Thursday, January 23, 2020

5 ज़रूरी मुद्दे : नागरिकता संशोधन कानून के विरोध प्रदर्शन के बीच जिन्हें याद...

0
यह बेहद चिंताजनक है कि देश का ध्यान इन मुद्दों से हटाए जाने में नागरिकता संशोधन कानून ने कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है!
भारतीय मीडिया

सीएए प्रदर्शन के बीच लोकतंत्र के खिलाफ और सत्ता के साथ खड़ा ‘भारतीय मीडिया’

2
आज जहां तक निगाह जाती है कुछ अपवादों को छोड़कर हम यही देखते हैं कि लोकतांत्रिक देश भारत का मीडिया लोकतंत्र के खिलाफ उठ खड़ा हुआ है।

हाँ, मैं नारीवादी हूँ और मैं नागरिकता संशोधन कानून का विरोध करती हूँ!

1
संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ़ कोई भी कानून बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हाँ, मैं नारीवादी हूँ और मैं सीएए और एनआरसी का पुरज़ोर विरोध करती हूँ।
शहर में औरत होना : क्योंकि कोई शहर एक औरत को संविधान वाली आज़ादी नहीं देता

शहर में औरत होना : क्योंकि कोई शहर एक औरत को संविधान वाली आज़ादी...

1
ऐसा भी नहीं है कि ये दूसरे शहर मुझे संविधान वाली आज़ादी देते हैं। यहाँ तो ख़ुद को अपने सामान की तरह सँभालकर चलना पड़ता है।
नागरिकता संशोधन कानून के ख़िलाफ़ शाहीन बाग की औरतों का सत्याग्रह

नागरिकता संशोधन कानून के ख़िलाफ़ शाहीन बाग की औरतों का सत्याग्रह

3
संविधान बचाने की इस लड़ाई में शाहीन बाग की औरतें एक मिसाल कायम कर चुकी हैं, उनका आंदोलन अब सत्याग्रह में बदल चुका है- संविधान को बचाने का सत्याग्रह।

नागरिकता संशोधन क़ानून और एनआरसी के ख़िलाफ़ विदेशों में भी विरोध

2
राष्ट्र में हर तरफ सीएए व एनआरसी के विरोध में प्रदर्शन चल रहे हैं। प्रदर्शनों की यही लहर भारत की सीमा के पार अंतरराष्ट्रीय फलक पर भी देखने को मिल रही है।
औरत के खाँचे की नहीं ‘इंसान’ बनने की बात है बस!

औरत के खाँचे की नहीं ‘इंसान’ बनने की बात है बस!

0
एक औरत को सिर्फ अच्छी या बुरी बना देना उसके इंसान होने की पहचान पर हावी कर दी जाती है, उसकी ख्वाहिशे हों तो व बुरी, न हों, तो अच्छी।

पितृसत्ता का वास्ता ‘जेंडर’ से ज़्यादा ‘सोच’ से है, जो किसी की भी हो...

0
पितृसत्ता की ईमारत यानी की इसके पूरे ढांचे का सर्वोपरि पुरुष ही होता है, जो की सत्ता को बाँटकर और महिलाओं में आपस में ही फूट डलवाकर राज करना चाहता है।
मैं एक महिला हूं और मुझे एनकाउंटर न्याय नहीं लगता

मैं एक महिला हूं और मुझे एनकाउंटर न्याय नहीं लगता

0
महिलाओं के लिए यह विशेष तौर पर सचेत होने का वक्त है। सरकारें अपनी ओर से फास्ट ट्रैक कोर्ट, पुलिस रिफोर्म, प्रशासनिक कार्रवाई आदि पर जोर नहीं दे रही।
मैं आपकी स्टीरियोटाइप जैसी नहीं फिर भी आदिवासी हूं

मैं आपकी स्टीरियोटाइप जैसी नहीं फिर भी आदिवासी हूं

3
गुप्ता और मुगलों के ज़िक्र से लदी इतिहास की किताबों में आदिवासियों की पहचान इतनी ही थी कि वे पिछड़े और बीते ज़माने में जीते थे।

फॉलो करे

4,903FansLike
786FollowersFollow
267FollowersFollow

ट्रेंडिंग

इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

2
संविधान सभा में हम उन प्रमुख पंद्रह महिला सदस्यों का योगदान आसानी से भुला चुके है या यों कहें कि हमने कभी इसे याद करने या तलाशने की जहमत नहीं की| तो आइये जानते है उन पन्द्रह भारतीय महिलाओं के बारे में जिन्होंने संविधान निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है|  
लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

4
गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|
फैमिली ग्रुप्स के अश्लील व्हाट्सएप्प मेसेज – एक विश्लेषण

फैमिली ग्रुप्स के अश्लील व्हाट्सएप्प मेसेज – एक विश्लेषण

1
आजकल फैमिली ग्रुप में अपने बड़े-बूढ़े और रिश्तेदारों की तरफ से शेयर किये जाने वाले कुछ उन चुनिन्दा भद्दे व्हाट्सएप्प मेसेज के बारे बात करने जा रही हूँ, जो महिलाओं के प्रति व उनसे बनाये जाने वाले रिश्ते के प्रति की अपनी घिनौनी सोच को साझा करते हैं|
भारत में स्त्री विमर्श और स्त्री संघर्ष: इतिहास के झरोखे से

भारत में स्त्री विमर्श और स्त्री संघर्ष: इतिहास के झरोखे से

0
भारत में स्त्री संघर्ष और स्त्री अधिकार के आन्दोलन को इसी रूप में स्वतंत्रता आन्दोलन के परिप्रेक्ष्य में देखने की आवश्यकता है|
पैड खरीदने में माँ को आज भी शर्म आती है

पैड खरीदने में माँ को आज भी शर्म आती है

मासिकधर्म और सैनिटरी पैड पर हमारे घरों में चर्चा करने की बेहद ज़रूरत है और जिसकी शुरुआत हम महिलाओं को ही करनी होगी।