शिक्षा के ज़रिये हर बच्चे को स्कूल तक पहुँचाना ही मेरा मकसद है : पायल रॉय

शिक्षा के ज़रिये हर बच्चे को स्कूल तक पहुँचाना ही मेरा मकसद है :...

0
पायल रॉय एक स्टूडेंट और समाजसेविका हैं जिन्होंने अपने कॉलेज के दिनों में ही जबलपुर की बस्तियों में जाकर वहाँ के बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया था।
हाँ, चरित्रहीन औरतें सुंदर होती हैं!

हाँ, चरित्रहीन औरतें सुंदर होती हैं!

0
जो चरित्रहीन होते हैं, सुंदर वही होते हैं। आजाद लोग ही खूबसूरत होते हैं। कोने में, अपनी ही कुठाओं में दबी खामोश चरित्रशील औरत?

ख़ास बात : प्रसिद्ध हिंदी लेखिका ममता कालिया के साथ

ममता कालिया मौजूदा समय में एक प्रमुख भारतीय लेखिका हैं। प्रस्तुत है आपके सामने ममता कालिया के साथ आर. अनुराधा की ख़ास बात का अंश :
ख़ास बात : दलित अधिकार कार्यकर्ता मोहिनी से

ख़ास बात : दलित अधिकार कार्यकर्ता मोहिनी से

0
मोहिनी हरियाणा में दलित अधिकारों के लिए लगातार काम कर रही हैं| उनके बेहतर प्रयासों के लिए उन्हें दलित फाउंडेशन से फ़ेलोशिप भी मिली|
ख़ास बात : मानसिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता रत्नाबोली रे के साथ

ख़ास बात : मानसिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता रत्नाबोली रे के साथ

0
रत्नाबोली रे प्रसिद्ध मानसिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता, प्रशिक्षित मनोवैज्ञानिक और मानसिक स्वास्थ्य अधिकार पर काम करने वाली संस्था ‘अंजली’ की संस्थापिका हैं|

ख़ास बात : भारत की पहली स्लाइड गिटारवादिका विदुषी डॉ कमला शंकर के साथ

0
भारत की पहली स्लाइड गिटारवादिका विदुषी डॉ कमला शंकर पूरी दुनिया में अपनी बहुमुखी प्रतिभा और गिटारवादन का लोहा मनवा चुकी हैं|
ख़ास बात : 'परिवार और समाज' पर क्विअर नारीवादी एक्टिविस्ट प्रमदा मेनन के साथ

ख़ास बात : ‘परिवार और समाज’ पर क्विअर नारीवादी एक्टिविस्ट प्रमदा मेनन के साथ

0
आज की दुनिया में हम सभी के लिए ज़रूरी है कि हम परिवार की अपनी परिभाषा पर दोबारा विचार करें। आज की दुनिया नई तकनीकी दुनिया है।

ख़ास बात : खतने की कुप्रथा के खिलाफ आवाज़ उठाने वाली सालेहा पाटवाला

0
सालेहा पाटवाला एक नारीवादी है और भारत में महिलाओं के साथ होने वाली ‘खतना’ की कुप्रथा के खिलाफ सक्रिय तरीके से काम कर रही हैं|
ख़ास बात : "पीढ़ियाँ बदल जातीं हैं, स्त्री की दशा नहीं बदलती।" - कंचन सिंह चौहान

ख़ास बात : “पीढ़ियाँ बदल जातीं हैं, स्त्री की दशा नहीं बदलती।” – कंचन...

0
कंचन सिंह चौहान बहुमुखी प्रतिभा की धनी हैं। वे एक शायरा, कहानीकार और ब्लॉगर हैं। उनके भीतर एक पाठक और जहीन आलोचक भी सजग है।
खास बात: "स्त्री का लिखना साहित्य के क्षेत्र में अपना स्पेस क्लेम करना है" - सुजाता

खास बात: “स्त्री का लिखना साहित्य के क्षेत्र में अपना स्पेस क्लेम करना है”...

2
सुजाता हिंदी की महत्वपूर्ण कवि और स्त्रीवादी लेखक हैं। उनका एक कविता संकलन 'अनन्तिम मौन के बीच' भारतीय ज्ञानपीठ से प्रकाशित किया गया है। साथ ही, सुजाता चोखेरबाली ब्लॉग भी लिखती हैं|

फॉलो करे

5,052FansLike
950FollowersFollow
368FollowersFollow

ट्रेंडिंग

अग्नि परीक्षा के बहाने इसके मूल मुद्दे 'वर्जिनिटी' की बात !

अग्नि परीक्षा के बहाने इसके मूल मुद्दे ‘वर्जिनिटी’ की बात !

0
पवित्रता की अग्नि परीक्षा आदिकाल से अब आधुनिक काल तक महिलाएँ देती आ रही हैं। लेकिन परीक्षा के तौर तरीके में अब कई बदलाव हो गया है।
इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

2
संविधान सभा में हम उन प्रमुख पंद्रह महिला सदस्यों का योगदान आसानी से भुला चुके है या यों कहें कि हमने कभी इसे याद करने या तलाशने की जहमत नहीं की| तो आइये जानते है उन पन्द्रह भारतीय महिलाओं के बारे में जिन्होंने संविधान निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है|  
फैमिली ग्रुप्स के अश्लील व्हाट्सएप्प मेसेज – एक विश्लेषण

फैमिली ग्रुप्स के अश्लील व्हाट्सएप्प मेसेज – एक विश्लेषण

1
आजकल फैमिली ग्रुप में अपने बड़े-बूढ़े और रिश्तेदारों की तरफ से शेयर किये जाने वाले कुछ उन चुनिन्दा भद्दे व्हाट्सएप्प मेसेज के बारे बात करने जा रही हूँ, जो महिलाओं के प्रति व उनसे बनाये जाने वाले रिश्ते के प्रति की अपनी घिनौनी सोच को साझा करते हैं|
पैड खरीदने में माँ को आज भी शर्म आती है

पैड खरीदने में माँ को आज भी शर्म आती है

मासिकधर्म और सैनिटरी पैड पर हमारे घरों में चर्चा करने की बेहद ज़रूरत है और जिसकी शुरुआत हम महिलाओं को ही करनी होगी।
लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

5
गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|