महाड़ सत्याग्रह के इतने सालों बाद भी 'भेदभाव' के ख़िलाफ़ ज़ारी है संघर्ष

महाड़ सत्याग्रह के इतने सालों बाद भी ‘भेदभाव’ के ख़िलाफ़ ज़ारी है संघर्ष

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आज ही के दिन साल 1927 में  भीमराव आंबेडकर की अगुवाई में दलितों को अधिकार दिलाने के लिए 'महाड़ सत्याग्रह' किया गया था।
भंवरी देवी : बाल विवाह के ख़िलाफ़ एक बुलंद आवाज़ जिसे पितृसत्ता ने दबाकर रखा

भंवरी देवी : बाल विवाह के ख़िलाफ़ एक बुलंद आवाज़ जिसे पितृसत्ता ने दबाकर...

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शोध के अनुसार भारत में सबसे ज़्यादा बाल विवाह होते हैं। इसी बाल विवाह के ख़िलाफ़ खड़ी हुई थी राजस्थान की एक सरकारी कर्मचारी 'भंवरी देवी।'
मथुरा रेप केस : एक बलात्कार जिससे क़ानून बदल गया था

मथुरा रेप केस : एक बलात्कार जिससे क़ानून बदल गया था

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मथुरा रेप केस ने पूरे देश को सोचने पर मजबूर किया था कि 'बलात्कार' क्या है। कंसेंट का उल्लंघन कब और कैसे होता है। इसी के आधार पर नए क़ानून बने।

दलित महिलाओं की अपने ‘स्तन ढकने के अधिकार’ की लड़ाई : चन्नार क्रांति

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चन्नार क्रांति याद दिलाती है कि समाज ने दलितों, अल्पसंख्यकों, औरतों पर किस तरह के ज़ुल्म किए और कैसे हर बार इंक़लाब से ही समाज में सुधार आया है।

‘मुझे पैरों से क्या काम जब मेरे पास उड़ने के लिए पंख हैं?’ –...

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आज भी फ्रीडा नारीवादी आंदोलन का एक ज़रूरी चेहरा हैं जो सिर्फ़ पितृसत्ता ही नहीं बल्कि हर उस सामाजिक व्यवस्था के खिलाफ थीं जिसकी नींव वर्ग वैषम्य हो।
हीराबाई बरोडकर

भारत की पहली गायिका जिन्होंने कॉन्सर्ट में गाया था : हीराबाई बरोडकर

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हीराबाई बरोडकर एक प्रतिभाशाली गायिका ही नहीं, बल्कि भारत की पहली महिला कलाकार थीं जिन्हें पुरुषों के वर्चस्व के दौर में लोग कॉन्सर्ट में सुनने आए।
कमला दास : प्रभावशाली और बेबाक़ एक 'नारीवादी लेखिका'

कमला दास : प्रभावशाली और बेबाक़ एक नारीवादी लेखिका

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कमला दास आजाद भारत की एक प्रभावशाली नारीवादी लेखिका थी,जिन्होंने मासिकधर्म, यौवन, महिलाओं के यौन जीवन, लेस्बियन सेक्स जैसे मुद्दों पर बेबाक़ी से लिखा।
अमृता शेरगिल

सालगिरह पर ख़ास : बेहतरीन और बेबाक़ चित्रकार ‘अमृता शेरगिल’ से जुड़ी रोचक बातें

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अमृता का जीवन उनकी पेंटिंग्स की तरह ही रंगीन और रहस्यमय था। भारतीय चित्रकला की दुनिया में वो एक लहर बनकर आईं थीं, भले ही बहुत कम समय के लिए आई हों।
कमल रणदिवे

कमल रणदिवे : मेडिकल रिसर्च की पुरुषवादी दुनिया में एक बेमिसाल औरत । #IndianWomenInHistory

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विज्ञान की दुनिया से जुड़ीं औरतों के लिए कमल रणदिवे एक मिसाल हैं। उनके योगदान से भारत में मेडिकल रिसर्च को नई दिशा मिली है।
विरोध

आवाज़ बुलंद करती ‘आज की महिलाएँ’, क्योंकि विरोध का कोई जेंडर नहीं होता

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महिलाओं के विरोध को चाहे पुरुषों की क्रान्ति से ढकने की कोशिश की गई हो, लेकिन महिलाओं का प्रतिरोध तो सूरज है जो ज़रूर सामने आएगा।

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अग्नि परीक्षा के बहाने इसके मूल मुद्दे 'वर्जिनिटी' की बात !

अग्नि परीक्षा के बहाने इसके मूल मुद्दे ‘वर्जिनिटी’ की बात !

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पवित्रता की अग्नि परीक्षा आदिकाल से अब आधुनिक काल तक महिलाएँ देती आ रही हैं। लेकिन परीक्षा के तौर तरीके में अब कई बदलाव हो गया है।
इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

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संविधान सभा में हम उन प्रमुख पंद्रह महिला सदस्यों का योगदान आसानी से भुला चुके है या यों कहें कि हमने कभी इसे याद करने या तलाशने की जहमत नहीं की| तो आइये जानते है उन पन्द्रह भारतीय महिलाओं के बारे में जिन्होंने संविधान निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है|  
फैमिली ग्रुप्स के अश्लील व्हाट्सएप्प मेसेज – एक विश्लेषण

फैमिली ग्रुप्स के अश्लील व्हाट्सएप्प मेसेज – एक विश्लेषण

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आजकल फैमिली ग्रुप में अपने बड़े-बूढ़े और रिश्तेदारों की तरफ से शेयर किये जाने वाले कुछ उन चुनिन्दा भद्दे व्हाट्सएप्प मेसेज के बारे बात करने जा रही हूँ, जो महिलाओं के प्रति व उनसे बनाये जाने वाले रिश्ते के प्रति की अपनी घिनौनी सोच को साझा करते हैं|
पैड खरीदने में माँ को आज भी शर्म आती है

पैड खरीदने में माँ को आज भी शर्म आती है

मासिकधर्म और सैनिटरी पैड पर हमारे घरों में चर्चा करने की बेहद ज़रूरत है और जिसकी शुरुआत हम महिलाओं को ही करनी होगी।
उफ्फ! क्या है ये नारीवादी सिद्धांत? आओ जाने!

उफ्फ! क्या है ये ‘नारीवादी सिद्धांत?’ आओ जाने!

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नारीवाद के बारे में सभी ने सुना होगा। मगर यह है क्या? इसके दर्शन और सिद्धांत के बारे में ज्यादातर लोगों को नहीं मालूम। इसे पूरी तरह जाने और समझे बिना नारीवाद पर कोई भी बहस या विमर्श बेमानी है। नव उदारवाद के बाद भारतीय समाज में महिलाओं के प्रति आए बदलाव के बाद इन सिद्धांतों को जानना अब और भी जरूरी हो गया है।