Monday, January 27, 2020

ख़ास बात : दिल्ली में रहने वाली यूपी की ‘एक लड़की’ जो नागरिकता संशोधन...

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सीएए के विरोध की मुख्य वजह ये है कि भारत में नागरिकता का आधार धर्म नहीं हो सकता। भारत एक धर्मनिरपेक्ष राज्य है और यह हमारे संविधान की मूल भावना के खिलाफ है।
नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध में लखनऊ से गिरफ़्तार सदफ़ ज़फ़र और हिंसा का रूप दिखाती 'डरी हुई सत्ता'

नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध में लखनऊ से गिरफ़्तार सदफ़ ज़फ़र और हिंसा का...

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सामाजिक मुद्दों और जनसरोकारों में सक्रिय दो बच्चों की सिंगल मदर सदफ़ ज़फ़र, एक सशक्त महिला भी है, जो अपने विरोध को बुलंद स्वरों में दर्ज करना जानती है।
नागरिकता संशोधन कानून : हिंसा और दमन का ये दौर लोकतंत्र का संक्रमणकाल है

नागरिकता संशोधन कानून : हिंसा और दमन का ये दौर लोकतंत्र का संक्रमणकाल है

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हिंसा चाहे किसी भी ओर से बुरी है, लेकिन इसके नामपर लोकतंत्र में जनता की आवाज़ को दबाना सीधेतौर पर लोकतंत्र की आत्मा को मारना जैसा है।
नागरिकता संशोधन क़ानून : विरोधों के इन स्वरों ने लोकतंत्र में नयी जान फूंक दी है...

नागरिकता संशोधन क़ानून : विरोधों के इन स्वरों ने लोकतंत्र में नयी जान फूंक...

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इस एक क़ानून ने भारतीय संविधान की आत्मा कहे जाने वाले मौलिक अधिकारों को ताक़ पर रखकर देश की गंगा-जमुनी तहज़ीब में फ़ांक डालने की पहल की है।
ब्राह्मणवाद

भारत में उभरती रेप संस्कृति के लिए ब्राह्मणवादी मानसिकता है जिम्मेदार

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स्त्री विरोधी संस्कृति को सामान्यतः पितृसत्तात्मक विचारधारा से जोड़ कर देखा जाता है लेकिन पितृसत्ता की जड़ें ब्राह्मणवाद के भूमि पर हीं जन्म लेती है।
जनाब ! यौन हिंसा को रोकने के लिए 'एनकाउंटर' की नहीं 'घर' में बदलाव लाने की ज़रूरत है

जनाब ! यौन हिंसा को रोकने के लिए ‘एनकाउंटर’ की नहीं ‘घर’ में बदलाव...

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जब तक समस्या की जड़ो पर काम नही होगा तब तक बदलाव आना मुश्किल है और फांसी देना या एनकाउंटर करना समस्या को जड़ से खत्म नही करता है।
मैं एक महिला हूं और मुझे एनकाउंटर न्याय नहीं लगता

मैं एक महिला हूं और मुझे एनकाउंटर न्याय नहीं लगता

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महिलाओं के लिए यह विशेष तौर पर सचेत होने का वक्त है। सरकारें अपनी ओर से फास्ट ट्रैक कोर्ट, पुलिस रिफोर्म, प्रशासनिक कार्रवाई आदि पर जोर नहीं दे रही।
ऐसी है 'पितृसत्ता' : सेक्स के साथ जुड़े कलंक और महिलाओं के कामकाजी होने का दर्जा न देना

ऐसी है ‘पितृसत्ता’ : सेक्स के साथ जुड़े कलंक और महिलाओं के कामकाजी होने...

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सेक्स वर्कर को और सेक्स वर्क से जुड़े इन विचारों को केवल कलंक, उनकी यौनिकता या मानवाधिकारों के बारे में समझ तक ही सीमित नहीं किया जा सकता।
वर्जिनिटी

‘तुम हो’ ! यह सिद्ध करने के लिए तुम्हारा होना काफ़ी है न की...

मेडिकल साइंस में सुबूत के साथ यह साबित कर दिया कि कुंवारेपन में कौमार्य का पर्याय कही जाने वाली हाइमन झिल्ली सेक्स के अलावा भी कई दूसरी वजह से फट सकती है।
दिल्ली से हैदराबाद : यौन हिंसा की घटनाएँ और सोशल मीडिया की चिंताजनक भूमिका

दिल्ली से हैदराबाद : यौन हिंसा की घटनाएँ और सोशल मीडिया की चिंताजनक भूमिका

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आईपीसी सेक्शन 228-A के अनुसार, पीड़ित की पहचान का खुलासा करना दंडनीय अपराध है। इसके बावजूद यौन हिंसा की खबरों को किसी ‘सनसनी’ की तरह प्रकाशित की जाती है।

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इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

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संविधान सभा में हम उन प्रमुख पंद्रह महिला सदस्यों का योगदान आसानी से भुला चुके है या यों कहें कि हमने कभी इसे याद करने या तलाशने की जहमत नहीं की| तो आइये जानते है उन पन्द्रह भारतीय महिलाओं के बारे में जिन्होंने संविधान निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है|  
लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

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गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|
फैमिली ग्रुप्स के अश्लील व्हाट्सएप्प मेसेज – एक विश्लेषण

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आजकल फैमिली ग्रुप में अपने बड़े-बूढ़े और रिश्तेदारों की तरफ से शेयर किये जाने वाले कुछ उन चुनिन्दा भद्दे व्हाट्सएप्प मेसेज के बारे बात करने जा रही हूँ, जो महिलाओं के प्रति व उनसे बनाये जाने वाले रिश्ते के प्रति की अपनी घिनौनी सोच को साझा करते हैं|
पैड खरीदने में माँ को आज भी शर्म आती है

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मासिकधर्म और सैनिटरी पैड पर हमारे घरों में चर्चा करने की बेहद ज़रूरत है और जिसकी शुरुआत हम महिलाओं को ही करनी होगी।
औरतों की अनकही हसरतें खोलती है ‘लस्ट स्टोरी’

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लस्ट स्टोरी समाज के अलग-अलग तबके में आधी आबादी के उस आधे किस्से को बयाँ करती है जिसे हमेशा चरित्रवान और चरित्रहीन के दायरें में समेटा गया है|