पीरियड

हमारे समाज में पीरियड का क़िस्सा : भुज में ‘पीरियड’ के दौरान भेदभाव और...

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स्वामी कृष्णस्वरुप की इन बातों से साफ़ है कि किस तरह धर्म की हवा शिक्षा पर न केवल हावी होती है, बल्कि उसकी जड़ों को भी दीमक की तरह खोखली करने लगती है।
बलात्कार

अर्बन बायस : क्या बलात्कार सिर्फ़ बड़े शहरों में होता है?

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हर रोज़ देश में जो बलात्कार होते रहते हैं, उनकी ख़बर या तो अख़बार के चौथे या पांचवे पन्ने में दबी रह जाती है। इसी को इंग्लिश में 'अर्बन बायस' कहा जाता है।

सॉफ्ट-हिंदुत्व पॉलिटिक्स वाली ‘आप’ की दिल्ली सरकार

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केजरीवाल ने भाजपा के हिंदुत्व के एजेंडे को कॉ-ऑप्ट किया है। जो केजरीवाल मोदी के ‘कट्टर’ आलोचकों में रहे थे, अब मोदी की एक आलोचना नहीं करते।
दोषियों को मारने से नहीं बल्कि कुंठित सोच को मारने से रुकेगी रेप की घटनाएँ

दोषियों को मारने से नहीं बल्कि कुंठित सोच को मारने से रुकेगी रेप की...

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हमें समझना होगा कि रेप कोई हादसा नहीं बल्कि ये एक सोच है जो वक़्त के साथ बहुत तेज़ी से आगे बढ़ रही है। हमें ज़रूरत है कि हम उस सोच को बदलने पर काम करें।
सेल्फ़ डिफ़ेन्स

‘सेल्फ़ डिफ़ेन्स’ अच्छी चीज़ है, पर इससे रेप कल्चर ख़त्म नहीं होगा।

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हमारा उद्देश्य है रेप कल्चर को जड़ से उखाड़ फेंकने का, ताकि हमारा समाज लड़कियों और औरतों के रहने लायक़ बन सके और उन्हें हमेशा शोषण के डर से न जीना पड़े।

समलैंगिक पहचान के साथ मेरे संघर्ष और बनारस की गलियों में ‘सतरंग’ की तलाश

संविधान ने सबको समानता और सम्मान से जीने का अधिकार दिया है। एलजीबीटी सिर्फ़ सेक्स से नहीं बल्कि अपने अस्तित्व, आत्मसम्मान और पहचान का मुद्दा है।
बजट 2020

बजट 2020 : निर्मला सीतारमण के बजट में महिलाओं के लिए ऐलान और सरकार...

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भारत की पहली वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने दूसरे कार्यकाल के बजट में महिलाओं के लिए चलाई जा रही योजनाओं के लिए 28,600 करोड़ रुपए रखा है।
हिजाब

मेरा हिजाब, मेरी मर्ज़ी। तुमको क्या?

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क्या एक हिजाबी औरत की अपनी मर्ज़ी नहीं हो सकती? क्या वो पितृसत्ता की ग़ुलाम है? आइए आज 'वर्ल्ड हिजाब डे' के दिन कुछ ग़लतफ़हमियाँ दूर करते हैं।
बच्चे सिर्फ़ मां की ज़िम्मेदारी नहीं है !

बच्चे सिर्फ़ ‘मां’ की ज़िम्मेदारी नहीं है !

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एक बच्चे के जन्म से लेकर, उसके बड़े होने तक, एक माँ को ही उसका कर्ता-धर्ता बना दिया जाता है। उसकी सारी ज़िम्मेदारी की डोर माँ के हांथो सौंप दी जाती है।
सपना राठी का वीडियो वायरल करना समाज की पितृसत्तात्मक घटिया मानसिकता है

सपना राठी का वीडियो वायरल करना समाज की पितृसत्तात्मक घटिया मानसिकता है

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सपना राठी का विरोध उनके विचारों के आधार पर किया जाना चाहिए। न की उनके शरीर और शारीरिक संबंधों के आधार पर चारित्रिक टिप्पणी करके।

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ट्रेंडिंग

सपना राठी का वीडियो वायरल करना समाज की पितृसत्तात्मक घटिया मानसिकता है

सपना राठी का वीडियो वायरल करना समाज की पितृसत्तात्मक घटिया मानसिकता है

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सपना राठी का विरोध उनके विचारों के आधार पर किया जाना चाहिए। न की उनके शरीर और शारीरिक संबंधों के आधार पर चारित्रिक टिप्पणी करके।
इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

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संविधान सभा में हम उन प्रमुख पंद्रह महिला सदस्यों का योगदान आसानी से भुला चुके है या यों कहें कि हमने कभी इसे याद करने या तलाशने की जहमत नहीं की| तो आइये जानते है उन पन्द्रह भारतीय महिलाओं के बारे में जिन्होंने संविधान निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है|  
लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

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गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|
थप्पड़

‘थप्पड़’ – क्यों मारा, नहीं मार सकता।’- वक्त की माँग है ये ज़रूरी सवाल

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मर्दों को पीटने का हक किसने दिया, वे अपने जीवनसाथी पर हाथ कैसे उठा सकते हैं। यही सवाल पूछती नज़र आती है तापसी पन्नू और अनुभव सिन्हा की नई फिल्म- थप्पड़।
पीरियड

हमारे समाज में पीरियड का क़िस्सा : भुज में ‘पीरियड’ के दौरान भेदभाव और...

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स्वामी कृष्णस्वरुप की इन बातों से साफ़ है कि किस तरह धर्म की हवा शिक्षा पर न केवल हावी होती है, बल्कि उसकी जड़ों को भी दीमक की तरह खोखली करने लगती है।