हिंदी में होगी अब जेंडर और नारीवाद की बात फेमिनिज़म इन इंडिया के साथ
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Ritwik Das

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ऋत्विक दास एक नॉन बाइनरी ट्रांस पर्सन हैं, जो पिछले 5 वर्षों से लखनऊ में ‘अवध प्राईड कमिटी ’ के साथ एलजीबीटी+ मुद्दों पर लोगों को जागरूक कर रहे हैं। साथ ही लखनऊ स्थित हमसफर महिला सहायता केंद्र में कार्यरत हैं।

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अरक विरोधी आंदोलन : एक आंदोलन जिसने बताया कि शराब से घर कैसे टूटते हैं!

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अरक विरोधी आंदोलन इसबात का अच्छा उदाहरण है कि किस तरह शिक्षा औरतों को सशक्त बनाती है और कैसे पढ़ना-लिखना हमें अपने अधिकारों से वाक़िफ़ कराता है।
जसिंता केरकेट्टाः क्रोध और आशाओं को कविताओं में पिरोती एक आदिवासी कवयित्री

जसिंता केरकेट्टाः विकास के दंश, प्रेम और आशाओं को कविताओं में पिरोती एक कवयित्री

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अपने कविता संसार में जल, जंगल, जमीन और आदिवासी अस्मिता की तलाश करने वाली जसिंता केरकेट्टा आज दुनिया के कई हिस्सों में चर्चित हो चुकी हैं। आज वह कई देशों में लेक्चर देती हैं और वॉर्कशॉप कराती हैं। इटली, जर्मनी, फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया के कई विश्वविद्यालयों में कविता संवाद कर चुकी हैं। कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से नवाज़ी जा चुकी हैं। जसिंता झारखंड की पहली आदिवासी कवयित्री हैं जिनकी कविताओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक साथ तीन भाषाओं में प्रकाशित किया गया है।
रानी अब्बक्का चौटा: भारत की पहली महिला स्वतंत्रता सेनानी | #IndianWomenInHistory

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रानी अब्बक्का चौटा का स्थान न सिर्फ इतिहास में महत्वपूर्ण है बल्कि वे आज के समय में भी एक सशक्त महिला के रूप में बेहतरीन उदाहरण हैं।

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नारीवाद के बारे में सभी ने सुना होगा। मगर यह है क्या? इसके दर्शन और सिद्धांत के बारे में ज्यादातर लोगों को नहीं मालूम। इसे पूरी तरह जाने और समझे बिना नारीवाद पर कोई भी बहस या विमर्श बेमानी है। नव उदारवाद के बाद भारतीय समाज में महिलाओं के प्रति आए बदलाव के बाद इन सिद्धांतों को जानना अब और भी जरूरी हो गया है।

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