की आवश्यकता है|
रानी अब्बक्का चौटा: भारत की पहली महिला स्वतंत्रता सेनानी | #IndianWomenInHistory

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रानी अब्बक्का चौटा का स्थान न सिर्फ इतिहास में महत्वपूर्ण है बल्कि वे आज के समय में भी एक सशक्त महिला के रूप में बेहतरीन उदाहरण हैं।
उफ्फ! क्या है ये नारीवादी सिद्धांत? आओ जाने!

उफ्फ! क्या है ये ‘नारीवादी सिद्धांत?’ आओ जाने!

नारीवाद के बारे में सभी ने सुना होगा। मगर यह है क्या? इसके दर्शन और सिद्धांत के बारे में ज्यादातर लोगों को नहीं मालूम। इसे पूरी तरह जाने और समझे बिना नारीवाद पर कोई भी बहस या विमर्श बेमानी है। नव उदारवाद के बाद भारतीय समाज में महिलाओं के प्रति आए बदलाव के बाद इन सिद्धांतों को जानना अब और भी जरूरी हो गया है।