Monday, November 18, 2019

मिनीमाता : छत्तीसगढ़ की पहली महिला सांसद

सन् 1913 में जन्मी मिनीमाता इसी तरह की ख़ास शख्सियत थीं। उनका असली नाम मीनाक्षी देवी था। उनकी कर्म-भूमि छत्तीसगढ़ प्रदेश रहा।
राजनीति को बदलने वाली महिलाओं को वोट देने से क्यों कतराते है हम?

राजनीति को बदलने वाली महिलाओं को वोट देने से क्यों कतराते है हम?

राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना उन्हें न सिर्फ आर्थिक रूप से मजबूत करेगा बल्कि देश में सामाजिक संतुलन व शांति की संभावना भी बढ़ जाएगी।

गांधी के बहाने सच के प्रयोगों की बात

गेराल्डाइन फोर्ब्स लिखती हैं कि यूरोप की नज़र में भारत एक अत्यंत पिछ्ड़ा हुआ देश था क्योंकि यहाँ की स्त्रियों की दुर्दशा जैसी दुनिया में कहीं नहीं थी।

जेसिका कॉक्स: बिना हाथों वाली दुनिया की पहली पायलट

‘जेसिका कॉक्स’ दुनिया की ऐसी पहली महिला पायलट हैं जो पैरों से एरोप्लेन उड़ाती हैं और इतना ही नहीं वे विश्व की पहली लायसेंसधारी आर्मलेस पायलट हैं।
लाइबि ओइनम : मणिपुर की पहली महिला ऑटो चालक

लाइबि ओइनम : मणिपुर की पहली महिला ऑटो चालक

लाइबि ओइनम नाम है उस साहसी माँ का जिसने मणिपुर की पहली महिला ऑटो रिक्शा चालक के रूप में अपनी पहचान बनाई है। वह मणिपुर की पहली महिला ऑटो चालक हैं।
वो लड़कियाँ जिन्हें आज भी शिक्षा के दीपक से अपनी ज़िंदगी की दीपावली मनाने का इंतज़ार है

वो लड़कियाँ जिन्हें आज भी शिक्षा के दीपक से अपनी ज़िंदगी की दीपावली मनाने...

लड़कियों को हमारे समाज में पराया धन समझा जाता है। यह भी एक कारण है जिसकी वजह से लड़कियों की पढ़ाई-लिखाई पर ज्यादा खर्च नही किया जाता।
वीमेन विथ डिसेबिलिटीज़ इंडिया नेटवर्क : भारतीय विकलांग महिलाओं के विकास की दिशा में एक अहम पहल

वीमेन विथ डिसेबिलिटीज़ इंडिया नेटवर्क : भारतीय विकलांग महिलाओं के विकास की दिशा में...

वीमेन विथ डिसेबिलिटीज़ इंडिया नेटवर्क की यह मीटिंग भारतीय विकलांग महिलाओं के विकास और उनकी वर्तमान स्थिति को बेहतर बनाने की दिशा में एक अहम पहल साबित हुई।
घर की इन जेंडर आधारित जगहों से कब ख़त्म होगा भेदभाव

घर की इन जेंडर आधारित जगहों से कब ख़त्म होगा भेदभाव

‘दाग अच्छे हैं’ कहकर किसी डिटर्जेंट पाउडर को बेच पाना बेहद आसान है, लेकिन कोई भी इसी टैग लाइन का उपयोग कर एक सैनिटरी पैड को बेचने की हिम्मत नहीं कर सकता।
मर्दों की जन्नत बनाने के लिए दोज़ख़ से गुज़रती औरतें

मर्दों की जन्नत बनाने के लिए दोज़ख़ से गुज़रती औरतें

स्त्री को दुनिया की 'सबसे खूबसूरत वस्तु' कहा जाता है। हमारा मातृत्व, रचनात्मकता, प्रबंधन, दिन-रात का अदृश्य श्रम हमें सुंदरतम कहलवाने में शामिल नहीं है।
शादी

शादी के बाद ‘पति-पत्नी’ नहीं बल्कि ‘साथी’ बनना है समानता का पहला क़दम

समाज में अपने साथ होने वाली घरेलू हिंसा को छुपाती ऐसी कई औरतें हैं जो अपने पति को ईश्वर मानती है और उनके ऊपर हाथ उठाए जाने को भी सही ठहराती है।

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इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

संविधान सभा में हम उन प्रमुख पंद्रह महिला सदस्यों का योगदान आसानी से भुला चुके है या यों कहें कि हमने कभी इसे याद करने या तलाशने की जहमत नहीं की| तो आइये जानते है उन पन्द्रह भारतीय महिलाओं के बारे में जिन्होंने संविधान निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है|  
लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|
भारत में स्त्री विमर्श और स्त्री संघर्ष: इतिहास के झरोखे से

भारत में स्त्री विमर्श और स्त्री संघर्ष: इतिहास के झरोखे से

भारत में स्त्री संघर्ष और स्त्री अधिकार के आन्दोलन को इसी रूप में स्वतंत्रता आन्दोलन के परिप्रेक्ष्य में देखने की आवश्यकता है|
रानी अब्बक्का चौटा: भारत की पहली महिला स्वतंत्रता सेनानी | #IndianWomenInHistory

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रानी अब्बक्का चौटा का स्थान न सिर्फ इतिहास में महत्वपूर्ण है बल्कि वे आज के समय में भी एक सशक्त महिला के रूप में बेहतरीन उदाहरण हैं।
उफ्फ! क्या है ये नारीवादी सिद्धांत? आओ जाने!

उफ्फ! क्या है ये ‘नारीवादी सिद्धांत?’ आओ जाने!

नारीवाद के बारे में सभी ने सुना होगा। मगर यह है क्या? इसके दर्शन और सिद्धांत के बारे में ज्यादातर लोगों को नहीं मालूम। इसे पूरी तरह जाने और समझे बिना नारीवाद पर कोई भी बहस या विमर्श बेमानी है। नव उदारवाद के बाद भारतीय समाज में महिलाओं के प्रति आए बदलाव के बाद इन सिद्धांतों को जानना अब और भी जरूरी हो गया है।