Tuesday, September 17, 2019
केट मिलेट की ‘सेक्शुअल पॉलिटिक्स’

केट मिलेट की ‘सेक्शुअल पॉलिटिक्स’

मिलेट ने लैंगिक परिप्रेक्ष्य में ही नहीं जाति, नस्ल, वर्ग के आधार पर होने वाले दमन को भी इस राजनीति यानी शक्ति संरचना में देखने की सिफारिश की।
पंजाब विभाजन : जब पंजाबी औरतों के शरीर का हो रहा था शिकार

पंजाब विभाजन : जब पंजाबी औरतों के शरीर का हो रहा था शिकार

भारत के बंटवारे के दौरान भी महिलाओं को निशाना बनाया गया| औरतों पर ऐसी हैवानियत की शुरुआत मार्च 1947 के रावलपिंडी के दंगों से शुरू हो गई थी|
फूलन देवी : बीहड़ की एक सशक्त मिसाल

फूलन देवी : बीहड़ की एक सशक्त मिसाल

फूलन देवी की कहानी को हर स्त्री को पढ़ना चाहिए क्योंकि हम फूलन तो नहीं बन सकते लेकिन उनसे प्रेरणा तो ले ही सकते है|
नारीवादी डॉ भीमराव अम्बेडकर : महिला अधिकारों के लिए मील का पत्थर साबित हुए प्रयास

नारीवादी डॉ भीमराव अम्बेडकर : महिला अधिकारों के लिए मील का पत्थर साबित हुए...

महिलाओं के अधिकारों के लिए लड़ाई डॉ. भीमराव अंबेडकर ने वर्षो पहले ही शुरू कर दी थी| उन्होंने साल 1942 से महिला अधिकारों के लिए लड़ाई शुरू की|
झलकारी बाई : शौर्य और वीरता की सशक्त मिसाल 'दलित इतिहास के स्वर्णिम गलियारे से'

झलकारी बाई : शौर्य और वीरता की सशक्त मिसाल ‘दलित इतिहास के स्वर्णिम गलियारे...

झलकारी बाई की गाथा आज भी बुंदेलखंड की लोकगाथाओं में सुनी जा सकती है और भारत सरकार ने में झलकारी बाई के सम्मान में एक डाक टिकट जारी किया है|
द्रविण आंदोलन : ब्राह्मणवादी व्यवस्था के खिलाफ़ सबसे प्रभावी आंदोलन में से एक

द्रविण आंदोलन : ब्राह्मणवादी व्यवस्था के खिलाफ़ सबसे प्रभावी आंदोलन में से एक

द्रविण आंदोलन ब्राह्मणवाद के खिलाफ एक ऐतिहासिक आंदोलन था, जिसका उद्देश्य लोगों में राजनीतिक चेतना विकास और महिला अधिकारों की सुरक्षा करना था|
नीरजा भनोट : भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के लिए एक सशक्त मिसाल

नीरजा भनोट : भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के लिए एक सशक्त मिसाल

नीरजा ने अपनी जिंदगी में हौसले व हिम्मत के दम पर इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया और वो हम सभी के लिए एक सशक्त मिसाल है|
इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

संविधान सभा में हम उन प्रमुख पंद्रह महिला सदस्यों का योगदान आसानी से भुला चुके है या यों कहें कि हमने कभी इसे याद करने या तलाशने की जहमत नहीं की| तो आइये जानते है उन पन्द्रह भारतीय महिलाओं के बारे में जिन्होंने संविधान निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है|  
प्राचीन भारत की स्त्रियाँ जो पर्दे में नहीं टॉपलेस रहती थीं

प्राचीन भारत की स्त्रियाँ जो पर्दे में नहीं टॉपलेस रहती थीं

प्राचीन भारत में स्त्रियों को टॉपलेस घूमने की आजादी थी। यह हमारी सांस्कृतिक गरिमा थी कि इसे सहज भाव से स्वीकार किया जाता था। यह बकायदा एक ऐतिहासिक दस्तावेज है।
रानी अब्बक्का चौटा: भारत की पहली महिला स्वतंत्रता सेनानी | #IndianWomenInHistory

रानी अब्बक्का चौटा: भारत की पहली महिला स्वतंत्रता सेनानी | #IndianWomenInHistory

रानी अब्बक्का चौटा का स्थान न सिर्फ इतिहास में महत्वपूर्ण है बल्कि वे आज के समय में भी एक सशक्त महिला के रूप में बेहतरीन उदाहरण हैं।