कोरोना वायरस का सबसे बड़ा शिकार ‘देश के गरीब हैं’

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महामारी का सबसे ज़्यादा प्रभाव वंचित तबके पर पड़ रहा है, जिसे फैलने से रोकने की ज़िम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर थोपी गई है, जहां वे असमर्थ हैं।
कोरोना से जूझते देश में 'विशेषाधिकारों' और 'दमन' के बीच दिखता हमारे दोमुँहा समाज का चेहरा!

कोरोना से जूझते देश में ‘विशेषाधिकारों’ और ‘दमन’ के बीच दिखता हमारे दोमुँहा समाज...

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जनता कर्फ़्यू में तालियाँ बजाने के बाद कई डाक्टरों को उनके किराए के घरों से बेघर तक कर दिया गया । ये एक दोमुहे समाज की निशानी नहीं है?
महाड़ सत्याग्रह के इतने सालों बाद भी 'भेदभाव' के ख़िलाफ़ ज़ारी है संघर्ष

महाड़ सत्याग्रह के इतने सालों बाद भी ‘भेदभाव’ के ख़िलाफ़ ज़ारी है संघर्ष

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आज ही के दिन साल 1927 में  भीमराव आंबेडकर की अगुवाई में दलितों को अधिकार दिलाने के लिए 'महाड़ सत्याग्रह' किया गया था।

महिला दिवस : एकदिन का ‘क़िस्सा’ नहीं बल्कि हर रोज़ का ‘हिस्सा’ हो

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यूएन की तरफ़ से अंतरराष्‍ट्रीय महिला दिवस पर इसबार की थीम में महिलाओं को उनके अधिकार के लिए जागरूक करना और लैंगिक समानता को केंद्र में रखा गया है।

दलित महिलाओं की अपने ‘स्तन ढकने के अधिकार’ की लड़ाई : चन्नार क्रांति

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चन्नार क्रांति याद दिलाती है कि समाज ने दलितों, अल्पसंख्यकों, औरतों पर किस तरह के ज़ुल्म किए और कैसे हर बार इंक़लाब से ही समाज में सुधार आया है।

ख़ास बात : ‘मैला ढ़ोने’ की अमानवीय प्रथा के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वाले रमन...

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बेज़वाड़ा ने एक ज़मीनी स्तर का आंदोलन शुरू किया जिससे हाथों से मैला ढोने की प्रथा का उन्मूलन हो सके। उस आंदोलन का नाम था- सफाई कर्मचारी आंदोलन (एसकेए)।
बलात्कार

अर्बन बायस : क्या बलात्कार सिर्फ़ बड़े शहरों में होता है?

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हर रोज़ देश में जो बलात्कार होते रहते हैं, उनकी ख़बर या तो अख़बार के चौथे या पांचवे पन्ने में दबी रह जाती है। इसी को इंग्लिश में 'अर्बन बायस' कहा जाता है।
ब्राह्मणवाद

भारत में उभरती रेप संस्कृति के लिए ब्राह्मणवादी मानसिकता है जिम्मेदार

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स्त्री विरोधी संस्कृति को सामान्यतः पितृसत्तात्मक विचारधारा से जोड़ कर देखा जाता है लेकिन पितृसत्ता की जड़ें ब्राह्मणवाद के भूमि पर हीं जन्म लेती है।
दलित बच्चों की हत्या दिखाती है 'स्वच्छ भारत' का ज़मीनी सच

दलित बच्चों की हत्या दिखाती है ‘स्वच्छ भारत’ का ज़मीनी सच

साल 2019 तक बहुतेरे गाँव में स्वच्छ भारत मिशन की गूँज तक भी सुनाई नहीं पड़ती और खुले में शौच करने के लिए दलित बच्चों की हत्या इसका जीवंत उदाहरण है।

पितृसत्ता का ये श्रृंगार है महिलाओं के ख़िलाफ़ मज़बूत हथियार

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पितृसत्ता के श्रृंगार को समझना बेहद ज़रूरी है। क्योंकि स्त्री द्वेष जैसी समस्याओं का प्रमुख आधार है, जिसके अनुसार ये महिलाओं को बाँटने की कोशिश करती हैं।

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ट्रेंडिंग

अग्नि परीक्षा के बहाने इसके मूल मुद्दे 'वर्जिनिटी' की बात !

अग्नि परीक्षा के बहाने इसके मूल मुद्दे ‘वर्जिनिटी’ की बात !

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पवित्रता की अग्नि परीक्षा आदिकाल से अब आधुनिक काल तक महिलाएँ देती आ रही हैं। लेकिन परीक्षा के तौर तरीके में अब कई बदलाव हो गया है।
इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

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संविधान सभा में हम उन प्रमुख पंद्रह महिला सदस्यों का योगदान आसानी से भुला चुके है या यों कहें कि हमने कभी इसे याद करने या तलाशने की जहमत नहीं की| तो आइये जानते है उन पन्द्रह भारतीय महिलाओं के बारे में जिन्होंने संविधान निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है|  
फैमिली ग्रुप्स के अश्लील व्हाट्सएप्प मेसेज – एक विश्लेषण

फैमिली ग्रुप्स के अश्लील व्हाट्सएप्प मेसेज – एक विश्लेषण

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आजकल फैमिली ग्रुप में अपने बड़े-बूढ़े और रिश्तेदारों की तरफ से शेयर किये जाने वाले कुछ उन चुनिन्दा भद्दे व्हाट्सएप्प मेसेज के बारे बात करने जा रही हूँ, जो महिलाओं के प्रति व उनसे बनाये जाने वाले रिश्ते के प्रति की अपनी घिनौनी सोच को साझा करते हैं|
पैड खरीदने में माँ को आज भी शर्म आती है

पैड खरीदने में माँ को आज भी शर्म आती है

मासिकधर्म और सैनिटरी पैड पर हमारे घरों में चर्चा करने की बेहद ज़रूरत है और जिसकी शुरुआत हम महिलाओं को ही करनी होगी।
लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

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गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|