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Eshwari Shukla

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Eshwari is working with Feminism in India (Hindi) as a content creator. She has completed her postgraduate diploma in broadcast journalism. Earlier she has worked with Gaon Connection, Design Boxed and The Better India.

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ख़ास बात: बीएचयू की समाजशास्त्र विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर प्रतिमा गोंड से

ख़ास बात : बीएचयू की समाजशास्त्र विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर प्रतिमा गोंड से

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मुझे कई बार कहा गया कि मैं जाति की राजनीति करती हूं। तो मेरी हर चीज़ में कहीं न कहीं ये जाति का फैक्टर ज़रूर जोड़ा जाता है। चूंकि मैं एक प्रोफेसर हूं, आर्थिक रूप से सशक्त हूं इसलिए मुझे सीधे तौर पर तो कुछ नहीं कहा जाता पर अप्रत्यक्ष तौर पर यह हर बार एहसास दिलाया जाता है।
इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

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संविधान सभा में हम उन प्रमुख पंद्रह महिला सदस्यों का योगदान आसानी से भुला चुके है या यों कहें कि हमने कभी इसे याद करने या तलाशने की जहमत नहीं की| तो आइये जानते है उन पन्द्रह भारतीय महिलाओं के बारे में जिन्होंने संविधान निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है|  
हमारे घरों में पितृसत्ता महिलाओं से छीन लेती है उनके इंसान होने का हक़

पितृसत्ता हमारे घरों में महिलाओं से छीन लेती है उनके इंसान होने का हक़

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मैं पितृसत्ता को अपने परिवार में देखती हूं, इसका प्रभाव महिला और पुरुष दोनों में एक़समान पाती हूं और इसमें किसी को कुछ भी ग़लत नहीं लगता।

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पैड खरीदने में माँ को आज भी शर्म आती है

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मासिकधर्म और सैनिटरी पैड पर हमारे घरों में चर्चा करने की बेहद ज़रूरत है और जिसकी शुरुआत हम महिलाओं को ही करनी होगी।
लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

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गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|
उफ्फ! क्या है ये नारीवादी सिद्धांत? आओ जाने!

उफ्फ! क्या है ये ‘नारीवादी सिद्धांत?’ आओ जाने!

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नारीवाद के बारे में सभी ने सुना होगा। मगर यह है क्या? इसके दर्शन और सिद्धांत के बारे में ज्यादातर लोगों को नहीं मालूम। इसे पूरी तरह जाने और समझे बिना नारीवाद पर कोई भी बहस या विमर्श बेमानी है। नव उदारवाद के बाद भारतीय समाज में महिलाओं के प्रति आए बदलाव के बाद इन सिद्धांतों को जानना अब और भी जरूरी हो गया है।

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