हिंदी में होगी अब जेंडर और नारीवाद की बात फेमिनिज़म इन इंडिया के साथ
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Deepshikha Banaras

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Deepshikha lives in Aligarh and has completed her PhD in Hindi from Jawaharlal Nehru University, New Delhi. Currently, she is working as Assistant Professor at Department of Hindi, Aligarh Muslim University.

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इलाहाबाद हाई कोर्ट की टिप्पणी और सोशल मीडिया पर महिला विरोधी अभियान

इलाहाबाद हाई कोर्ट की टिप्पणी और सोशल मीडिया पर महिला विरोधी अभियान

इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर एक ट्रेंड चल निकला। दहेज के केस से प्रताड़ित पुरुषों की कहानी और महिलाओं के द्वारा झूठे केस से जुड़ी तर्कहीन बातें दी जाने लगी। ट्विटर पर #Genderbaisedlaws और #498A के तहत महिलाओं को शादी के नाम पर मर्दों से पैसा वसूलने का जरिया बनाने की बात कही गई।
फिल्म रक्षाबंधन का ट्रेलरः खुद को प्रगतिशीत बताती इंडस्ट्री के लिए क्या रूढ़िवाद भी मुनाफा कमाने का एक फॉर्मूला बन गया है

फिल्म रक्षाबंधन का ट्रेलरः बॉलीवुड के लिए रूढ़िवाद भी मुनाफ़ा कमाने का एक फॉर्मूला...

भाई बने अक्षय पर अपनी चारों बहनों की शादी करवाने की ज़िम्मेदारी है। उनके लिए दहेज इकठ्ठा करना है। चारों बहनों को ऐसा दिखाया गया है जो ब्राह्मणवादी पितृसत्ता के बनाए पैमानों में फिट नहीं बैठती हैं। किसी की लंबाई कम है, किसी का वज़न ज्यादा है, किसी के बाल छोटे हैं। इन ‘कमियों’ के आधार पर सबका दहेज और भी ज्यादा लगेगा।
इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

संविधान सभा में हम उन प्रमुख पंद्रह महिला सदस्यों का योगदान आसानी से भुला चुके है या यों कहें कि हमने कभी इसे याद करने या तलाशने की जहमत नहीं की| तो आइये जानते है उन पन्द्रह भारतीय महिलाओं के बारे में जिन्होंने संविधान निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है|  

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मासिकधर्म और सैनिटरी पैड पर हमारे घरों में चर्चा करने की बेहद ज़रूरत है और जिसकी शुरुआत हम महिलाओं को ही करनी होगी।
लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

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गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|
उफ्फ! क्या है ये नारीवादी सिद्धांत? आओ जाने!

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नारीवाद के बारे में सभी ने सुना होगा। मगर यह है क्या? इसके दर्शन और सिद्धांत के बारे में ज्यादातर लोगों को नहीं मालूम। इसे पूरी तरह जाने और समझे बिना नारीवाद पर कोई भी बहस या विमर्श बेमानी है। नव उदारवाद के बाद भारतीय समाज में महिलाओं के प्रति आए बदलाव के बाद इन सिद्धांतों को जानना अब और भी जरूरी हो गया है।

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