Monday, November 18, 2019
मेरी यात्रा का अनुभव और महिला शौचालय की बात

मेरी यात्रा का अनुभव और महिला शौचालय की बात

किसी महिला यात्री के लिए जिसे महिलाओं के लिए अलग से बने शौचालय इस्तेमाल करने की आदत हो, इस तरह पुरुषों के लिए बने शौचालय को इस्तेमाल कर पाना खासा असुविधाजनक हो स

ख़ुद में बेहद ख़ास होता है हर इंसान : विद्या बालन

विद्या बालन के इस वीडियो से लोग खुद को जुड़ा हुआ महसूस कर रहे हैं, बॉडी इमेज पर केन्द्रित यह प्रभावी वीडियो तेजी से वायरल हुआ है|
बच्चों के लिए रचने होंगें नये खेल और कहानी, लैंगिक समानता के वास्ते

बच्चों के लिए रचने होंगें नये खेल और कहानी, लैंगिक समानता के वास्ते

खेल और कहानियाँ केवल बच्चों का मन बहलाने का साधन नहीं हैं| इन्हीं से बच्चे सबसे अधिक सीखते हैं| ये उनके मस्तिष्क विकास में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती हैं|
हम सभी को नारीवादी क्यों होना चाहिए? - जानने के लिए पढ़िए ये किताब

हम सभी को नारीवादी क्यों होना चाहिए? – जानने के लिए पढ़िए ये किताब

'व्ही शुड ऑल बी फेमिनिस्ट्स' में अदीची के जीवन से जुड़े कुछ ऐसे किस्से हैं, जिन्हें उन्होंने नाइजीरिया में अनुभव किया है।
पितृसत्ता के दबावों को रेस्पॉन्ड करने को मज़बूर हैं आज़ाद औरतें ?

पितृसत्ता के दबावों को रेस्पॉन्ड करने को मज़बूर हैं आज़ाद औरतें ?

प्रबुद्ध औरतों ने अपने संबंधों पर बेहिचक लिखा। लेकिन ऐसी क्या वजह रही कि उन पुरुषों को कभी ज़रूरी नहीं लगा कि वे अपने जीवन में आई स्त्री के बारे में लिखें|

ख़ास बात : प्रसिद्ध हिंदी लेखिका ममता कालिया के साथ

ममता कालिया मौजूदा समय में एक प्रमुख भारतीय लेखिका हैं। प्रस्तुत है आपके सामने ममता कालिया के साथ आर. अनुराधा की ख़ास बात का अंश :
सुनो! तुमने मेरी मर्जी पूछी?

सुनो! तुमने मेरी मर्जी पूछी?

सुनो!’ करीब बारह मिनट की इस वीडियो में मेरिटल रेप की समस्या को जिस तरह उजागर किया गया है, वो जीवंत, बेबाक, संवेदनशील और प्रभावी है|
औरत की जाति, वर्ग और उनके विकल्प

औरत की जाति, वर्ग और उनके विकल्प

महिलाएँ, जब वे खुद को व्यक्तियों के रूप में महत्वपूर्ण मानने लगती हैं, तो वे अपने परिवेश और परिवार के सदस्यों के साथ बातचीत करने की रणनीति तैयार करती हैं।
आखिर आँकड़ों से बाहर क्यों है स्त्री-श्रम?

आखिर आँकड़ों से बाहर क्यों है स्त्री-श्रम?

ऐसे जाने कितने ही काम हैं जहाँ पुरुष श्रम करता दिखाई देता है लेकिन उसके घंधे के लिए तैयारी करने वाली स्त्री पर्दे के पीछे छिप जाती है।
हम सबको अच्छी पत्नी चाहिए

हम सबको अच्छी पत्नी चाहिए

अगर आपके आस पास कोई बच्ची कहती हो कि वह बड़ी होकर पत्नी बनेगी तो सचेत हो जाइए कि आपके दिए परिवेश में भयानक किस्म के जेण्डर विषाणु पनप रहे हैं।

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इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

संविधान सभा में हम उन प्रमुख पंद्रह महिला सदस्यों का योगदान आसानी से भुला चुके है या यों कहें कि हमने कभी इसे याद करने या तलाशने की जहमत नहीं की| तो आइये जानते है उन पन्द्रह भारतीय महिलाओं के बारे में जिन्होंने संविधान निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है|  
लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|
भारत में स्त्री विमर्श और स्त्री संघर्ष: इतिहास के झरोखे से

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भारत में स्त्री संघर्ष और स्त्री अधिकार के आन्दोलन को इसी रूप में स्वतंत्रता आन्दोलन के परिप्रेक्ष्य में देखने की आवश्यकता है|
रानी अब्बक्का चौटा: भारत की पहली महिला स्वतंत्रता सेनानी | #IndianWomenInHistory

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रानी अब्बक्का चौटा का स्थान न सिर्फ इतिहास में महत्वपूर्ण है बल्कि वे आज के समय में भी एक सशक्त महिला के रूप में बेहतरीन उदाहरण हैं।
उफ्फ! क्या है ये नारीवादी सिद्धांत? आओ जाने!

उफ्फ! क्या है ये ‘नारीवादी सिद्धांत?’ आओ जाने!

नारीवाद के बारे में सभी ने सुना होगा। मगर यह है क्या? इसके दर्शन और सिद्धांत के बारे में ज्यादातर लोगों को नहीं मालूम। इसे पूरी तरह जाने और समझे बिना नारीवाद पर कोई भी बहस या विमर्श बेमानी है। नव उदारवाद के बाद भारतीय समाज में महिलाओं के प्रति आए बदलाव के बाद इन सिद्धांतों को जानना अब और भी जरूरी हो गया है।