हमारे बारे में

फेमिनिज़्म इन इंडिया (एफआईआई) एक अवॉर्ड-विनिंग, इंटरसेक्शनल फेमिनिस्ट डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म है, जो युवाओं के बीच जागरूकता बढ़ाने और फेमिनिस्ट सोच विकसित करने का काम करता है। इसकी शुरुआत साल 2013 में एक ब्लॉग के रूप में हुई, जो साल 2014 तक एक कम्युनिटी प्लेटफॉर्म बना और साल 2016 में एक रजिस्टर्ड कंपनी बना। हमने साल 2019 में एफआईआई हिंदी लॉन्च किया, जिसने नारीवादी विमर्श को अंग्रेज़ी से परे ज़्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की। एफआईआई ने 10,000 से ज्यादा अंग्रेज़ी और 4000 से ज्यादा हिंदी लेख प्रकाशित किए हैं और यूएन, टिन्डर, आईपीपीएफ, आईसीआरडब्ल्यू जैसे संगठनों के साथ काम किया है। हम भारतीय महिलाओं और हाशिये के समुदायों की कहानियों, इतिहास और अनुभवों को आसान और प्रभावी डिजिटल स्टोरीटेलिंग के ज़रिए सामने लाते हैं और पितृसत्तात्मक नैरेटिव्स को चुनौती देते हैं।

हमने कई कैंपेन के ज़रिए कहानी और एडवोकेसी को जोड़ने की कोशिश की। हमने #AbortionMeraHaq के ज़रिए अबॉर्शन और बॉडी ऑटोनॉमी पर बातचीत को सामान्य बनाने, #DigitalHifazat से ऑनलाइन सुरक्षा और टेक्नोलॉजी आधारित जेंडर हिंसा पर जागरूकता बढ़ाने, #GBVinMedia से जेंडर आधारित हिंसा की जिम्मेदार रिपोर्टिंग पर ज़ोर दिया, और #IndianWomenInHistory के माध्यम से इतिहास में अनदेखी महिलाओं को सामने लाने की कोशिश की। हमने साल 2024 के लोकसभा चुनाव के मद्देनजर #FeministBallot कैंपेन के माध्यम से महिलाओं और क्वीयर समुदाय के चुनावी अनुभवों को केंद्र में लाकर पुरुष-प्रधान राजनीतिक नैरेटिव को चुनौती दी। एफआईआई का काम रिसर्च और डेटा पर भी आधारित है और हम इन्फोग्राफिक्स और डेटा विज़ुअल्स के ज़रिए जटिल मुद्दों को आसान बनाते हैं। एक वैकल्पिक मीडिया प्लेटफॉर्म के रूप में एफआईआई न सिर्फ कहानियां बताता है, बल्कि तथ्यों के साथ गलत और भ्रामक नैरेटिव को चुनौती देता है और एक जागरूक समुदाय बनाता है।

साल 2025 में हमने अंग्रेज़ी और खास कर हिन्दी भाषा में फेमिनिस्ट डिसकोर्स को सरल बनाने के लिए ‘फेमिनिस्ट ग्लोसरी’ और ‘नारीवादी शब्दकोश’ का लॉन्च किया, जिससे अंग्रेज़ी के कठिन शब्दों को आसान हिंदी में समझाया जा सके।

एफआईआई हिंदी का लॉन्च भारत में फेमिनिस्ट विमर्श को लोकतांत्रिक बनाने की दिशा में एक अहम कदम था। जहां ज़्यादातर ऑनलाइन फेमिनिस्ट कंटेंट अंग्रेज़ी में सीमित था, जिससे बड़ी आबादी इससे दूर रह जाती थी, वहीं हिंदी प्लेटफॉर्म ने इस गैप को कम किया और जेंडर, अधिकार और सामाजिक न्याय की बातों को ज़्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने का काम किया। यह सिर्फ अनुवाद नहीं, बल्कि स्थानीय संदर्भों के साथ कंटेंट को समझने और जोड़ने की कोशिश है। एफआईआई हिंदी ने उन लोगों की आवाज़ को भी सामने लाया, जो अंग्रेज़ी में लिखने में सहज नहीं हैं, लेकिन उनके पास महत्वपूर्ण अनुभव और कहानियां हैं। हमने इससे प्रतिनिधित्व बढ़ाने की दिशा में काम किया और फेमिनिस्ट स्टोरीटेलिंग ज्यादा विविध बनी। आज के समय में, जब ऑनलाइन गलत जानकारी और पितृसत्तात्मक सोच तेजी से फैल रही है, एफआईआई हिंदी ने एक जागरूक और संवेदनशील पाठक वर्ग तैयार करने में अहम भूमिका निभा रहा है।

आज एफआईआई हिंदी एक रिसोर्स-आधारित प्लेटफॉर्म के रूप में काम कर रहा है, जिसका उद्देश्य हिंदी में उपलब्ध नारीवादी सामग्री को एकत्रित करना और सुलभ बनाना है। यह प्लेटफॉर्म नारीवाद पर समझ विकसित करने और नारीवादी दृष्टिकोण को सरल, सुलभ और व्यापक रूप से साझा करने की दिशा में काम करता है।

पुरस्कार और सम्मान

आप हमारे लेख यहां भी पढ़ सकते हैं

Skip to content