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तारा रानी श्रीवास्तव: स्वतंत्रता की लड़ाई में शामिल गुमनाम सेनानी| #IndianWomenInHistory

तारा रानी श्रीवास्तव : स्वतंत्रता की लड़ाई में शामिल गुमनाम सेनानी| #IndianWomenInHistory

हमारा यह पुरुष-प्रधान समाज कहता है कि एक औरत अपने पति के पीछे ही चलती है पर तारा रानी श्रीवास्तव ने इस कथन को पूरी तरह गलत साबित किया है।
महाड़ सत्याग्रह

महाड़ सत्याग्रह: पानी पीने के अधिकार के लिए बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर का...

20 मार्च, 1927 वह ऐतिहासिक दिन जब डॉ.आंबेडकर के नेतृत्व में करीब ढ़ाई हज़ार लोगों की भीड़ चावदार तालाब पर पहुंची। सबसे पहले डॉ.आंबेडकर ने तालाब से पानी पिया और लोगों से कहा कि इस तालाब का पानी पीने का हमारा उद्देश्य यह नहीं है कि इसका पानी कुछ खास है, बल्कि यह आत्मसम्मान और बराबरी का मसला है। इसके बाद बाबा साहेब का अनुसरण करते हुए सभी लोगों ने तालाब से पानी पिया।  
इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

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संविधान सभा में हम उन प्रमुख पंद्रह महिला सदस्यों का योगदान आसानी से भुला चुके है या यों कहें कि हमने कभी इसे याद करने या तलाशने की जहमत नहीं की| तो आइये जानते है उन पन्द्रह भारतीय महिलाओं के बारे में जिन्होंने संविधान निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है|  

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पैड खरीदने में माँ को आज भी शर्म आती है

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मासिकधर्म और सैनिटरी पैड पर हमारे घरों में चर्चा करने की बेहद ज़रूरत है और जिसकी शुरुआत हम महिलाओं को ही करनी होगी।
लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

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गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|
उफ्फ! क्या है ये नारीवादी सिद्धांत? आओ जाने!

उफ्फ! क्या है ये ‘नारीवादी सिद्धांत?’ आओ जाने!

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नारीवाद के बारे में सभी ने सुना होगा। मगर यह है क्या? इसके दर्शन और सिद्धांत के बारे में ज्यादातर लोगों को नहीं मालूम। इसे पूरी तरह जाने और समझे बिना नारीवाद पर कोई भी बहस या विमर्श बेमानी है। नव उदारवाद के बाद भारतीय समाज में महिलाओं के प्रति आए बदलाव के बाद इन सिद्धांतों को जानना अब और भी जरूरी हो गया है।

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