Monday, November 18, 2019
शिक्षा के ज़रिये हर बच्चे को स्कूल तक पहुँचाना ही मेरा मकसद है : पायल रॉय

शिक्षा के ज़रिये हर बच्चे को स्कूल तक पहुँचाना ही मेरा मकसद है :...

पायल रॉय एक स्टूडेंट और समाजसेविका हैं जिन्होंने अपने कॉलेज के दिनों में ही जबलपुर की बस्तियों में जाकर वहाँ के बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया था।
शादी

शादी के बाद ‘पति-पत्नी’ नहीं बल्कि ‘साथी’ बनना है समानता का पहला क़दम

समाज में अपने साथ होने वाली घरेलू हिंसा को छुपाती ऐसी कई औरतें हैं जो अपने पति को ईश्वर मानती है और उनके ऊपर हाथ उठाए जाने को भी सही ठहराती है।
आत्मविश्वास

औरत सिर्फ़ पैसे नहीं, बल्कि अपना आत्मसम्मान और आत्मविश्वास भी कमाती है

महिला अगर पैसे कमाती है तो वो न केवल आत्मनिर्भर बनती है बल्कि उसमें आत्मविश्वास भी बढ़ता है। साथ ही अगली पीढ़ी व अन्य औरतों को भी प्रेरित करती है।
हाउसवाइफ़

जिस दिन हाउसवाइफ़ के काम का हिसाब होगा, उस दिन दुनिया की सबसे बड़ी...

घर में बिना किसी छुट्टी और बोनस के सालभर काम करने वाली हाउसवाइफ़ के लिए आसानी से कह दिया है - 'वो कुछ नहीं करती। घर पर रहती है।'
यौन-उत्पीड़न

यौन-उत्पीड़न की शिकायतों को निगलना और लड़कियों को कंट्रोल करना – यही है ICC...

अकादमिक संस्थानों में ICC यानी इंटरनल कंप्लेण्ट्स कमिटी का मुख्य काम यौन-उत्पीड़न की शिकायतों को दबाने का होता जा रहा है।
यहाँ गन्ना और ग़रीबी निगल रही हैं हज़ारों औरतों की कोख़

यहाँ गन्ना और ग़रीबी निगल रही हैं हज़ारों औरतों की कोख़

अभी भी मज़दूर औरतें माहवारी जुर्माना भरती हैं या फिर मासिकधर्म की आफ़त से हमेशा के लिए छुटकारा पाने के लिए अपने ही कोख़ फेंक देने में मजबूर हो जाती हैं।
बेटी के स्टार्टअप प्लान पर हो ज़्यादा ख़र्च, न की उसकी शादी में

बेटी के स्टार्टअप प्लान पर हो ज़्यादा ख़र्च, न की उसकी शादी में

मेहनत से बेटी को शिक्षा में बराबरी दिलाने के बाद आप उसके मेडल, उपलब्धियों और डिग्रियों को शादी भी भारी-भरकम एलबम और वीडियो के सामने कैसे भूल सकते हैं भला?
वजाइना को वॉश के बाज़ार से ज़्यादा स्वतंत्र छोड़ने की ज़रूरत है

वजाइना को वॉश के बाज़ार से ज़्यादा स्वतंत्र छोड़ने की ज़रूरत है

कंपनियां वजाइना वॉश जैसे उत्पाद को बेचने में नहीं शर्माती। ये आपके वजाइना को पहले से सुन्दर और गोरा करने का गलत दावा करते हैं जिससे इनकी बिक्री अधिक हो।

पितृसत्ता का ये श्रृंगार है महिलाओं के ख़िलाफ़ मज़बूत हथियार

पितृसत्ता के श्रृंगार को समझना बेहद ज़रूरी है। क्योंकि स्त्री द्वेष जैसी समस्याओं का प्रमुख आधार है, जिसके अनुसार ये महिलाओं को बाँटने की कोशिश करती हैं।
मेरी यात्रा का अनुभव और महिला शौचालय की बात

मेरी यात्रा का अनुभव और महिला शौचालय की बात

किसी महिला यात्री के लिए जिसे महिलाओं के लिए अलग से बने शौचालय इस्तेमाल करने की आदत हो, इस तरह पुरुषों के लिए बने शौचालय को इस्तेमाल कर पाना खासा असुविधाजनक हो स

फॉलो करे

4,523FansLike
570FollowersFollow
237FollowersFollow

ट्रेंडिंग

इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

संविधान सभा में हम उन प्रमुख पंद्रह महिला सदस्यों का योगदान आसानी से भुला चुके है या यों कहें कि हमने कभी इसे याद करने या तलाशने की जहमत नहीं की| तो आइये जानते है उन पन्द्रह भारतीय महिलाओं के बारे में जिन्होंने संविधान निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है|  
लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|
भारत में स्त्री विमर्श और स्त्री संघर्ष: इतिहास के झरोखे से

भारत में स्त्री विमर्श और स्त्री संघर्ष: इतिहास के झरोखे से

भारत में स्त्री संघर्ष और स्त्री अधिकार के आन्दोलन को इसी रूप में स्वतंत्रता आन्दोलन के परिप्रेक्ष्य में देखने की आवश्यकता है|
रानी अब्बक्का चौटा: भारत की पहली महिला स्वतंत्रता सेनानी | #IndianWomenInHistory

रानी अब्बक्का चौटा: भारत की पहली महिला स्वतंत्रता सेनानी | #IndianWomenInHistory

रानी अब्बक्का चौटा का स्थान न सिर्फ इतिहास में महत्वपूर्ण है बल्कि वे आज के समय में भी एक सशक्त महिला के रूप में बेहतरीन उदाहरण हैं।
उफ्फ! क्या है ये नारीवादी सिद्धांत? आओ जाने!

उफ्फ! क्या है ये ‘नारीवादी सिद्धांत?’ आओ जाने!

नारीवाद के बारे में सभी ने सुना होगा। मगर यह है क्या? इसके दर्शन और सिद्धांत के बारे में ज्यादातर लोगों को नहीं मालूम। इसे पूरी तरह जाने और समझे बिना नारीवाद पर कोई भी बहस या विमर्श बेमानी है। नव उदारवाद के बाद भारतीय समाज में महिलाओं के प्रति आए बदलाव के बाद इन सिद्धांतों को जानना अब और भी जरूरी हो गया है।