डिप्रेशन

डिप्रेशन कोई हौवा नहीं है!

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जब भी डिप्रेशन की शुरुआत होती है तो सभी को लगता है की वो व्यक्ति बस परेशान होगा किसी चीज़ को लेकर या हम ये सोच लेते है कि उसका मूड ख़राब होगा।

हिस्टीरिया : महिलाओं और एलजीबीटीआइक्यू की ‘यौनिकता’ पर शिकंजा कसने के लिए ‘मेडिकल साइंस...

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औरत की यौनिकता से पुरुषतांत्रिक समाज डरता है और ये कोई नई बात नहीं है। इसी के चलते इसने महिलाओं की यौनिक इच्छाओं को भी 'हिस्टीरिया' बीमारी का नाम दे दिया।
मानसिक स्वास्थ्य

समाज की चुनौतियों से जूझता ‘एक मध्यमवर्गीय लड़की’ का मानसिक स्वास्थ्य

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हमारे समाज के पितृसत्तात्मक ढाँचे के अनुसार महिलाओं पर ढेरों पाबंदियां लगाई जाती हैं। इन संघर्षों का महिलाओं की मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ता है।
आंदोलन के इस दौर में रखें अपने मानसिक स्वास्थ्य का ख़ास ख़्याल

आंदोलन के इस दौर में रखें अपने मानसिक स्वास्थ्य का ख़ास ख़्याल

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अपने मानसिक स्वास्थ्य का ख़याल रखना बहुत ज़रूरी है, खासकर तब, जब सियासत से संविधान के लिए लड़ना हो, तो ये और भी ज़रूरी हो जाता है।
मानसिक स्वास्थ्य

मानसिक स्वास्थ्य पर पहली पहल ‘अपनी भाषा और व्यवहार’ से हो

मानसिक स्वास्थ्य अब विश्व में अदृश्य अपंगता की श्रेणी में गिने जाने लगे हैं और ये सत्यापित हुआ है कि मानसिक विकारों में वृद्धि भी तेज़ी से हुई है।

पुरुष होते नहीं बल्कि समाज में बनाए जाते हैं

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हमेशा एक पुरुष से यह उम्मीद रखी जाती है कि वो अपनी भावनाओं को नियंत्रण में रखेगा जो किसी भी रूप में उसे कमजोर या असहाय दिखा सकती है।
‘सुसाइड नोट’ पर प्रतियोगिता करवाने वाले इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के छात्रों के नाम खुला खत

‘सुसाइड नोट’ पर प्रतियोगिता करवाने वाले इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के छात्रों के नाम खुला खत

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कार्यक्रम के तहत 250 शब्दों में सुसाइड लेटर लिखना है। आज तक मैंने ढ़ेरों लेखन प्रतियोगिताओं के बारे में सुना, लेकिन ‘सुसाइड नोट’ किसी लेखन प्रतियोगिता का विषय हो ये पहली बार देख रही हूँ|
ख़ास बात : मानसिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता रत्नाबोली रे के साथ

ख़ास बात : मानसिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता रत्नाबोली रे के साथ

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रत्नाबोली रे प्रसिद्ध मानसिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता, प्रशिक्षित मनोवैज्ञानिक और मानसिक स्वास्थ्य अधिकार पर काम करने वाली संस्था ‘अंजली’ की संस्थापिका हैं|
मानसिक स्वास्थ्य और यौनिकता के मुद्दे पर ‘अंजली’ की बेहतरीन पहल

मानसिक स्वास्थ्य और यौनिकता के मुद्दे पर ‘अंजली’ की बेहतरीन पहल

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बीते दिनों कलकत्ता में मानसिक स्वास्थ्य के इस वृहत क्षेत्र को समझने, उजागर करने और काम में शामिल करने की दिशा-दशा निर्धारित करने के संदर्भ में अंजली संस्था द्वारा प्रशिक्षण का आयोजन किया गया|
औरतों की मानसिक स्वतंत्रता से होगा सशक्तिकरण

औरतों की मानसिक स्वतंत्रता से होगा सशक्तिकरण

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भारतीय पितृसत्तात्मक समाज में मानसिक-वैचारिक स्वतंत्रता मिलना इतना आसान भी तो नहीं है क्योंकि यहाँ आदर, सम्मान और औरत-मर्द के नामपर तो कई सारी परम्पराएं और काम गिनवा दिए जाते हैं, जिन्हें विशेष रूप से औरतों पर ही लागू किया जाता है|

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अग्नि परीक्षा के बहाने इसके मूल मुद्दे 'वर्जिनिटी' की बात !

अग्नि परीक्षा के बहाने इसके मूल मुद्दे ‘वर्जिनिटी’ की बात !

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पवित्रता की अग्नि परीक्षा आदिकाल से अब आधुनिक काल तक महिलाएँ देती आ रही हैं। लेकिन परीक्षा के तौर तरीके में अब कई बदलाव हो गया है।
इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

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संविधान सभा में हम उन प्रमुख पंद्रह महिला सदस्यों का योगदान आसानी से भुला चुके है या यों कहें कि हमने कभी इसे याद करने या तलाशने की जहमत नहीं की| तो आइये जानते है उन पन्द्रह भारतीय महिलाओं के बारे में जिन्होंने संविधान निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है|  
फैमिली ग्रुप्स के अश्लील व्हाट्सएप्प मेसेज – एक विश्लेषण

फैमिली ग्रुप्स के अश्लील व्हाट्सएप्प मेसेज – एक विश्लेषण

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आजकल फैमिली ग्रुप में अपने बड़े-बूढ़े और रिश्तेदारों की तरफ से शेयर किये जाने वाले कुछ उन चुनिन्दा भद्दे व्हाट्सएप्प मेसेज के बारे बात करने जा रही हूँ, जो महिलाओं के प्रति व उनसे बनाये जाने वाले रिश्ते के प्रति की अपनी घिनौनी सोच को साझा करते हैं|
पैड खरीदने में माँ को आज भी शर्म आती है

पैड खरीदने में माँ को आज भी शर्म आती है

मासिकधर्म और सैनिटरी पैड पर हमारे घरों में चर्चा करने की बेहद ज़रूरत है और जिसकी शुरुआत हम महिलाओं को ही करनी होगी।
लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

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गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|