Monday, November 18, 2019

ख़ास बात : प्रसिद्ध हिंदी लेखिका ममता कालिया के साथ

ममता कालिया मौजूदा समय में एक प्रमुख भारतीय लेखिका हैं। प्रस्तुत है आपके सामने ममता कालिया के साथ आर. अनुराधा की ख़ास बात का अंश :
ख़ास बात : दलित अधिकार कार्यकर्ता मोहिनी से

ख़ास बात : दलित अधिकार कार्यकर्ता मोहिनी से

मोहिनी हरियाणा में दलित अधिकारों के लिए लगातार काम कर रही हैं| उनके बेहतर प्रयासों के लिए उन्हें दलित फाउंडेशन से फ़ेलोशिप भी मिली|
ख़ास बात : मानसिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता रत्नाबोली रे के साथ

ख़ास बात : मानसिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता रत्नाबोली रे के साथ

रत्नाबोली रे प्रसिद्ध मानसिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता, प्रशिक्षित मनोवैज्ञानिक और मानसिक स्वास्थ्य अधिकार पर काम करने वाली संस्था ‘अंजली’ की संस्थापिका हैं|

ख़ास बात : भारत की पहली स्लाइड गिटारवादिका विदुषी डॉ कमला शंकर के साथ

भारत की पहली स्लाइड गिटारवादिका विदुषी डॉ कमला शंकर पूरी दुनिया में अपनी बहुमुखी प्रतिभा और गिटारवादन का लोहा मनवा चुकी हैं|
ख़ास बात : 'परिवार और समाज' पर क्विअर नारीवादी एक्टिविस्ट प्रमदा मेनन के साथ

ख़ास बात : ‘परिवार और समाज’ पर क्विअर नारीवादी एक्टिविस्ट प्रमदा मेनन के साथ

आज की दुनिया में हम सभी के लिए ज़रूरी है कि हम परिवार की अपनी परिभाषा पर दोबारा विचार करें। आज की दुनिया नई तकनीकी दुनिया है।

ख़ास बात : खतने की कुप्रथा के खिलाफ आवाज़ उठाने वाली सालेहा पाटवाला

सालेहा पाटवाला एक नारीवादी है और भारत में महिलाओं के साथ होने वाली ‘खतना’ की कुप्रथा के खिलाफ सक्रिय तरीके से काम कर रही हैं|
ख़ास बात : "पीढ़ियाँ बदल जातीं हैं, स्त्री की दशा नहीं बदलती।" - कंचन सिंह चौहान

ख़ास बात : “पीढ़ियाँ बदल जातीं हैं, स्त्री की दशा नहीं बदलती।” – कंचन...

कंचन सिंह चौहान बहुमुखी प्रतिभा की धनी हैं। वे एक शायरा, कहानीकार और ब्लॉगर हैं। उनके भीतर एक पाठक और जहीन आलोचक भी सजग है।
खास बात: "स्त्री का लिखना साहित्य के क्षेत्र में अपना स्पेस क्लेम करना है" - सुजाता

खास बात: “स्त्री का लिखना साहित्य के क्षेत्र में अपना स्पेस क्लेम करना है”...

सुजाता हिंदी की महत्वपूर्ण कवि और स्त्रीवादी लेखक हैं। उनका एक कविता संकलन 'अनन्तिम मौन के बीच' भारतीय ज्ञानपीठ से प्रकाशित किया गया है। साथ ही, सुजाता चोखेरबाली ब्लॉग भी लिखती हैं|

खास बात: ऑल इंडिया दलित महिला अधिकार मंच (एआईडीएमएएम) की शोभना स्मृति से

हम बात कर रहे हैं एआईडीएमएएम की शोभना स्मृति से मौजूदा समय में दलित महिलाओं की समस्याओं, चुनौतियों और संघर्षों के बारे में|

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इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

संविधान सभा में हम उन प्रमुख पंद्रह महिला सदस्यों का योगदान आसानी से भुला चुके है या यों कहें कि हमने कभी इसे याद करने या तलाशने की जहमत नहीं की| तो आइये जानते है उन पन्द्रह भारतीय महिलाओं के बारे में जिन्होंने संविधान निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है|  
लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|
भारत में स्त्री विमर्श और स्त्री संघर्ष: इतिहास के झरोखे से

भारत में स्त्री विमर्श और स्त्री संघर्ष: इतिहास के झरोखे से

भारत में स्त्री संघर्ष और स्त्री अधिकार के आन्दोलन को इसी रूप में स्वतंत्रता आन्दोलन के परिप्रेक्ष्य में देखने की आवश्यकता है|
रानी अब्बक्का चौटा: भारत की पहली महिला स्वतंत्रता सेनानी | #IndianWomenInHistory

रानी अब्बक्का चौटा: भारत की पहली महिला स्वतंत्रता सेनानी | #IndianWomenInHistory

रानी अब्बक्का चौटा का स्थान न सिर्फ इतिहास में महत्वपूर्ण है बल्कि वे आज के समय में भी एक सशक्त महिला के रूप में बेहतरीन उदाहरण हैं।
उफ्फ! क्या है ये नारीवादी सिद्धांत? आओ जाने!

उफ्फ! क्या है ये ‘नारीवादी सिद्धांत?’ आओ जाने!

नारीवाद के बारे में सभी ने सुना होगा। मगर यह है क्या? इसके दर्शन और सिद्धांत के बारे में ज्यादातर लोगों को नहीं मालूम। इसे पूरी तरह जाने और समझे बिना नारीवाद पर कोई भी बहस या विमर्श बेमानी है। नव उदारवाद के बाद भारतीय समाज में महिलाओं के प्रति आए बदलाव के बाद इन सिद्धांतों को जानना अब और भी जरूरी हो गया है।