Monday, November 18, 2019
मेरी कहानी - ट्रांसजेंडर होते हुए भी पूरी की पढ़ाई

मेरी कहानी – ट्रांसजेंडर होते हुए भी पूरी की पढ़ाई

हमारे देश में अभी भी जेंडर, सेक्स और सेक्सुअलिटी पर खुलकर बात नहीं होती है| ऐसे में ट्रांसजेंडर लोगों को पढ़ना जरूरी है, क्योंकि यही हमें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का अहम पुल साबित होगा|
मेरी कहानी - लड़की का मायना सिर्फ शादी ही नहीं

मेरी कहानी – लड़की का मायना सिर्फ शादी ही नहीं

शादी का मतलब बस ये नहीं कि आप अपने भविष्य को दांव पर लगाकर और अपनी रूचि का त्यागकर सिर्फ गृहस्थी तक सीमित हो जाए|
पीरियड के मुद्दे ने मुझे मर्द होने का असली मतलब समझा दिया

पीरियड के मुद्दे ने मुझे मर्द होने का असली मतलब समझा दिया

पीरियड के मुद्दे पर काम करने से मुझे मर्द होने का असली मतलब समझ आ गया कि मर्द होने का मतलब औरतों से अपनी तुलना करके उनको नीच दिखाना नहीं|
जाति की परछाई वाला मेरा कड़वा अनुभव

जाति की परछाई वाला मेरा कड़वा अनुभव

अपने जीवन में मैंने लंबे समय तक जातीय भेदभाव का कड़वा अनुभव किया है जहाँ मेरी जाति को मेरी पहचान माना जाता था जो मेरी काली परछाई बन गयी|

गर्व है मुझे कैरेक्टरलेस होने पर – मेरी कहानी

अगर रिश्तेदारों के अनुसार लड़कों से दोस्ती करना, विरोध करना या अपनी बात कहना कैरेक्टरलेस होना है तो ‘मुझे गर्व है कि मैं कैरेक्टरलेस हूँ|’
भारत में क्वीयर मुसलमान होना – मेरी कहानी

भारत में क्वीयर मुसलमान होना – मेरी कहानी

क्वीयर होना अपने आप में एक खूबसूरती है, क्योंकि आप समाज में स्थापित सिसजेंडर हैट्रोपैट्रिआरकी को ठेंगा दिखाकर अपने मूल जैविकी व लैंगिकता के साथ जीना शुरू कर देते है।

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इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

संविधान सभा में हम उन प्रमुख पंद्रह महिला सदस्यों का योगदान आसानी से भुला चुके है या यों कहें कि हमने कभी इसे याद करने या तलाशने की जहमत नहीं की| तो आइये जानते है उन पन्द्रह भारतीय महिलाओं के बारे में जिन्होंने संविधान निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है|  
लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|
भारत में स्त्री विमर्श और स्त्री संघर्ष: इतिहास के झरोखे से

भारत में स्त्री विमर्श और स्त्री संघर्ष: इतिहास के झरोखे से

भारत में स्त्री संघर्ष और स्त्री अधिकार के आन्दोलन को इसी रूप में स्वतंत्रता आन्दोलन के परिप्रेक्ष्य में देखने की आवश्यकता है|
रानी अब्बक्का चौटा: भारत की पहली महिला स्वतंत्रता सेनानी | #IndianWomenInHistory

रानी अब्बक्का चौटा: भारत की पहली महिला स्वतंत्रता सेनानी | #IndianWomenInHistory

रानी अब्बक्का चौटा का स्थान न सिर्फ इतिहास में महत्वपूर्ण है बल्कि वे आज के समय में भी एक सशक्त महिला के रूप में बेहतरीन उदाहरण हैं।
उफ्फ! क्या है ये नारीवादी सिद्धांत? आओ जाने!

उफ्फ! क्या है ये ‘नारीवादी सिद्धांत?’ आओ जाने!

नारीवाद के बारे में सभी ने सुना होगा। मगर यह है क्या? इसके दर्शन और सिद्धांत के बारे में ज्यादातर लोगों को नहीं मालूम। इसे पूरी तरह जाने और समझे बिना नारीवाद पर कोई भी बहस या विमर्श बेमानी है। नव उदारवाद के बाद भारतीय समाज में महिलाओं के प्रति आए बदलाव के बाद इन सिद्धांतों को जानना अब और भी जरूरी हो गया है।