Monday, November 18, 2019
माहवारी जागरूकता के लिए गांव-गांव जाती हैं मौसम जैसी लड़कियाँ

माहवारी जागरूकता के लिए गांव-गांव जाती हैं मौसम कुमारी जैसी लड़कियाँ

मौसम कुमारी रजौली प्रखंड गांव की एक आम लड़की है। मौसम एक यूथ लीडर है जो पिछले तीन सालों से महिला स्वास्थ्य पर चर्चा करती है।

पुरुष होते नहीं बल्कि समाज में बनाए जाते हैं

हमेशा एक पुरुष से यह उम्मीद रखी जाती है कि वो अपनी भावनाओं को नियंत्रण में रखेगा जो किसी भी रूप में उसे कमजोर या असहाय दिखा सकती है।
सुरक्षित गर्भावस्था के लिए सेरेना विलियम्स की सशक्त पहल है ‘माहमी’

सुरक्षित गर्भावस्था के लिए सेरेना विलियम्स की सशक्त पहल है ‘माहमी’

सेरेना ने बिजनेसमैन मार्क क्यूबन के साथ मिलकर एक ‘मेटरनल हैल्थ स्टार्टअप’ में इन्वेस्टमेंट किया है। इस हैल्थ स्टार्टअप का नाम ‘माहमी’ (MaahMee) है।
हनीमून सिस्टाइटिस से बीमार न हो जाए आपकी सेक्स लाइफ़

‘हनीमून सिस्टाइटिस’ से बीमार न हो जाए आपकी सेक्स लाइफ़

'हनीमून सिस्टाइटिस' को आमभाषा में मूत्र मार्ग संक्रमण भी कहा जाता है। यह एक बैक्टीरिया से उत्पन्न होने वाला संक्रमण रोग है।

इमरजेंसी गर्भनिरोधक कितनी सुरक्षित है? आइए जानें !

अगर आप इमरजेंसी गर्भनिरोधक को आम गर्भनिरोधक की तरह लगातार लेती रहतीं हैं तो इसके कुछ गंभीर दुष्प्रभाव/साइड इफेक्ट्स आपको झेलने पड़ सकते हैं।
वजाइना को वॉश के बाज़ार से ज़्यादा स्वतंत्र छोड़ने की ज़रूरत है

वजाइना को वॉश के बाज़ार से ज़्यादा स्वतंत्र छोड़ने की ज़रूरत है

कंपनियां वजाइना वॉश जैसे उत्पाद को बेचने में नहीं शर्माती। ये आपके वजाइना को पहले से सुन्दर और गोरा करने का गलत दावा करते हैं जिससे इनकी बिक्री अधिक हो।
‘पीरियड प्रोडक्टिविटी’ से बनाएं अपनी प्रोफेशनल लाइफ आसान

‘पीरियड प्रोडक्टिविटी’ से बनाएं अपनी प्रोफेशनल लाइफ आसान

पीरियड प्रोडक्टिविटी को सरल शब्दों में समझा जाए तो इसका मतलब है पीरियड की तकलीफों की चिंता किये बिना, अपना काम बिना रुकावट के सफलतापूर्वक करते जाना।
महिलाओं का पीसीओएस की समस्या को अनदेखा करना ख़तरनाक है

महिलाओं का पीसीओएस की समस्या को अनदेखा करना ख़तरनाक है

पॉलीसिस्टिक ओवरियन सिंड्रोम (पीसीओएस), महिलाओं में होने वाला ऐसा हॉर्मोनल असंतुलन है जो एक ज़माने में असाधारण हुआ करता था पर अब आम हो गया है।
फ्री ब्लीडिंग मूवमेंट : आखिर क्यों कर रही हैं महिलाएं पीरियड उत्पादों का बहिष्कार

फ्री ब्लीडिंग मूवमेंट : आखिर क्यों कर रही हैं महिलाएं पीरियड उत्पादों का बहिष्कार

इस आंदोलन में महिलाएं मासिकधर्म के वक़्त किसी भी प्रकार के पीरियड उत्पाद का बहिष्कार करते हुए खुलकर रक्त बहाने का चुनाव करते हैं।
प्रजनन स्वास्थ्य की समस्याओं से जूझती महिलाओं की आपबीती

प्रजनन स्वास्थ्य की समस्याओं से जूझती महिलाओं की आपबीती

महिलाओं को अपने यौन और प्रजनन अधिकारों के बारे बोलना ही चाहिए। आखिर क्यों महिला की इच्छा और उसकी खुशी को महत्वपूर्ण नहीं माना जाता है?

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इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

संविधान सभा में हम उन प्रमुख पंद्रह महिला सदस्यों का योगदान आसानी से भुला चुके है या यों कहें कि हमने कभी इसे याद करने या तलाशने की जहमत नहीं की| तो आइये जानते है उन पन्द्रह भारतीय महिलाओं के बारे में जिन्होंने संविधान निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है|  
लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|
भारत में स्त्री विमर्श और स्त्री संघर्ष: इतिहास के झरोखे से

भारत में स्त्री विमर्श और स्त्री संघर्ष: इतिहास के झरोखे से

भारत में स्त्री संघर्ष और स्त्री अधिकार के आन्दोलन को इसी रूप में स्वतंत्रता आन्दोलन के परिप्रेक्ष्य में देखने की आवश्यकता है|
रानी अब्बक्का चौटा: भारत की पहली महिला स्वतंत्रता सेनानी | #IndianWomenInHistory

रानी अब्बक्का चौटा: भारत की पहली महिला स्वतंत्रता सेनानी | #IndianWomenInHistory

रानी अब्बक्का चौटा का स्थान न सिर्फ इतिहास में महत्वपूर्ण है बल्कि वे आज के समय में भी एक सशक्त महिला के रूप में बेहतरीन उदाहरण हैं।
उफ्फ! क्या है ये नारीवादी सिद्धांत? आओ जाने!

उफ्फ! क्या है ये ‘नारीवादी सिद्धांत?’ आओ जाने!

नारीवाद के बारे में सभी ने सुना होगा। मगर यह है क्या? इसके दर्शन और सिद्धांत के बारे में ज्यादातर लोगों को नहीं मालूम। इसे पूरी तरह जाने और समझे बिना नारीवाद पर कोई भी बहस या विमर्श बेमानी है। नव उदारवाद के बाद भारतीय समाज में महिलाओं के प्रति आए बदलाव के बाद इन सिद्धांतों को जानना अब और भी जरूरी हो गया है।