Monday, January 20, 2020

दोहरे मापदंडों के बीच ‘हमारे शहर और सेक्स’

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भारत के किसी भी शहर में किसी युवा और अविवाहित महिला के लिए सेक्स कर पाना बिलकुल किसी चीज़ की स्मगलिंग करने जैसा ही होता है।

5 ज़रूरी मुद्दे : नागरिकता संशोधन कानून के विरोध प्रदर्शन के बीच जिन्हें याद...

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यह बेहद चिंताजनक है कि देश का ध्यान इन मुद्दों से हटाए जाने में नागरिकता संशोधन कानून ने कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है!

जेएनयू में हुई हिंसा देश के लोकतंत्र पर सीधा हमला है

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जेएनयू में जो भी हुआ, वो जनांदोलनों से हक़पकाए हुए लोगों की क्रूरता थी। ये एक हिंसात्मक प्रतिक्रिया थी, लोगों की एकजुटता और उनके प्रतिरोध के खिलाफ़।
भारतीय मीडिया

सीएए प्रदर्शन के बीच लोकतंत्र के खिलाफ और सत्ता के साथ खड़ा ‘भारतीय मीडिया’

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आज जहां तक निगाह जाती है कुछ अपवादों को छोड़कर हम यही देखते हैं कि लोकतांत्रिक देश भारत का मीडिया लोकतंत्र के खिलाफ उठ खड़ा हुआ है।

हाँ, मैं नारीवादी हूँ और मैं नागरिकता संशोधन कानून का विरोध करती हूँ!

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संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ़ कोई भी कानून बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हाँ, मैं नारीवादी हूँ और मैं सीएए और एनआरसी का पुरज़ोर विरोध करती हूँ।

ख़ास बात : दिल्ली में रहने वाली यूपी की ‘एक लड़की’ जो नागरिकता संशोधन...

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सीएए के विरोध की मुख्य वजह ये है कि भारत में नागरिकता का आधार धर्म नहीं हो सकता। भारत एक धर्मनिरपेक्ष राज्य है और यह हमारे संविधान की मूल भावना के खिलाफ है।
शहर में औरत होना : क्योंकि कोई शहर एक औरत को संविधान वाली आज़ादी नहीं देता

शहर में औरत होना : क्योंकि कोई शहर एक औरत को संविधान वाली आज़ादी...

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ऐसा भी नहीं है कि ये दूसरे शहर मुझे संविधान वाली आज़ादी देते हैं। यहाँ तो ख़ुद को अपने सामान की तरह सँभालकर चलना पड़ता है।
नागरिकता संशोधन कानून के ख़िलाफ़ शाहीन बाग की औरतों का सत्याग्रह

नागरिकता संशोधन कानून के ख़िलाफ़ शाहीन बाग की औरतों का सत्याग्रह

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संविधान बचाने की इस लड़ाई में शाहीन बाग की औरतें एक मिसाल कायम कर चुकी हैं, उनका आंदोलन अब सत्याग्रह में बदल चुका है- संविधान को बचाने का सत्याग्रह।
नागरिकता संशोधन क़ानून का 'इस्लामोफ़ोबिक' हिस्सा : माने धर्म की आड़ में, देश के बुनयादी मुद्दे से भटकाने का सरकारी पैतरा

नागरिकता संशोधन क़ानून का ‘इस्लामोफ़ोबिक’ हिस्सा : माने धर्म की आड़ में, देश के...

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सरकार ने सीएए और एनआरसी को समझने की उधेड़-बुन ने देशभर को इस तरह उलझा दिया है कि देश की बुनियादी समस्याओं पर चर्चा करना तो क्या हमने विचार करना भी छोड़ दिया।

नागरिकता संशोधन क़ानून और एनआरसी के ख़िलाफ़ विदेशों में भी विरोध

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राष्ट्र में हर तरफ सीएए व एनआरसी के विरोध में प्रदर्शन चल रहे हैं। प्रदर्शनों की यही लहर भारत की सीमा के पार अंतरराष्ट्रीय फलक पर भी देखने को मिल रही है।

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लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

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इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

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फैमिली ग्रुप्स के अश्लील व्हाट्सएप्प मेसेज – एक विश्लेषण

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आजकल फैमिली ग्रुप में अपने बड़े-बूढ़े और रिश्तेदारों की तरफ से शेयर किये जाने वाले कुछ उन चुनिन्दा भद्दे व्हाट्सएप्प मेसेज के बारे बात करने जा रही हूँ, जो महिलाओं के प्रति व उनसे बनाये जाने वाले रिश्ते के प्रति की अपनी घिनौनी सोच को साझा करते हैं|
रानी अब्बक्का चौटा: भारत की पहली महिला स्वतंत्रता सेनानी | #IndianWomenInHistory

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