Thursday, January 23, 2020

पितृसत्ता का ये श्रृंगार है महिलाओं के ख़िलाफ़ मज़बूत हथियार

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पितृसत्ता के श्रृंगार को समझना बेहद ज़रूरी है। क्योंकि स्त्री द्वेष जैसी समस्याओं का प्रमुख आधार है, जिसके अनुसार ये महिलाओं को बाँटने की कोशिश करती हैं।
हाँ, चरित्रहीन औरतें सुंदर होती हैं!

हाँ, चरित्रहीन औरतें सुंदर होती हैं!

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जो चरित्रहीन होते हैं, सुंदर वही होते हैं। आजाद लोग ही खूबसूरत होते हैं। कोने में, अपनी ही कुठाओं में दबी खामोश चरित्रशील औरत?
आर्टिकल 15 : समाज के फ़र्क को दिखाती और फ़र्क लाने की उम्मीद जगाती ‘एक ज़रूरी फिल्म’

आर्टिकल 15 : समाज के फ़र्क को दिखाती और फ़र्क लाने की उम्मीद जगाती...

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आर्टिकल 15 में समाज में बनी जाति की जटिल समस्या को दिखाते हुए ये संदेश देती है कि इन परिस्थितियों को बदलने के लिए अब हमें किसी हीरो का इंतज़ार नहीं करना है|
औरत की जाति, वर्ग और उनके विकल्प

औरत की जाति, वर्ग और उनके विकल्प

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महिलाएँ, जब वे खुद को व्यक्तियों के रूप में महत्वपूर्ण मानने लगती हैं, तो वे अपने परिवेश और परिवार के सदस्यों के साथ बातचीत करने की रणनीति तैयार करती हैं।
ख़ास बात : दलित महिला कार्यकर्ता सुमन देवठिया से।

ख़ास बात : दलित महिला कार्यकर्ता सुमन देवठिया से।

समाज में बहुत तरह की गैर बराबरी, भेदभाव व छुआछूत देखने को मिलता है और जिनके साथ भेदभाव, छुआछूत, गैर बराबरी व असमानता होती है| - सुमन देवठिया
बचपन से ही बोये जाते है लैंगिक असमानता के बीज भेदभाव

बचपन से ही बोये जाते है लैंगिक असमानता के बीज

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सामाजिक रूढ़िवादी सोच के आधार पर, छोटी बच्चियों को नाज़ुक बताकर, उन्हें बचपन से ही हल्के-फुल्के खेलों में आगे बढ़ाया जाता है।
चंद्राणी मुर्मू : बेरोज़गारी से कम उम्र की सांसद बनने का सफर

चंद्राणी मुर्मू : बेरोज़गारी से कम उम्र की सांसद बनने का सफर

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चंद्राणी मुर्मू केवल 25 साल की है औऱ वह बीजू जनता दल (बीजेडी) के टिकट पर क्योंझर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ी है औऱ सदन पहुंची हैं।
कौन गुरु कौन शिष्य?

कौन गुरु कौन शिष्य?

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शायद परिवर्तन का नाम ही जीवन हैl हम चाहें तो पूरी उम्र नया सीख सकते हैं और बदल सकते हैंl
लोकसभा चुनाव में राम्या हरिदास की जीत,भारतीय महिलाओं का एक सपना पूरे होने जैसा है

लोकसभा चुनाव में राम्या हरिदास की जीत,भारतीय महिलाओं का एक सपना पूरे होने जैसा...

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राम्या हरिदास केरल राज्य से वह एकलौती महिला सांसद हैं जिन्होनें जीत हासिल की है औऱ उनकी उम्र केवल 33 साल है और उनके पिता मज़दूर है।
डॉक्टर पायल ताडवी की हत्यारी है, हमारे समाज की सड़ी जातिगत व्यवस्था

डॉक्टर पायल ताडवी की हत्यारी है, हमारे समाज की सड़ी जातिगत व्यवस्था

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जिस जहर के कारण डॉक्टर पायल तडवी को अपनी जान गँवानी पढ़ी वो जाति का जहर था, जो अपने चपेट में कितने ही अनुसूचित जाति व जनजाति के लोगों को ले चुका है।

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इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

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संविधान सभा में हम उन प्रमुख पंद्रह महिला सदस्यों का योगदान आसानी से भुला चुके है या यों कहें कि हमने कभी इसे याद करने या तलाशने की जहमत नहीं की| तो आइये जानते है उन पन्द्रह भारतीय महिलाओं के बारे में जिन्होंने संविधान निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है|  
लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

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गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|
फैमिली ग्रुप्स के अश्लील व्हाट्सएप्प मेसेज – एक विश्लेषण

फैमिली ग्रुप्स के अश्लील व्हाट्सएप्प मेसेज – एक विश्लेषण

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आजकल फैमिली ग्रुप में अपने बड़े-बूढ़े और रिश्तेदारों की तरफ से शेयर किये जाने वाले कुछ उन चुनिन्दा भद्दे व्हाट्सएप्प मेसेज के बारे बात करने जा रही हूँ, जो महिलाओं के प्रति व उनसे बनाये जाने वाले रिश्ते के प्रति की अपनी घिनौनी सोच को साझा करते हैं|
भारत में स्त्री विमर्श और स्त्री संघर्ष: इतिहास के झरोखे से

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भारत में स्त्री संघर्ष और स्त्री अधिकार के आन्दोलन को इसी रूप में स्वतंत्रता आन्दोलन के परिप्रेक्ष्य में देखने की आवश्यकता है|
पैड खरीदने में माँ को आज भी शर्म आती है

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मासिकधर्म और सैनिटरी पैड पर हमारे घरों में चर्चा करने की बेहद ज़रूरत है और जिसकी शुरुआत हम महिलाओं को ही करनी होगी।