नवरात्र : मूर्ति वाली ‘शक्ति पूजन’ से नहीं बल्कि हर 'नारी’ के सम्मान से भक्ति होगी सार्थक

नवरात्र : मूर्ति वाली ‘शक्ति पूजन’ से नहीं बल्कि हर ‘नारी’ के सम्मान से...

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जिस दिन पंडाल या मंदिर की मूर्ति का नहीं बल्कि दफ़्तर में बैठी और घरों में सांस लेती औरत का सम्मान होगा उस दिन नवरात्र की भक्ति सार्थक होगी।
पितृसत्ता पर लैंगिक समानता का तमाचा जड़ती 'दुआ-ए-रीम' ज़रूर देखनी चाहिए!

पितृसत्ता पर लैंगिक समानता का तमाचा जड़ती ‘दुआ-ए-रीम’ ज़रूर देखनी चाहिए!

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सात मिनट और चंद सेकेंड की इस विडियो को जब हम देखते हैं तो इसकी शुरुआत में हम देश, काल, भाषा और धर्म से परे महिला को ‘एक स्थिति’ में पाते है।

होली के रंग में घुला ‘पितृसत्ता, राष्ट्रवाद और सांप्रदायिकता का कुंठित मेल’

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होली के मौसम में महिलाओं की चोली, ब्लाउज़, लहंगे, दुपट्टे, साड़ी के आंचल में पुरुषवादी मानसिकता घुसने को बेचैन होती है, जिसका विरोध बेहद ज़रूरी है।

दिल्ली में जो हुआ वो दंगा नहीं, नरसंहार था।

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हमें हिंसा का तब ही हो जाना चाहिए था जब 8 फ़रवरी को तथाकथित 'राष्ट्रवादियों' ने दिल्ली की सड़कों पर मोर्चा निकाला था और "देश के ग़द्दारों जैसे नारे लगाए थे।"
हिजाब

मेरा हिजाब, मेरी मर्ज़ी। तुमको क्या?

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क्या एक हिजाबी औरत की अपनी मर्ज़ी नहीं हो सकती? क्या वो पितृसत्ता की ग़ुलाम है? आइए आज 'वर्ल्ड हिजाब डे' के दिन कुछ ग़लतफ़हमियाँ दूर करते हैं।

गुजरात दंगें पर आधारित यह फ़िल्म ज़रूर देखी जानी चाहिए

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‘फ़िराक’ नंदिता दास के निर्देशन में बनी ये फ़िल्म 2002 के गुजरात दंगो पर आधारित है, जो बिना किसी हिंसा के इसमें दंगो का दर्द महसूस कराया गया है।
नागरिकता संशोधन क़ानून का 'इस्लामोफ़ोबिक' हिस्सा : माने धर्म की आड़ में, देश के बुनयादी मुद्दे से भटकाने का सरकारी पैतरा

नागरिकता संशोधन क़ानून का ‘इस्लामोफ़ोबिक’ हिस्सा : माने धर्म की आड़ में, देश के...

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सरकार ने सीएए और एनआरसी को समझने की उधेड़-बुन ने देशभर को इस तरह उलझा दिया है कि देश की बुनियादी समस्याओं पर चर्चा करना तो क्या हमने विचार करना भी छोड़ दिया।
मैं आपकी स्टीरियोटाइप जैसी नहीं फिर भी आदिवासी हूं

मैं आपकी स्टीरियोटाइप जैसी नहीं फिर भी आदिवासी हूं

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गुप्ता और मुगलों के ज़िक्र से लदी इतिहास की किताबों में आदिवासियों की पहचान इतनी ही थी कि वे पिछड़े और बीते ज़माने में जीते थे।
देवी

आज हर औरत को महाकाली का रूप धारण करने की ज़रूरत है

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देश में औरत को मां और देवी का प्रतिरूप मानकर पूजा जाता है, उसी देश में दूसरी ओर नारी को पूज्य नहीं बल्कि एक वस्तु की तरह समझा जाता है।
ये ‘रक्षाबंधन’ हो कुछ ऐसा 'लैंगिक समानता और संवेदना वाला'

ये ‘रक्षाबंधन’ हो कुछ ऐसा ‘लैंगिक समानता और संवेदना वाला’

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रक्षाबंधन के त्यौहार में बहन अपने भाई की कलाई में बड़े शौक़ से राखी बाँधती है, जो इसबात का सूचक है की बहन की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी अब भाई की है।

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अग्नि परीक्षा के बहाने इसके मूल मुद्दे 'वर्जिनिटी' की बात !

अग्नि परीक्षा के बहाने इसके मूल मुद्दे ‘वर्जिनिटी’ की बात !

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पवित्रता की अग्नि परीक्षा आदिकाल से अब आधुनिक काल तक महिलाएँ देती आ रही हैं। लेकिन परीक्षा के तौर तरीके में अब कई बदलाव हो गया है।
इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

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संविधान सभा में हम उन प्रमुख पंद्रह महिला सदस्यों का योगदान आसानी से भुला चुके है या यों कहें कि हमने कभी इसे याद करने या तलाशने की जहमत नहीं की| तो आइये जानते है उन पन्द्रह भारतीय महिलाओं के बारे में जिन्होंने संविधान निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है|  
फैमिली ग्रुप्स के अश्लील व्हाट्सएप्प मेसेज – एक विश्लेषण

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आजकल फैमिली ग्रुप में अपने बड़े-बूढ़े और रिश्तेदारों की तरफ से शेयर किये जाने वाले कुछ उन चुनिन्दा भद्दे व्हाट्सएप्प मेसेज के बारे बात करने जा रही हूँ, जो महिलाओं के प्रति व उनसे बनाये जाने वाले रिश्ते के प्रति की अपनी घिनौनी सोच को साझा करते हैं|
पैड खरीदने में माँ को आज भी शर्म आती है

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मासिकधर्म और सैनिटरी पैड पर हमारे घरों में चर्चा करने की बेहद ज़रूरत है और जिसकी शुरुआत हम महिलाओं को ही करनी होगी।
लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

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गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|