हिंदी में होगी अब जेंडर और नारीवाद की बात फेमिनिज़म इन इंडिया के साथ
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'मेरा रंग' एक वैकल्पिक ऑनलाइन मीडिया है। यह महिलाओं से जुड़े मुद्दों और सोशल टैबू पर चल रही बहस में सक्रिय भागीदारी निभाता है| इसके साथ ही, महिलाओं के कार्यक्षेत्र, उपलब्धियों, संघर्ष और उनकी अभिव्यक्ति को मंच देता है।

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कोविड-19 ने छात्रों से सुनहरा दौर छीन लिया, सरकार की लापरवाही से उपजे गंभीर हालात

कोविड-19 : लापरवाह सरकार से उपजे गंभीर हालात ने विद्यार्थियों से सुनहरा दौर छीन...

पूरी दुनिया में जो कोरोना महामारी बनकर तांडव कर रहा है उसे हमने कमज़ोर पिद्दी समझ लिया। मास्क नाक से नीचे और अक्सर चेहरे से हटाए जाने लगे, बाज़ारों में भीड़भाड़ रहने लगी, लोग सटकर चलने लगे। आख़िर एक तरफ धुंआधार रैलियां कर हमारे नेता भी यहीं संदेश दे रहे थे कि देखिए कोरोना हमसे डरकर भाग गया है।
ख़ास बातचीत: साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार विजेता यशिका दत्त से (पहला भाग)

ख़ास बातचीत : साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार विजेता यशिका दत्त से (पहला भाग)

यशिका दत्त को साल 2021 में उनकी किताब 'कमिंग आउट एज़ अ दलित' के लिए साहित्य अकादमी का युवा पुरस्कार से नवाज़ा गया है। पढ़िए FII से उनकी ख़ास बातचीत।

नंगेली का साहस और विरोध आज भी गूंजता है!

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केरल के छेरतला में नंगेली अपने पति चिरुकंदन के साथ रहती थीं। साल 1800 में, जब राजसी शासन चलता था, तब कई तरह के कर वसूले जाते थे।

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पैड खरीदने में माँ को आज भी शर्म आती है

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मासिकधर्म और सैनिटरी पैड पर हमारे घरों में चर्चा करने की बेहद ज़रूरत है और जिसकी शुरुआत हम महिलाओं को ही करनी होगी।
लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

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गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|
उफ्फ! क्या है ये नारीवादी सिद्धांत? आओ जाने!

उफ्फ! क्या है ये ‘नारीवादी सिद्धांत?’ आओ जाने!

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नारीवाद के बारे में सभी ने सुना होगा। मगर यह है क्या? इसके दर्शन और सिद्धांत के बारे में ज्यादातर लोगों को नहीं मालूम। इसे पूरी तरह जाने और समझे बिना नारीवाद पर कोई भी बहस या विमर्श बेमानी है। नव उदारवाद के बाद भारतीय समाज में महिलाओं के प्रति आए बदलाव के बाद इन सिद्धांतों को जानना अब और भी जरूरी हो गया है।

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