Monday, January 27, 2020
ऐसी है 'पितृसत्ता' : सेक्स के साथ जुड़े कलंक और महिलाओं के कामकाजी होने का दर्जा न देना

ऐसी है ‘पितृसत्ता’ : सेक्स के साथ जुड़े कलंक और महिलाओं के कामकाजी होने...

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सेक्स वर्कर को और सेक्स वर्क से जुड़े इन विचारों को केवल कलंक, उनकी यौनिकता या मानवाधिकारों के बारे में समझ तक ही सीमित नहीं किया जा सकता।
वर्जिनिटी

‘तुम हो’ ! यह सिद्ध करने के लिए तुम्हारा होना काफ़ी है न की...

मेडिकल साइंस में सुबूत के साथ यह साबित कर दिया कि कुंवारेपन में कौमार्य का पर्याय कही जाने वाली हाइमन झिल्ली सेक्स के अलावा भी कई दूसरी वजह से फट सकती है।
दिल्ली से हैदराबाद : यौन हिंसा की घटनाएँ और सोशल मीडिया की चिंताजनक भूमिका

दिल्ली से हैदराबाद : यौन हिंसा की घटनाएँ और सोशल मीडिया की चिंताजनक भूमिका

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आईपीसी सेक्शन 228-A के अनुसार, पीड़ित की पहचान का खुलासा करना दंडनीय अपराध है। इसके बावजूद यौन हिंसा की खबरों को किसी ‘सनसनी’ की तरह प्रकाशित की जाती है।
इंटरनेट के दुष्प्रभावों की भेंट चढ़ती ‘किशोरावस्था’

नेपाल में इंटरनेट के दुष्प्रभावों की भेंट चढ़ती ‘किशोरावस्था’

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नेपाल में 37 फ़ीसद लड़कियों की 18 साल की उम्र से पहले ही शादी कर दी जाती है और इनमें से 10 फ़ीसद का विवाह तो 15 साल की उम्र तक ही हो जाता है।

मी लॉर्ड ! अब हम गैरबराबरी के खिलाफ किसका दरवाज़ा खटखटाएं – ‘सबरीमाला स्पेशल’

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सबरीमाला पर एक कड़ा फैसला दे चुका सुप्रीम कोर्ट इस बार यह फैसला नहीं ले पाया कि सबरीमाला मंदिर की प्रथा की नींव पितृसत्ता की बुनियाद पर ही टिकी हुई है।

यौनिकता के पहलुओं को उजागर करती इस्मत की ‘लिहाफ़’

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जिस समय यह कहानी ‘लिहाफ़’ लिखी गयी थी, उस समय एक ही जेंडर के दो लोगों के बीच के सम्बन्धों या समलैंगिकता पर खुलकर चर्चा नहीं की जाती थी।
योनि के प्रति आपका नज़रिया लोक संस्कृति का प्रतिनिधित्व नहीं करता

योनि के प्रति आपका नज़रिया लोक संस्कृति का प्रतिनिधित्व नहीं करता

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लोक संस्कृति कोई पेंडुलम नहीं है जो तत्समता और तद्भवता के बीच डोलती रहे। यह जनता की संस्कृति है जिसकी अपनी परिभाषायें हैं और अपने शब्द और सुर भी।

गांधी के बहाने सच के प्रयोगों की बात

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गेराल्डाइन फोर्ब्स लिखती हैं कि यूरोप की नज़र में भारत एक अत्यंत पिछ्ड़ा हुआ देश था क्योंकि यहाँ की स्त्रियों की दुर्दशा जैसी दुनिया में कहीं नहीं थी।
ड्रीमगर्ल

बाज़ारवादी ज़िंदगी के रिश्तों की हकीकत और उत्पीड़क संस्कृति का जंजाल वाया ‘ड्रीमगर्ल’

ड्रीमगर्ल नए तरह की कॉमेडी फिल्म है, जिसमें नया विषय है, जिसमें फेंडशिप कॉलसेंटर में फीमेल की जगह काम करने वाला असामान्य स्किल का सामान्य हीरो करन है।
माहवारी जागरूकता के लिए गांव-गांव जाती हैं मौसम जैसी लड़कियाँ

माहवारी जागरूकता के लिए गांव-गांव जाती हैं मौसम कुमारी जैसी लड़कियाँ

मौसम कुमारी रजौली प्रखंड गांव की एक आम लड़की है। मौसम एक यूथ लीडर है जो पिछले तीन सालों से महिला स्वास्थ्य पर चर्चा करती है।

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इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

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संविधान सभा में हम उन प्रमुख पंद्रह महिला सदस्यों का योगदान आसानी से भुला चुके है या यों कहें कि हमने कभी इसे याद करने या तलाशने की जहमत नहीं की| तो आइये जानते है उन पन्द्रह भारतीय महिलाओं के बारे में जिन्होंने संविधान निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है|  
लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

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गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|
फैमिली ग्रुप्स के अश्लील व्हाट्सएप्प मेसेज – एक विश्लेषण

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आजकल फैमिली ग्रुप में अपने बड़े-बूढ़े और रिश्तेदारों की तरफ से शेयर किये जाने वाले कुछ उन चुनिन्दा भद्दे व्हाट्सएप्प मेसेज के बारे बात करने जा रही हूँ, जो महिलाओं के प्रति व उनसे बनाये जाने वाले रिश्ते के प्रति की अपनी घिनौनी सोच को साझा करते हैं|
पैड खरीदने में माँ को आज भी शर्म आती है

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मासिकधर्म और सैनिटरी पैड पर हमारे घरों में चर्चा करने की बेहद ज़रूरत है और जिसकी शुरुआत हम महिलाओं को ही करनी होगी।
भारत में स्त्री विमर्श और स्त्री संघर्ष: इतिहास के झरोखे से

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भारत में स्त्री संघर्ष और स्त्री अधिकार के आन्दोलन को इसी रूप में स्वतंत्रता आन्दोलन के परिप्रेक्ष्य में देखने की आवश्यकता है|