हिंदी में होगी अब जेंडर और नारीवाद की बात फेमिनिज़म इन इंडिया के साथ
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Heena Fatima

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दिल्ली से ताल्लुक़ रखती हूं और जर्नालिज़्म मेरी जिंदगी का अहम हिस्सा है। स्टूडेंट एक्टिविज़्म में सक्रिय रहकर अपनी सोच को धार दी है। साथ ही मैं रूढ़िवाद, पितृसत्ता और पूंजीवाद को फ़ेक्ट की मार के साथ अपनी रिपोर्ट में बेबाकी से रखने की कोशिश करती हूँ। महिला, दलित, आदिवासी, माइनॉरिटीज़ और समाज के हाशिये पर खड़े आख़िरी शख़्स की आवाज़ को अपनी रिपोर्ट के ज़रिए बुलंद करना चाहती हूँ।

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पितृसत्ता क्या है? – आइये जाने  

पितृसत्ता क्या है? – आइये जाने  

पितृसत्ता एक ऐसी व्यवस्था के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसमें पुरुषों का महिलाओं पर वर्चस्व रहता है और वे उनका शोषण और उत्पीड़न करते हैं|
इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

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संविधान सभा में हम उन प्रमुख पंद्रह महिला सदस्यों का योगदान आसानी से भुला चुके है या यों कहें कि हमने कभी इसे याद करने या तलाशने की जहमत नहीं की| तो आइये जानते है उन पन्द्रह भारतीय महिलाओं के बारे में जिन्होंने संविधान निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है|  
खेल में लैंगिक समानता के लिए महिला खिलाड़ियों के साथ-साथ महिला कोच की भूमिका पर भी ध्यान देना ज़रूरी

खिलाड़ी से लेकर प्रशिक्षक तक, कितना कठिन है महिलाओं के लिए स्पोर्ट्स पर्सन होना

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बड़े शहरों में स्थित महंगे इंटरनेशनल स्कूल के बरक्स गाँव और छोटे शहरों में पढ़ने वाली छात्राओं के लिए खेल को अपने भविष्य के रूप में देखना लगभग ना मुमकिन सा है।

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पैड खरीदने में माँ को आज भी शर्म आती है

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मासिकधर्म और सैनिटरी पैड पर हमारे घरों में चर्चा करने की बेहद ज़रूरत है और जिसकी शुरुआत हम महिलाओं को ही करनी होगी।
लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

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गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|
उफ्फ! क्या है ये नारीवादी सिद्धांत? आओ जाने!

उफ्फ! क्या है ये ‘नारीवादी सिद्धांत?’ आओ जाने!

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नारीवाद के बारे में सभी ने सुना होगा। मगर यह है क्या? इसके दर्शन और सिद्धांत के बारे में ज्यादातर लोगों को नहीं मालूम। इसे पूरी तरह जाने और समझे बिना नारीवाद पर कोई भी बहस या विमर्श बेमानी है। नव उदारवाद के बाद भारतीय समाज में महिलाओं के प्रति आए बदलाव के बाद इन सिद्धांतों को जानना अब और भी जरूरी हो गया है।

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