वैकोम सत्याग्रह : छुआछूत के ख़िलाफ़ एक ऐतिहासिक जंग

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इस आंदोलन की एक खासियत थी इसमें शामिल महिलाएं। उस दौर में राजनैतिक जीवन में महिलाओं ने सक्रिय होना शुरू ही किया था।

औरत कोई ‘चीज़’ नहीं इंसान है, जिसके लिए हमें ‘अपनी सोच’ पर काम करना...

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बाज़ार ने औरत को वस्तु की तरह चित्रित किया गया, जिसमें महिलाओं को 'इंसान' की बजाय एक 'वस्तु' की तरह दिखाया जाता है।

कोरोना वायरस का सबसे बड़ा शिकार ‘देश के गरीब हैं’

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महामारी का सबसे ज़्यादा प्रभाव वंचित तबके पर पड़ रहा है, जिसे फैलने से रोकने की ज़िम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर थोपी गई है, जहां वे असमर्थ हैं।
क्या हमारा भारत कोरोना वायरस पर जीत हासिल करने के लिए तैयार है ?

क्या हमारा भारत कोरोना वायरस पर जीत हासिल करने के लिए तैयार है ?

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अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं सिर्फ़ चंद शहरी प्राइवेट अस्पतालों में है, जहां ग़रीबी रेखा के नीचे रहने वाले सैकड़ों लोगों के लिए मुमकिन नहीं है।
कोरोना से जूझते देश में 'विशेषाधिकारों' और 'दमन' के बीच दिखता हमारे दोमुँहा समाज का चेहरा!

कोरोना से जूझते देश में ‘विशेषाधिकारों’ और ‘दमन’ के बीच दिखता हमारे दोमुँहा समाज...

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जनता कर्फ़्यू में तालियाँ बजाने के बाद कई डाक्टरों को उनके किराए के घरों से बेघर तक कर दिया गया । ये एक दोमुहे समाज की निशानी नहीं है?

क्या है औरतों पर कोरोना वायरस का असर?

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मुसीबत की इस घड़ी में ज़रूरत है एकजुट होकर हालात सुधारने की क्योंकि लिंग आधारित सामाजिक भेदभाव हमें और अँधेरे की तरफ ही ले जाएगा।
नवरात्र : मूर्ति वाली ‘शक्ति पूजन’ से नहीं बल्कि हर 'नारी’ के सम्मान से भक्ति होगी सार्थक

नवरात्र : मूर्ति वाली ‘शक्ति पूजन’ से नहीं बल्कि हर ‘नारी’ के सम्मान से...

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जिस दिन पंडाल या मंदिर की मूर्ति का नहीं बल्कि दफ़्तर में बैठी और घरों में सांस लेती औरत का सम्मान होगा उस दिन नवरात्र की भक्ति सार्थक होगी।
एक केस में फाँसी देने से नहीं, लड़कों को 'संवेदनशील इंसान' बनाने से आएगा बदलाव !

एक केस में फाँसी देने से नहीं, लड़कों को ‘संवेदनशील इंसान’ बनाने से आएगा...

हमने महिला को उनके अधिकारों के बारे जागरूक किया है। लेकिन उनके अधिकारों का सम्मान कैसे करना है, ये बात अपने बेटों को नहीं बताया।
नेहा धूपिया के बयान पर बरपे हंगामे के साथ एक 'फ़ेमिनिस्ट चॉइस' के सवाल को समझना ज़रूरी है !

नेहा धूपिया के बयान पर बरपे हंगामे के साथ एक ‘फ़ेमिनिस्ट चॉइस’ के सवाल...

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किसी का दिल दुखाना गलत है। पर उससे भी ज़्यादा गलत है हिंसा और प्रताड़ना। और अगर आपको ये ग़लत नहीं लगता तो शायद समस्या आपके अंदर है।
महाड़ सत्याग्रह के इतने सालों बाद भी 'भेदभाव' के ख़िलाफ़ ज़ारी है संघर्ष

महाड़ सत्याग्रह के इतने सालों बाद भी ‘भेदभाव’ के ख़िलाफ़ ज़ारी है संघर्ष

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आज ही के दिन साल 1927 में  भीमराव आंबेडकर की अगुवाई में दलितों को अधिकार दिलाने के लिए 'महाड़ सत्याग्रह' किया गया था।

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अग्नि परीक्षा के बहाने इसके मूल मुद्दे 'वर्जिनिटी' की बात !

अग्नि परीक्षा के बहाने इसके मूल मुद्दे ‘वर्जिनिटी’ की बात !

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पवित्रता की अग्नि परीक्षा आदिकाल से अब आधुनिक काल तक महिलाएँ देती आ रही हैं। लेकिन परीक्षा के तौर तरीके में अब कई बदलाव हो गया है।
इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

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संविधान सभा में हम उन प्रमुख पंद्रह महिला सदस्यों का योगदान आसानी से भुला चुके है या यों कहें कि हमने कभी इसे याद करने या तलाशने की जहमत नहीं की| तो आइये जानते है उन पन्द्रह भारतीय महिलाओं के बारे में जिन्होंने संविधान निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है|  
फैमिली ग्रुप्स के अश्लील व्हाट्सएप्प मेसेज – एक विश्लेषण

फैमिली ग्रुप्स के अश्लील व्हाट्सएप्प मेसेज – एक विश्लेषण

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आजकल फैमिली ग्रुप में अपने बड़े-बूढ़े और रिश्तेदारों की तरफ से शेयर किये जाने वाले कुछ उन चुनिन्दा भद्दे व्हाट्सएप्प मेसेज के बारे बात करने जा रही हूँ, जो महिलाओं के प्रति व उनसे बनाये जाने वाले रिश्ते के प्रति की अपनी घिनौनी सोच को साझा करते हैं|
पैड खरीदने में माँ को आज भी शर्म आती है

पैड खरीदने में माँ को आज भी शर्म आती है

मासिकधर्म और सैनिटरी पैड पर हमारे घरों में चर्चा करने की बेहद ज़रूरत है और जिसकी शुरुआत हम महिलाओं को ही करनी होगी।
उफ्फ! क्या है ये नारीवादी सिद्धांत? आओ जाने!

उफ्फ! क्या है ये ‘नारीवादी सिद्धांत?’ आओ जाने!

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नारीवाद के बारे में सभी ने सुना होगा। मगर यह है क्या? इसके दर्शन और सिद्धांत के बारे में ज्यादातर लोगों को नहीं मालूम। इसे पूरी तरह जाने और समझे बिना नारीवाद पर कोई भी बहस या विमर्श बेमानी है। नव उदारवाद के बाद भारतीय समाज में महिलाओं के प्रति आए बदलाव के बाद इन सिद्धांतों को जानना अब और भी जरूरी हो गया है।