हिंदी में होगी अब जेंडर और नारीवाद की बात फेमिनिज़म इन इंडिया के साथ
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नारीवाद का पहला चरण : 'फर्स्ट वेव ऑफ फेमिनिज़म' का इतिहास

नारीवाद का प्रथम चरण : ‘फर्स्ट वेव ऑफ फेमिनिज़म’ का इतिहास

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नारीवादी आंदोलन का प्रथम चरण महिलाओं के मौलिक अधिकार और पुरुषों के समान स्त्री को रखने की दिशा में मताधिकार की मांग मूल रूप से कर रहा था।
पितृसत्ता क्या है? – आइये जाने  

पितृसत्ता क्या है? – आइये जाने  

पितृसत्ता एक ऐसी व्यवस्था के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसमें पुरुषों का महिलाओं पर वर्चस्व रहता है और वे उनका शोषण और उत्पीड़न करते हैं|
पंडिता रमाबाई: महिलाओं की शिक्षा के लिए लड़ने वाली समाज सुधारक| #IndianWomenInHistory

पंडिता रमाबाई : महिलाओं की शिक्षा के लिए लड़ने वाली समाज सुधारक | #IndianWomenInHistory

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रमाबाई को भारत में वह पहचान नहीं मिली है जो उनके समकालीन समाजसुधारकों को दी गई पर ये बात कोई नकार नहीं सकता की वह महाराष्ट्र और भारत की सबसे प्रमुख नारीवादी समाज सुधारकों में से एक थी।

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पैड खरीदने में माँ को आज भी शर्म आती है

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मासिकधर्म और सैनिटरी पैड पर हमारे घरों में चर्चा करने की बेहद ज़रूरत है और जिसकी शुरुआत हम महिलाओं को ही करनी होगी।
लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

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गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|
उफ्फ! क्या है ये नारीवादी सिद्धांत? आओ जाने!

उफ्फ! क्या है ये ‘नारीवादी सिद्धांत?’ आओ जाने!

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नारीवाद के बारे में सभी ने सुना होगा। मगर यह है क्या? इसके दर्शन और सिद्धांत के बारे में ज्यादातर लोगों को नहीं मालूम। इसे पूरी तरह जाने और समझे बिना नारीवाद पर कोई भी बहस या विमर्श बेमानी है। नव उदारवाद के बाद भारतीय समाज में महिलाओं के प्रति आए बदलाव के बाद इन सिद्धांतों को जानना अब और भी जरूरी हो गया है।

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