इंटरसेक्शनलLGBTQIA+ कौन थीं मार्शा पी. जॉनसन और उनके बारे में जानना क्यों ज़रूरी है

कौन थीं मार्शा पी. जॉनसन और उनके बारे में जानना क्यों ज़रूरी है

17 साल की उम्र में वह अपने घर से दूर न्यूयॉर्क शहर चली गई। शहर एलिजाबेथ में एडिसन हाई स्कूल (अब थॉमस ए. एडिसन करियर एंड टेक्निकल एकेडमी) से 1963 में स्नातक होने के बाद, जॉनसन 15 डॉलर और कपड़ों का एक बैग लेकर न्यूयॉर्क जाने का फैसला लिया। घर छोड़ने के बाद इन्होंने 1966 में ग्रीनविच विलेज के एक रेस्तरां में वेटर का काम किया।

मार्शा पी. जॉनसल एक अमेरिकी ब्लैक ट्रांस महिला थीं। वह होमोसेक्शुलिटी को लेकर मुख़र बोलने वाले और न्यूयॉर्क शहर में 1960 और 70 के दशक में होमोसेक्शुअलिटी अधिकार आंदोलन की सबसे प्रमुख हस्तियों में से एक थीं। जॉनसन स्टोनवॉल इन में जानेवाली पहली ड्रैग क्वीन्स में से एक थीं। उन्होंने हमेशा एलजीबीटीक्यू+ समुदाय के लोगों, एचआईवी और ट्रांसजेंडर लोगों के अधिकारों के लिए काम किया। अमेरिका में होने वाली स्टोनवॉल विद्रोह में प्रमुख हस्तियों में से एक थी। वह पेशे से एक वकील थी और उन्होंने ताउम्र क्वीयर समुदाय के अधिकारों की वकालत की और उनके लिए संघर्ष किया।

जन्म और शुरुआती जीवन

मार्शा पी. जॉनसन का जन्म 24 अगस्त 1945 को एलिजाबेथ, न्यू जर्सी में हुआ था। उनका पालन-पोषण एक अफ्रीकी-अमेरिकी परिवार में हुआ था। वह अपने माता-पिता की सात संतानों में पांचवें स्थान पर थीं। उनके पिता मैल्कम माइकल्स सीनियर जनरल मोटर्स असेंबली में कार्यरत थे और उनकी माँ का नाम अल्बर्टा क्लेबोर्न थीं। वह एक घरेलू महिला थीं। मार्शा जब पाँच साल की उम्र में थी तब ही उन्होंने अपने अंदर अलगाव महसूस किया। उन्हें लड़कियों के कपड़े पहनने अच्छा लगने लगा था। उन्होंने अपने एक इंटरव्यू के दौरान बताया कि उसी समय एक 13 वर्षीय लड़के ने उनका बलात्कार किया। यौन उत्पीड़न होने के बाद उन्होंने अपने आपको ऐसा करने से रोका। मार्शा 17 साल की उम्र तक खुद की भावनाएं और होमोसेक्शुअल होने की बात स्वीकार नहीं कर पाई थीं। उनकी माँ होमोसेक्सुलिटी से बहुत नफ़रत करती थीं। उनको परिवार से कभी कोई सहयोग नहीं मिला।

मैल्कम माइकल्स जूनियर के नाम से जन्मी मार्शा ने न्यूयॉर्क में अपना नाम बदल लिया। जॉनसन ने खुद को एक होमोसेक्शुअल व्यक्ति, एक ट्रांसवेस्टाइड और ड्रैग क्वीन के नाम से संबोधित किया। ट्रांसजेंडर शब्द उनकी मृत्यु के बाद ही आम हुआ था। 

17 साल की उम्र में वह अपने घर से दूर न्यूयॉर्क शहर चली गई। शहर एलिजाबेथ में एडिसन हाई स्कूल (अब थॉमस ए. एडिसन करियर एंड टेक्निकल एकेडमी) से 1963 में स्नातक होने के बाद, जॉनसन 15 डॉलर और कपड़ों का एक बैग लेकर न्यूयॉर्क जाने का फैसला लिया। घर छोड़ने के बाद इन्होंने 1966 में ग्रीनविच विलेज के एक रेस्तरां में वेटर का काम किया। यहीं से उन्होंने अपना खर्चा उठाना शुरू किया। इसी दौरान शहर में वह अलग-अलग लोगों से मिलीं। एलजीबीटीक्यू+ समुदाय और होमोसेक्शुअलिटी के बारे में जानकारी मिली। न्यूयॉर्क आकर जॉनसन ने महिलाओं के कपड़े पहनना शुरू कर दिया था। उन्होंने निश्चय किया कि वो इस समुदाय के लिए आख़िरी दम तक लड़ेंगे। मैल्कम माइकल्स जूनियर के नाम से जन्मी मार्शा ने न्यूयॉर्क में अपना नाम बदल लिया। जॉनसन ने खुद को एक होमोसेक्शुअल व्यक्ति, एक ट्रांसवेस्टाइड और ड्रैग क्वीन के नाम से संबोधित किया। ट्रांसजेंडर शब्द उनकी मृत्यु के बाद ही आम हुआ था। 

ट्रांस अधिकार आंदोलन से जुड़ी

तस्वीर साभारः Google Doodles

क्वीयर समुदाय की समानता और अधिकारों के लिए जॉनसन ने कई आंदलोन की शुरुआत की। जिसमें सबसे महत्वपूर्ण स्टोनवॉल अपराइजिंग या स्टोनवॉल विद्रोह की पृष्ठभूमि थी। 28 जून 1969 अमेरिका में एक गे क्लब स्टोनवॉल-इन में छापा मारा। समाज और वहां का कानून इस जगह को अप्रकृतिक और गलत मानते थे। ये एक ऐसी जगह थी जहां होमोसेक्शुअल लोग इकठ्ठा होते थे। वह जगह उनके लिए एक सेफ़ स्पेस था। उनके साथ पुलिस द्वारा अमानवीय बर्ताव, हिंसा की गई। इस जगह को कई क्वीयर लोगों ने मिल कर बनाया था जिसमें जॉनसन एक प्रमुख चेहरा थे।

छापे के दौरान उन्होंने लोगों की गिरफ़्तारी और उनके साथ हिंसा की। क्वीयर अधिकारों और गिरफ्तारियों के ख़िलाफ़ लोग सड़कों पर जुट गए। इन विरोध प्रदर्शनों की ख़बर पूरी दुनिया में फैल गई, जिससे अन्य लोग समानता के लिए लड़ने के लिए विरोध प्रदर्शनों और अधिकार समूहों में शामिल होने के लिए प्रेरित हुए। विरोध प्रदर्शनों के एक महीने बाद न्यूयॉर्क में सबसे पहला खुले तौर पर होमोसेक्शुअलिटी मार्च निकला आज के समय में जिसे प्राइड मार्च कहा जाता है। जिसने दुनिया भर के क्वीयर समुदायों के लिए एक महत्वपूर्ण छाप छोड़ी। 

भले ही स्टोनवॉल आंदोलन ने एलजीबीटीक्यू+ समुदाय के लिए समर्थन की एक लहर पैदा की हो लेकिन उनके खिलाफ़ अभी भी बहुत से पूर्वाग्रह थे। परिवार के द्वारा युवा क्वीयर और ट्रांस लोगों को उनके घर से बाहर निकालना आम बात थी। मार्शा और सिल्विया रिवेरा, जो एक ट्रांस कार्यकर्ता भी थीं, ने बेघर क्वीयर और ट्रांस लोगों की मदद करने के लिए STAR- स्ट्रीट ट्रांसवेस्टाइट एक्शन रिवोल्यूशनरी की स्थापना की। उन्होंने युवा ट्रांस व्यक्तियों को आश्रय दिया। स्टार हाउस मार्शा के लिए व्यक्तिगत रूप से भी महत्वपूर्ण था क्योंकि उन्होंने अपनी युवावस्था में अधिकांश समय बेघर और अभाव में समय बिताया था। वह होटल, सड़को पर सोती थी।

एचआईवी को लेकर लोगों में जागरूकता फैलाई

1970 के दशक के दौरान मार्शा एलजीबीटीक्यू+ समुदाय के अधिकार आंदोलन के एक प्रमुख सदस्य बन गईं। उन्होंने ड्रैग ग्रुप हॉट पीचिस के साथ प्रदर्शन करना शुरू किया। उन्होंने कई लोगों का ध्यान आकर्षित किया। स्टोनवॉल आंदोलन के बाद मार्शा एक अन्य समूह गे लिबरेशन फ्रंट में भी शामिल हो गईं। इस समूह ने उन नागरिकों के लिए राजनीतिक कार्रवाई और सुरक्षा की वकालत की, जिन्हें अपनी लैंगिक पहचान के कारण अपमान, असमानता और अधिकारों से वंचित रखा जाता हैं।

अपने खुशमिजाज व्यक्तित्व और हमेशा मुस्कुराहट के बावजूद, मार्शा ने अनेक कठिनाईयों का भी लगातार सामना किया। उन्होंने अपनी व्यक्तिगत असफलताओं और परेशानियों को कभी भी अपने काम के बीच बाधा नहीं आने दिया। 1970 के समय वह मानसिक स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याओं का सामना करना पड़ा। उन्होंने सेक्स वर्क के काम में भी शामिल होना पड़ा। ट्रांस समुदाय के अधिकार आंदोलन के नेतृत्व में रहने के कारण उन्हें लगातार गिरफ्तार भी किया जाता रहा। वह 100 से ज्यादा बार गिरफ्तार की गई। 1990 में उन्हें एचआईवी पॉजिटिव होने का पता चला। उन्होंने 26 जून, 1992 में एक इंटरव्यू में अपने इलाज के बार में सार्वजनिक रूप से बात करते हुए बताया कि लोगों को इस बीमारी से पीड़ित लोगो से डरना नहीं चाहिए। तमाम समस्याओं के बावजूद, मार्शा ने अपना अधिकांश जीवन दूसरों की मदद करने में समर्पित कर दिया।

मार्शा और सिल्विया रिवेरा, जो एक ट्रांस कार्यकर्ता भी थीं, ने बेघर क्वीयर और ट्रांस लोगों की मदद करने के लिए STAR- स्ट्रीट ट्रांसवेस्टाइट एक्शन रिवोल्यूशनरी की स्थापना की। उन्होंने युवा ट्रांस व्यक्तियों को आश्रय दिया।

6 जुलाई 1992 को मार्शा का शव न्यूयॉर्क की हडसन नदी में मिला था। वह केवल 46 वर्ष की थीं। पुलिस और जांचकर्ताओं ने उनकी मौत को सुसाइड करार दिया, लेकिन जो लोग उन्हें जानते थे और उनके करीब थे, उन्होंने कहा कि मार्शा ऐसा कदम नहीं उठा सकती हैं। उनके दोस्तों और परिचितों ने उनकी मौत की जांच की मांग की। एलजीबीटीक्यू+ समुदाय इस बात से नाराज था कि पुलिस से आगे की जांच करने से इनकार कर रही थी। ट्रांस महिलाएं, खास तौर पर ब्लैक महिलाएं, अक्सर घृणा अपराधों का सामना करती है। मार्शा के अंतिम संस्कार में सैकड़ों लोग शामिल हुए। चर्च इतना भरा हुआ था कि भीड़ सड़क तक फैल गई थी। मार्शा की मौत से जुड़ा मामला दशकों तक बंद रहा।

साल 2012 में, न्यूयॉर्क सिटी पुलिस विभाग ने आखिरकार इसे फिर से खोलने पर सहमति जताई, हालांकि मामला अभी भी अनसुलझा है। मार्शा पी. जॉनसन, ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए एक आइकन बन गईं। 2019 में, न्यूयॉर्क शहर ने घोषणा की कि मार्शा और सिल्विया की एक प्रतिमा लगाई जाएगी। यह इस शहर में ट्रांस महिलाओं को सम्मानित करने वाला पहला था। 2020 में, न्यूयॉर्क राज्य ने ब्रुकलिन में एक वाटरफ़्रंट पार्क का नाम भी मार्शा के नाम पर रखा था। गूगल ने साल 2020 में अमेरिका की इस महान क्रांतिकारी का डूडल बनाकर उन्हें सम्मानित किया था।


About the author(s)

मैं इमरान खान। दिल्ली से हूं। मैं एक टीचर होने के साथ साथ लेखक भी हूं और कुल मिलाकर हिंदी में लगभग 650 लेख लिख चुका हूं जिसमें महिलाएं, समलैंगिक समुदाय की समस्याएं और चुनौतियां और कई सामाजिक मुद्दे पर लेख और कहानियां शामिल हैं। मैं अपने आस-पास हाशिये पर आंके जाने वाले समुदाय के लिए लिखना चाहता हूं। कलम में ताकत होती है। अपने इसी भाव से मैं अपने समुदाय के साथ-साथ महिलाओं के विकास के लिए भी लोगों तक बात पहुंचाना चाहता हूं। इन सब की आवाज़ बनना चाहता हूं और कई हद तक इस विषय में सफल भी रहा हूं।

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