हिंदी में होगी अब जेंडर और नारीवाद की बात फेमिनिज़म इन इंडिया के साथ
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Aishwarya Raj

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मेरा नाम ऐश्वर्य अमृत विजय राज है। फिलहाल दिल्ली विश्वविद्यालय से फिलॉसफी में मास्टर्स कर रही हूँ। और शुरुआती पढ़ाई लिखाई बिहार में हुई।  नारीवाद को ख़ासकर भारतीय संदर्भ में उसकी बारीकियों के साथ थ्योरी में और ज़मीनी स्तर पर समझना, जाति और वर्ग के दख़ल के साथ समझना व्यक्तिगत रुचि और संघर्ष दोनों ही है। मुझे आसपास की घटनाएं डॉक्यूमेंट करना पसंद है। साल 2021 में रिज़नल और नेशनल लाड़ली मीडिया अवार्ड मिला। कभी कभी/हमेशा लगता है "I am too tired to exist".

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नीलोत्पल मृणाल केस: सारे सवाल सर्वाइवर से ही क्यों?

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बात यहां सिर्फ साहित्यिक दुनिया की चुप्पी की नहीं है। बात है उस भीड़ की भी है जो एकदम स्तरहीन भाषा को अपना हथियार बनाकर सर्वाइवर की मोरल पोलिसिंग में जुटी है।
पितृसत्ता क्या है? – आइये जाने  

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पितृसत्ता एक ऐसी व्यवस्था के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसमें पुरुषों का महिलाओं पर वर्चस्व रहता है और वे उनका शोषण और उत्पीड़न करते हैं|
भारत में स्त्री विमर्श और स्त्री संघर्ष: इतिहास के झरोखे से

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लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

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गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|
उफ्फ! क्या है ये नारीवादी सिद्धांत? आओ जाने!

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नारीवाद के बारे में सभी ने सुना होगा। मगर यह है क्या? इसके दर्शन और सिद्धांत के बारे में ज्यादातर लोगों को नहीं मालूम। इसे पूरी तरह जाने और समझे बिना नारीवाद पर कोई भी बहस या विमर्श बेमानी है। नव उदारवाद के बाद भारतीय समाज में महिलाओं के प्रति आए बदलाव के बाद इन सिद्धांतों को जानना अब और भी जरूरी हो गया है।

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