Thursday, October 17, 2019
हम सभी को नारीवादी क्यों होना चाहिए? - जानने के लिए पढ़िए ये किताब

हम सभी को नारीवादी क्यों होना चाहिए? – जानने के लिए पढ़िए ये किताब

'व्ही शुड ऑल बी फेमिनिस्ट्स' में अदीची के जीवन से जुड़े कुछ ऐसे किस्से हैं, जिन्हें उन्होंने नाइजीरिया में अनुभव किया है।
9 नारीवादी लेखिकाओं के लेखन से समझें नारीवाद

9 नारीवादी लेखिकाओं के लेखन से समझें नारीवाद

इन नारीवादी लेखिकाओं ने अपने लेखन के माध्यम से अपने-अपने देशकाल को ध्यान में रखकर नारीवाद की एक वृहत परिभाषा को गढ़ा, जो हमें नारीवाद को समझने में बेहद मददगार साबित होती है|
पितृसत्ता को चुनौती देतीं 5 समकालीन हिंदी लेखिकाएं

पितृसत्ता को चुनौती देतीं 5 समकालीन हिंदी लेखिकाएं

हिंदी की इन पांच समकालीन लेखिकाओं ने लेखन की अलग - अलग विधाओं ( यात्रा वृतांत, नोट्स, कहानी, कविता, व्यंग्य, लघुकथा, आदि ) के ज़रिए पितृसत्ता के ढांचे को लगातार चोट पहुंचाई है|
उपन्यास 'ब्लासफेमी' - दर्द का असली चिट्ठा

उपन्यास ‘ब्लासफेमी’ – दर्द का असली चिट्ठा

'ब्लासफेमी' पाकिस्तान की स्त्रीवादी लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता तहमीना दुर्रानी ने इस उपन्यास को लिखा है। उनकी माने तो यह उपन्यास सच्ची घटना से प्रेरित है।
गुनहगार इशरत आफरीं की नारीवादी चेतना

गुनहगार इशरत आफरीं की नारीवादी चेतना

इशरत आफ़रीं साहिबा की कलम पूरे उपमहाद्वीप की औरतों के लिए मशाल से कम नहीं है| उनकी शायरी का एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह से नारीवादी है|
आधी दुनिया के चश्मे से ‘कंट्रोल Z’: यानी तुम लौट आओ

आधी दुनिया के चश्मे से ‘कंट्रोल Z’: यानी तुम लौट आओ

‘कंट्रोल Z’ का अर्थ ही यही है कि इतिहास के अंधेरे में गुम हो गर्इं शख्सियतों को हम फिर से लौटा लाएं अपनी नई पीढ़ी के लिए

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इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

संविधान सभा में हम उन प्रमुख पंद्रह महिला सदस्यों का योगदान आसानी से भुला चुके है या यों कहें कि हमने कभी इसे याद करने या तलाशने की जहमत नहीं की| तो आइये जानते है उन पन्द्रह भारतीय महिलाओं के बारे में जिन्होंने संविधान निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है|  
कादम्बिनी गांगुली

कादम्बिनी गांगुली : चरित्र पर सवाल का मुँहतोड़ जवाब देकर बनी भारत की पहली...

कादम्बिनी गांगुली - भारत की सबसे पहले ग्रेजुएट हुई दो लड़कियों में से एक। शुरुआती स्त्री - चिकित्सकों में से एक !वह स्त्री जो एक पूरी व्यवस्था से लड़ गई।
लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|
भारत में स्त्री विमर्श और स्त्री संघर्ष: इतिहास के झरोखे से

भारत में स्त्री विमर्श और स्त्री संघर्ष: इतिहास के झरोखे से

भारत में स्त्री संघर्ष और स्त्री अधिकार के आन्दोलन को इसी रूप में स्वतंत्रता आन्दोलन के परिप्रेक्ष्य में देखने की आवश्यकता है|
उफ्फ! क्या है ये नारीवादी सिद्धांत? आओ जाने!

उफ्फ! क्या है ये ‘नारीवादी सिद्धांत?’ आओ जाने!

नारीवाद के बारे में सभी ने सुना होगा। मगर यह है क्या? इसके दर्शन और सिद्धांत के बारे में ज्यादातर लोगों को नहीं मालूम। इसे पूरी तरह जाने और समझे बिना नारीवाद पर कोई भी बहस या विमर्श बेमानी है। नव उदारवाद के बाद भारतीय समाज में महिलाओं के प्रति आए बदलाव के बाद इन सिद्धांतों को जानना अब और भी जरूरी हो गया है।