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भारत में शुरुआती दौर से ही आमतौर पर किसानी क्षेत्र में पुरुषों का वर्चस्व रहा है। ऐसे में एक ऐसी महिला किसान की तस्वीर जो पारंपरिक पल्लू वाली साड़ी में साइकिल पर सवार नज़र आती है, जो एक महिला किसान है, जो कृषि की उन्नत तकनीक और मिट्टी की गुणवत्ता की कुशल परख रखती है और साथ ही पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित की जा चुकी है, ज़रा मुश्किल है एक ऐसी महिला की कल्पना करना भी। चलिए आज राष्ट्रीय महिला किसान दिवस पर जानते हैं एक ऐसी ही महिला किसान की कहानी। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में सरैया प्रखंड के आनंदपुर गांव की रहने वाली राजकुमारी देवी, जिन्हें किसान चाची भी कहा जाता। जी हां यह वही महिला किसान हैं जिनकी कल्पना करना भी ऊपर लिखी पंक्तियों में हमारे लिए मुश्किल हो रहा था। किसान चाची उर्फ़ राजकुमारी देवी पितृसत्ता की हर सीमा लांघ रोज़ एक नई प्रेरक कहानी की नायिका बन रही हैं।

समाज के तानों से ज्यादा बड़ी थी परिवार की भूख

इस लेख का मकसद है आप तक राजकुमारी देवी के माध्यम से भारत में महिला किसानों की स्थिति को पहुंचाना। साथ ही यह बताना कि समाज में एक महिला किसान को कितनी बाधाओं का सामना करना पड़ता है। राजकुमारी देवी की इस कहानी की अगर शुरुआत करें तो वह कम उम्र में ही शादी के बंधन में बंध गई थी। शादी के बाद तीन बच्चे और पति के साथ राजकुमारी देवी ने गरीबी के दिन भी देखे। उन्होंने जब तय किया की खुद भी कुछ करना है तब पति के साथ बाहरी समाज ने भी भरपूर विरोध किया। गाली-गलौच से भी सामना हुआ। लेकिन राजकुमारी को जब-जब ये रुकावटें रोकती तब तब परिवार की गरीबी और भूख उनपर ज्यादा हावी होती। फिर क्या था, उन्होंने छोटी सी जमीन पर खेती शुरू कर दी। राजकुमारी को इस काम में सफर भी करना पड़ता था और तब उन्होंने साइकिल चलाना सीखा। अब सब राजकुमारी देवी को सभी साइकिल चाची के नाम से जानने लगे थे।

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महिला जो करती है उसका कोई गुणगान नहीं करता है, ना घर पर करता है ना बाहर करता है। उसका गुणगान हम किए। काहें की हम भी गरीब थे तो खेती किये। और जो बड़े लोग खेती करते हैं, वो जब मज़दूरों के लिए जाते हैं तब घर के सारे आदमी लोग हरियाणा-पंजाब गए होते हैं। बिहार में तो महिलाएं ही खेती करती हैं- राजकुमारी देवी

जैविक खेती करो लेकिन पूरी ट्रेनिंग के साथ

राजकुमारी देवी की साइकिल चाची से किसान चाची बनने की कहानी भी बहुत प्रेरणादायी है। राजकुमारी जैविक तरीके से खेती तो करती हैं लेकिन उनका मानना है कि खेती में सही प्रशिक्षण भी जरूरी है। इसलिए आगे चलकर पूसा कृषि विश्वविद्यालय से खाद्य प्रसंस्करण की ट्रेनिंग के बाद राजकुमारी ने अचार और मुरब्बे का काम शुरू किया। अपने खेत में उगने वाले ओल को भी राजकुमारी सीधे बाजार में बेचने की जगह उसका अचार और आटा बनाकर बेचने लगीं। अब तक राजकुमारी उर्फ़ साइकिल चाची अपनी कामयाबी के झंडे गाड़ चुकी थी और किसान चाची के नाम से जाने जानी लगी थीं। धीरे-धीरे स्वयं सहायता समूह बना गांव की दूसरी महिलाओं को अपने काम में जाेड़ा। फिर इनके उत्पादों की शहरों में भी मांग हाेने लगी। साल 2019 में पूरे बिहार में कृषि क्षेत्र में राजकुमारी को अपने योगदान के लिए राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने पद्मश्री से सम्मानित किया है। बिहार के सीएम नीतीश कुमार इन्हें किसान श्री से सम्मानित कर चुके हैं।

तस्वीर साभार: दैनिक जागरण

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बिहार में तो महिलाएं ही खेती करती हैं – राजकुमारी देवी

राज्यसभा टीवी के एक इंटरव्यू में जब राजकुमारी देवी से एक सवाल पूछा गया कि वह दूसरी महिलाओं की सोच को किस तरह से बेहतर बना रही हैं, इसपर राजकुमारी ने जवाब में कुछ यूं कहा था, “जो कहता है भारत कृषि प्रधान देश है, सही है। लेकिन हमारे यहां बिहार की जो महिला है, वहां मज़दूरी के लिए ना, यही महिला मिलती हैं। लोग जो है ना नहीं मानता है। महिला जो करती है उसका कोई गुणगान नहीं करता है, ना घर पर करता है ना बाहर करता है। उसका गुणगान हम किए। काहें की हम भी गरीब थे तो खेती किये। और जो बड़े लोग खेती करते हैं, वो जब मज़दूरों के लिए जाते हैं तब घर के सारे आदमी लोग हरियाणा-पंजाब गए होते हैं। बिहार में तो महिलाएं ही खेती करती हैं।”

हाल ही में किसान चाची कोरोना योद्धा सम्मान से भी सम्मानित हुईं हैं। विश्व स्तर पर फैली इस कोरोना महामारी के दौरान राजकुमारी अपने इलाके में आस पास की महिलाओं को रोजगार देने और मानवीय सेवा को लेकर अपनी पहल के लिए सम्मानित हुई हैं। किसान चाची का मानना है सरकार को महिला किसानों के कल्याण के लिए अभी कई काम करने की जरूरत है। जिस दिन महिला किसान अपने आप में सक्षम हो गई उस दिन किसान का पूरा परिवार भी खुशहाल हो जाएगा।

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तस्वीर साभार : patnabeats

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