Monday, November 18, 2019
हाँ, चरित्रहीन औरतें सुंदर होती हैं!

हाँ, चरित्रहीन औरतें सुंदर होती हैं!

जो चरित्रहीन होते हैं, सुंदर वही होते हैं। आजाद लोग ही खूबसूरत होते हैं। कोने में, अपनी ही कुठाओं में दबी खामोश चरित्रशील औरत?
आर्टिकल 15 : समाज के फ़र्क को दिखाती और फ़र्क लाने की उम्मीद जगाती ‘एक ज़रूरी फिल्म’

आर्टिकल 15 : समाज के फ़र्क को दिखाती और फ़र्क लाने की उम्मीद जगाती...

आर्टिकल 15 में समाज में बनी जाति की जटिल समस्या को दिखाते हुए ये संदेश देती है कि इन परिस्थितियों को बदलने के लिए अब हमें किसी हीरो का इंतज़ार नहीं करना है|
औरत की जाति, वर्ग और उनके विकल्प

औरत की जाति, वर्ग और उनके विकल्प

महिलाएँ, जब वे खुद को व्यक्तियों के रूप में महत्वपूर्ण मानने लगती हैं, तो वे अपने परिवेश और परिवार के सदस्यों के साथ बातचीत करने की रणनीति तैयार करती हैं।
ख़ास बात : दलित महिला कार्यकर्ता सुमन देवठिया से।

ख़ास बात : दलित महिला कार्यकर्ता सुमन देवठिया से।

समाज में बहुत तरह की गैर बराबरी, भेदभाव व छुआछूत देखने को मिलता है और जिनके साथ भेदभाव, छुआछूत, गैर बराबरी व असमानता होती है| - सुमन देवठिया
बचपन से ही बोये जाते है लैंगिक असमानता के बीज भेदभाव

बचपन से ही बोये जाते है लैंगिक असमानता के बीज

सामाजिक रूढ़िवादी सोच के आधार पर, छोटी बच्चियों को नाज़ुक बताकर, उन्हें बचपन से ही हल्के-फुल्के खेलों में आगे बढ़ाया जाता है।
चंद्राणी मुर्मू : बेरोज़गारी से कम उम्र की सांसद बनने का सफर

चंद्राणी मुर्मू : बेरोज़गारी से कम उम्र की सांसद बनने का सफर

चंद्राणी मुर्मू केवल 25 साल की है औऱ वह बीजू जनता दल (बीजेडी) के टिकट पर क्योंझर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ी है औऱ सदन पहुंची हैं।
कौन गुरु कौन शिष्य?

कौन गुरु कौन शिष्य?

शायद परिवर्तन का नाम ही जीवन हैl हम चाहें तो पूरी उम्र नया सीख सकते हैं और बदल सकते हैंl
लोकसभा चुनाव में राम्या हरिदास की जीत,भारतीय महिलाओं का एक सपना पूरे होने जैसा है

लोकसभा चुनाव में राम्या हरिदास की जीत,भारतीय महिलाओं का एक सपना पूरे होने जैसा...

राम्या हरिदास केरल राज्य से वह एकलौती महिला सांसद हैं जिन्होनें जीत हासिल की है औऱ उनकी उम्र केवल 33 साल है और उनके पिता मज़दूर है।
डॉक्टर पायल ताडवी की हत्यारी है, हमारे समाज की सड़ी जातिगत व्यवस्था

डॉक्टर पायल ताडवी की हत्यारी है, हमारे समाज की सड़ी जातिगत व्यवस्था

जिस जहर के कारण डॉक्टर पायल तडवी को अपनी जान गँवानी पढ़ी वो जाति का जहर था, जो अपने चपेट में कितने ही अनुसूचित जाति व जनजाति के लोगों को ले चुका है।
ख़ास बात : दलित अधिकार कार्यकर्ता मोहिनी से

ख़ास बात : दलित अधिकार कार्यकर्ता मोहिनी से

मोहिनी हरियाणा में दलित अधिकारों के लिए लगातार काम कर रही हैं| उनके बेहतर प्रयासों के लिए उन्हें दलित फाउंडेशन से फ़ेलोशिप भी मिली|

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इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

संविधान सभा में हम उन प्रमुख पंद्रह महिला सदस्यों का योगदान आसानी से भुला चुके है या यों कहें कि हमने कभी इसे याद करने या तलाशने की जहमत नहीं की| तो आइये जानते है उन पन्द्रह भारतीय महिलाओं के बारे में जिन्होंने संविधान निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है|  
लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|
भारत में स्त्री विमर्श और स्त्री संघर्ष: इतिहास के झरोखे से

भारत में स्त्री विमर्श और स्त्री संघर्ष: इतिहास के झरोखे से

भारत में स्त्री संघर्ष और स्त्री अधिकार के आन्दोलन को इसी रूप में स्वतंत्रता आन्दोलन के परिप्रेक्ष्य में देखने की आवश्यकता है|
रानी अब्बक्का चौटा: भारत की पहली महिला स्वतंत्रता सेनानी | #IndianWomenInHistory

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रानी अब्बक्का चौटा का स्थान न सिर्फ इतिहास में महत्वपूर्ण है बल्कि वे आज के समय में भी एक सशक्त महिला के रूप में बेहतरीन उदाहरण हैं।
उफ्फ! क्या है ये नारीवादी सिद्धांत? आओ जाने!

उफ्फ! क्या है ये ‘नारीवादी सिद्धांत?’ आओ जाने!

नारीवाद के बारे में सभी ने सुना होगा। मगर यह है क्या? इसके दर्शन और सिद्धांत के बारे में ज्यादातर लोगों को नहीं मालूम। इसे पूरी तरह जाने और समझे बिना नारीवाद पर कोई भी बहस या विमर्श बेमानी है। नव उदारवाद के बाद भारतीय समाज में महिलाओं के प्रति आए बदलाव के बाद इन सिद्धांतों को जानना अब और भी जरूरी हो गया है।