Tuesday, September 17, 2019
फ्री ब्लीडिंग मूवमेंट : आखिर क्यों कर रही हैं महिलाएं पीरियड उत्पादों का बहिष्कार

फ्री ब्लीडिंग मूवमेंट : आखिर क्यों कर रही हैं महिलाएं पीरियड उत्पादों का बहिष्कार

इस आंदोलन में महिलाएं मासिकधर्म के वक़्त किसी भी प्रकार के पीरियड उत्पाद का बहिष्कार करते हुए खुलकर रक्त बहाने का चुनाव करते हैं।

ख़ुद में बेहद ख़ास होता है हर इंसान : विद्या बालन

विद्या बालन के इस वीडियो से लोग खुद को जुड़ा हुआ महसूस कर रहे हैं, बॉडी इमेज पर केन्द्रित यह प्रभावी वीडियो तेजी से वायरल हुआ है|
दुनियाभर में महिलाओं की मौत का 5वां सबसे बड़ा कारण ये है !

दुनियाभर में महिलाओं की मौत का 5वां सबसे बड़ा कारण ये है !

दुनिया की आधी आबादी के जीवन का अभिन्न अंग पीरियड्स ही वह वजह है जिसके असुरक्षित निपटान की वजह से हर साल लाखों महिलाएं असमय ही काल के गाल में समा जाती हैं।
पीरियड में इन प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल पर्यावरण को रखेगा सुरक्षित

पीरियड में इन प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल पर्यावरण को रखेगा सुरक्षित

माहवारी के वक्त बायोडिग्रेडेबल या फिर लंबे समय तक चलने वाले उत्पादों में बदलना अब विकल्प ही नहीं बल्कि समय की मांग हो चुका है।
पंजाब विभाजन : जब पंजाबी औरतों के शरीर का हो रहा था शिकार

पंजाब विभाजन : जब पंजाबी औरतों के शरीर का हो रहा था शिकार

भारत के बंटवारे के दौरान भी महिलाओं को निशाना बनाया गया| औरतों पर ऐसी हैवानियत की शुरुआत मार्च 1947 के रावलपिंडी के दंगों से शुरू हो गई थी|
पीरियड

‘पीरियड का खून नहीं समाज की सोच गंदी है|’ – एक वैज्ञानिक विश्लेषण

पीरियड के दौरान निकलने वाला पदार्थ गंदा या अशुद्ध नहीं होता है| बल्कि ये महिला के शरीर में बनने वाला ऊर्वरक बीज होता है |
माहवारी से जुड़े दस मिथ्य, जो आज भी महिला सशक्तिकरण को दे रहे चुनौती

माहवारी से जुड़े दस मिथ्य, जो आज भी महिला सशक्तिकरण को दे रहे चुनौती

माहवारी से जुड़े बहुत से मिथ्य है जो हर महीने महिलाओं को प्रताड़ित करने जैसे हैं। अब समय आ गया है कि हम ऐसी अवधारणाओं को जड़ से उखाड़ फेंके।
"उसने मेरे चेहरे पर एसिड डाला है, मेरे सपनों पर नहीं" – लक्ष्मी

“उसने मेरे चेहरे पर एसिड डाला है, मेरे सपनों पर नहीं” – लक्ष्मी

लक्ष्मी को अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की पत्नी मिशेल ओबामा ने साल 2014 में 'इंटरनेशनल वुमेन ऑफ करेज' अवॉर्ड से सम्मानित किया था|

शर्म का नहीं बल्कि विस्तृत चर्चा का विषय हो माहवारी

भारत में माहवारी के बारे में और इसके शुरू होने के बारे में बहुत कम अध्ययन किये गये हैं जिनमें मुख्य रूप से उम्र, जानकारी और समस्याओं के अनुभवों के आंकड़ें भी मिलते हैं|
औरत के ‘ओर्गेज्म’ की बात पर हम मुंह क्यों चुराते हैं?

औरत के ‘ओर्गेज्म’ की बात पर हम मुंह क्यों चुराते हैं?  

कई ऐसे रिसर्च बताते हैं कि 62 फीसद महिलाओं को ओर्गेज्म मास्टरबेशन के वक्त आता है। ओर्गेज्म भी दूसरे सामान्य और प्राकृतिक प्रक्रियाओं का ही एक हिस्सा है। स्वास्थ्य पर इसका सीधा असर है।