कोरोना से जूझते देश में 'विशेषाधिकारों' और 'दमन' के बीच दिखता हमारे दोमुँहा समाज का चेहरा!

कोरोना से जूझते देश में ‘विशेषाधिकारों’ और ‘दमन’ के बीच दिखता हमारे दोमुँहा समाज...

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जनता कर्फ़्यू में तालियाँ बजाने के बाद कई डाक्टरों को उनके किराए के घरों से बेघर तक कर दिया गया । ये एक दोमुहे समाज की निशानी नहीं है?

क्या है औरतों पर कोरोना वायरस का असर?

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मुसीबत की इस घड़ी में ज़रूरत है एकजुट होकर हालात सुधारने की क्योंकि लिंग आधारित सामाजिक भेदभाव हमें और अँधेरे की तरफ ही ले जाएगा।
हार्वी वाइस्टिन को मिली सजा '#MeToo' आंदोलन की सबसे बड़ी जीत है !

‘हार्वी वाइस्टिन’ को मिली सजा ‘#MeToo’ आंदोलन की सबसे बड़ी जीत है !

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हार्वी वाइंस्टिन को मिली सज़ा कानूनी जीत है #MeToo आंदोलन की। ऐसे में #MeToo की पहली सफलता मानी जाएगी जब हम सामने वाली महिला पर भरोसा करें।
पितृसत्ता पर लैंगिक समानता का तमाचा जड़ती 'दुआ-ए-रीम' ज़रूर देखनी चाहिए!

पितृसत्ता पर लैंगिक समानता का तमाचा जड़ती ‘दुआ-ए-रीम’ ज़रूर देखनी चाहिए!

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सात मिनट और चंद सेकेंड की इस विडियो को जब हम देखते हैं तो इसकी शुरुआत में हम देश, काल, भाषा और धर्म से परे महिला को ‘एक स्थिति’ में पाते है।
औरत के कामों का हिसाब करती ‘घर की मुर्ग़ी’

औरत के कामों का हिसाब करती ‘घर की मुर्ग़ी’

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कहते हैं कि जिस दिन महिला श्रम का हिसाब किया जायेगा उस दिन हमारे समाज की सबसे बड़ी चोरी पकड़ी जाएगी। इसी तर्ज़ पर ये विडियो भी है।
लैंगिक समानता के लिए ज़रूरी है महिला खिलाड़ियों को बढ़ावा देना

लैंगिक समानता के लिए ज़रूरी है महिला खिलाड़ियों को बढ़ावा देना

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खेल महिलाओं के जीवन को चूल्हे चौके से अलग भी एक नई जिंदगी देता है इसलिए हमें बस खुले दिल से महिलाओं को खेलों में भागीदारी को बढ़ावा देना चाहिए।
जेंडर के इन दो छोर में 'मैं कहाँ जाऊँ?'

जेंडर के इन दो छोर में ‘मैं कहाँ जाऊँ?’

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सुरक्षा के नामपर हमने सार्वजनिक स्थानों को जेंडर के आधार पर इस तरह बाँट दिया कि यही सुरक्षित स्थान अब लोगों के एक पूरे समूह के लिए असुरक्षित बन गए हैं।

‘महिला दिवस’ की मुबारकबाद से सिर्फ काम नहीं चलेगा अब…

हम हर साल महिला दिवस मनाते हैं, महिलाओं की तरक्की पर गर्व करते हैं और देश के विकास में योगदान देने के लिए उत्साहित करते हैं, लेकिन किस कीमत पर?

महिला दिवस : एकदिन का ‘क़िस्सा’ नहीं बल्कि हर रोज़ का ‘हिस्सा’ हो

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यूएन की तरफ़ से अंतरराष्‍ट्रीय महिला दिवस पर इसबार की थीम में महिलाओं को उनके अधिकार के लिए जागरूक करना और लैंगिक समानता को केंद्र में रखा गया है।

हक़ की बात बोलती हुई औरतें अच्छी क्यों नहीं लगती आपको?

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जो औरतें,लड़कियां,छात्राएं और दादियां आज प्रोटेस्ट करती हुई अच्छी लग रही हैं वो शिक्षा लेने और नौकरी के लिए सड़क़ पर चलती हुई अच्छी क्यों नहीं लगती?

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इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

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संविधान सभा में हम उन प्रमुख पंद्रह महिला सदस्यों का योगदान आसानी से भुला चुके है या यों कहें कि हमने कभी इसे याद करने या तलाशने की जहमत नहीं की| तो आइये जानते है उन पन्द्रह भारतीय महिलाओं के बारे में जिन्होंने संविधान निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है|  
पैड खरीदने में माँ को आज भी शर्म आती है

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मासिकधर्म और सैनिटरी पैड पर हमारे घरों में चर्चा करने की बेहद ज़रूरत है और जिसकी शुरुआत हम महिलाओं को ही करनी होगी।
फैमिली ग्रुप्स के अश्लील व्हाट्सएप्प मेसेज – एक विश्लेषण

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आजकल फैमिली ग्रुप में अपने बड़े-बूढ़े और रिश्तेदारों की तरफ से शेयर किये जाने वाले कुछ उन चुनिन्दा भद्दे व्हाट्सएप्प मेसेज के बारे बात करने जा रही हूँ, जो महिलाओं के प्रति व उनसे बनाये जाने वाले रिश्ते के प्रति की अपनी घिनौनी सोच को साझा करते हैं|
अग्नि परीक्षा के बहाने इसके मूल मुद्दे 'वर्जिनिटी' की बात !

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पवित्रता की अग्नि परीक्षा आदिकाल से अब आधुनिक काल तक महिलाएँ देती आ रही हैं। लेकिन परीक्षा के तौर तरीके में अब कई बदलाव हो गया है।
औरतों की अनकही हसरतें खोलती है ‘लस्ट स्टोरी’

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लस्ट स्टोरी समाज के अलग-अलग तबके में आधी आबादी के उस आधे किस्से को बयाँ करती है जिसे हमेशा चरित्रवान और चरित्रहीन के दायरें में समेटा गया है|