Tuesday, September 17, 2019

ख़ुद में बेहद ख़ास होता है हर इंसान : विद्या बालन

विद्या बालन के इस वीडियो से लोग खुद को जुड़ा हुआ महसूस कर रहे हैं, बॉडी इमेज पर केन्द्रित यह प्रभावी वीडियो तेजी से वायरल हुआ है|
बच्चों के लिए रचने होंगें नये खेल और कहानी, लैंगिक समानता के वास्ते

बच्चों के लिए रचने होंगें नये खेल और कहानी, लैंगिक समानता के वास्ते

खेल और कहानियाँ केवल बच्चों का मन बहलाने का साधन नहीं हैं| इन्हीं से बच्चे सबसे अधिक सीखते हैं| ये उनके मस्तिष्क विकास में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती हैं|
हम सभी को नारीवादी क्यों होना चाहिए? - जानने के लिए पढ़िए ये किताब

हम सभी को नारीवादी क्यों होना चाहिए? – जानने के लिए पढ़िए ये किताब

'व्ही शुड ऑल बी फेमिनिस्ट्स' में अदीची के जीवन से जुड़े कुछ ऐसे किस्से हैं, जिन्हें उन्होंने नाइजीरिया में अनुभव किया है।
पितृसत्ता के दबावों को रेस्पॉन्ड करने को मज़बूर हैं आज़ाद औरतें ?

पितृसत्ता के दबावों को रेस्पॉन्ड करने को मज़बूर हैं आज़ाद औरतें ?

प्रबुद्ध औरतों ने अपने संबंधों पर बेहिचक लिखा। लेकिन ऐसी क्या वजह रही कि उन पुरुषों को कभी ज़रूरी नहीं लगा कि वे अपने जीवन में आई स्त्री के बारे में लिखें|

ख़ास बात : प्रसिद्ध हिंदी लेखिका ममता कालिया के साथ

ममता कालिया मौजूदा समय में एक प्रमुख भारतीय लेखिका हैं। प्रस्तुत है आपके सामने ममता कालिया के साथ आर. अनुराधा की ख़ास बात का अंश :
सुनो! तुमने मेरी मर्जी पूछी?

सुनो! तुमने मेरी मर्जी पूछी?

सुनो!’ करीब बारह मिनट की इस वीडियो में मेरिटल रेप की समस्या को जिस तरह उजागर किया गया है, वो जीवंत, बेबाक, संवेदनशील और प्रभावी है|
औरत की जाति, वर्ग और उनके विकल्प

औरत की जाति, वर्ग और उनके विकल्प

महिलाएँ, जब वे खुद को व्यक्तियों के रूप में महत्वपूर्ण मानने लगती हैं, तो वे अपने परिवेश और परिवार के सदस्यों के साथ बातचीत करने की रणनीति तैयार करती हैं।
आखिर आँकड़ों से बाहर क्यों है स्त्री-श्रम?

आखिर आँकड़ों से बाहर क्यों है स्त्री-श्रम?

ऐसे जाने कितने ही काम हैं जहाँ पुरुष श्रम करता दिखाई देता है लेकिन उसके घंधे के लिए तैयारी करने वाली स्त्री पर्दे के पीछे छिप जाती है।
हम सबको अच्छी पत्नी चाहिए

हम सबको अच्छी पत्नी चाहिए

अगर आपके आस पास कोई बच्ची कहती हो कि वह बड़ी होकर पत्नी बनेगी तो सचेत हो जाइए कि आपके दिए परिवेश में भयानक किस्म के जेण्डर विषाणु पनप रहे हैं।
ख़ास बात : दलित महिला कार्यकर्ता सुमन देवठिया से।

ख़ास बात : दलित महिला कार्यकर्ता सुमन देवठिया से।

समाज में बहुत तरह की गैर बराबरी, भेदभाव व छुआछूत देखने को मिलता है और जिनके साथ भेदभाव, छुआछूत, गैर बराबरी व असमानता होती है| - सुमन देवठिया