गुजरात दंगें पर आधारित यह फ़िल्म ज़रूर देखी जानी चाहिए

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‘फ़िराक’ नंदिता दास के निर्देशन में बनी ये फ़िल्म 2002 के गुजरात दंगो पर आधारित है, जो बिना किसी हिंसा के इसमें दंगो का दर्द महसूस कराया गया है।

पितृसत्ता के बनाए कुंठित मर्दों के एसिड अटैक को दिखाती ‘छपाक’

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एसिड अटैक पर बनी फ़िल्म 'छपाक' ने एसिड अटैक सरवाईवर लड़कियों की जिन्दगी को बयान करके देश के सामने एक संवेदनशील मुद्दे को उजागर किया गया है।
विरोध

आवाज़ बुलंद करती ‘आज की महिलाएँ’, क्योंकि विरोध का कोई जेंडर नहीं होता

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महिलाओं के विरोध को चाहे पुरुषों की क्रान्ति से ढकने की कोशिश की गई हो, लेकिन महिलाओं का प्रतिरोध तो सूरज है जो ज़रूर सामने आएगा।

कविता दलाल : भारत की पहली महिला रेसलर

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कविता भारत की पहली महिला रेसलर हैं जो डब्ल्यूडब्ल्यूई में पहुंची हैं। यूट्यूब पर अपलोड किए गए उनके वीडियो को 35 लाख से ज्यादा लोग देख चुके हैं।

मोना अहमद : भारत की एक मशहूर ट्रान्स शख़्सियत

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मोना अहमद बंबई के फ़िल्मी सितारों से मिलने से लेकर बेहतरीन स्टेज प्रदर्शन तक अपने दौर की एक सबसे एक्टिव ट्रान्सजेंडर साबित हुई।

दोहरे मापदंडों के बीच ‘हमारे शहर और सेक्स’

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भारत के किसी भी शहर में किसी युवा और अविवाहित महिला के लिए सेक्स कर पाना बिलकुल किसी चीज़ की स्मगलिंग करने जैसा ही होता है।

5 ज़रूरी मुद्दे : नागरिकता संशोधन कानून के विरोध प्रदर्शन के बीच जिन्हें याद...

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यह बेहद चिंताजनक है कि देश का ध्यान इन मुद्दों से हटाए जाने में नागरिकता संशोधन कानून ने कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है!

जेएनयू में हुई हिंसा देश के लोकतंत्र पर सीधा हमला है

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जेएनयू में जो भी हुआ, वो जनांदोलनों से हक़पकाए हुए लोगों की क्रूरता थी। ये एक हिंसात्मक प्रतिक्रिया थी, लोगों की एकजुटता और उनके प्रतिरोध के खिलाफ़।
भारतीय मीडिया

सीएए प्रदर्शन के बीच लोकतंत्र के खिलाफ और सत्ता के साथ खड़ा ‘भारतीय मीडिया’

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आज जहां तक निगाह जाती है कुछ अपवादों को छोड़कर हम यही देखते हैं कि लोकतांत्रिक देश भारत का मीडिया लोकतंत्र के खिलाफ उठ खड़ा हुआ है।

हाँ, मैं नारीवादी हूँ और मैं नागरिकता संशोधन कानून का विरोध करती हूँ!

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संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ़ कोई भी कानून बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हाँ, मैं नारीवादी हूँ और मैं सीएए और एनआरसी का पुरज़ोर विरोध करती हूँ।

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ट्रेंडिंग

सपना राठी का वीडियो वायरल करना समाज की पितृसत्तात्मक घटिया मानसिकता है

सपना राठी का वीडियो वायरल करना समाज की पितृसत्तात्मक घटिया मानसिकता है

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सपना राठी का विरोध उनके विचारों के आधार पर किया जाना चाहिए। न की उनके शरीर और शारीरिक संबंधों के आधार पर चारित्रिक टिप्पणी करके।
इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

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संविधान सभा में हम उन प्रमुख पंद्रह महिला सदस्यों का योगदान आसानी से भुला चुके है या यों कहें कि हमने कभी इसे याद करने या तलाशने की जहमत नहीं की| तो आइये जानते है उन पन्द्रह भारतीय महिलाओं के बारे में जिन्होंने संविधान निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है|  
लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

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गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|
थप्पड़

‘थप्पड़’ – क्यों मारा, नहीं मार सकता।’- वक्त की माँग है ये ज़रूरी सवाल

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मर्दों को पीटने का हक किसने दिया, वे अपने जीवनसाथी पर हाथ कैसे उठा सकते हैं। यही सवाल पूछती नज़र आती है तापसी पन्नू और अनुभव सिन्हा की नई फिल्म- थप्पड़।
पीरियड

हमारे समाज में पीरियड का क़िस्सा : भुज में ‘पीरियड’ के दौरान भेदभाव और...

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स्वामी कृष्णस्वरुप की इन बातों से साफ़ है कि किस तरह धर्म की हवा शिक्षा पर न केवल हावी होती है, बल्कि उसकी जड़ों को भी दीमक की तरह खोखली करने लगती है।