हिंदी फिल्मों में माँ–बेटी का बदलता रिश्ता: संस्कार, संघर्ष और दोस्तीBy Jyoti Kumari 6 min read | Aug 29, 2025
धड़क 2: जाति और समाज की सच्चाई का आईना दिखाती एक प्रेम कहानीBy Shivani Khatri 7 min read | Aug 11, 2025
तन्वी द ग्रेट: ऑटिज़्म का सामना कर रही लड़की की संवेदनशील कहानीBy Ankit Kumar 6 min read | Jul 30, 2025
दलित साहित्य का सौंदर्यशास्त्र: पीड़ा, प्रतिरोध और पहचान का साहित्यBy Swastika Urmaliya 6 min read | Jul 29, 2025
नए चेहरों के साथ वही पितृसत्तात्मक अधूरी प्रेमकहानी दिखाती है फिल्म सैयाराBy Sonali Rai 7 min read | Jul 29, 2025
‘आलोचना का स्त्री पक्ष’: सुजाता की स्त्रीवादी आलोचना की पड़तालBy Swastika Urmaliya 6 min read | Jul 23, 2025
मेट्रो इन दिनों: प्रेम, उलझन और उम्मीद की वापसी दिखाती एक औसत फिल्मBy Sonali Rai 6 min read | Jul 21, 2025
‘रानी पद्मिनी’: पितृसत्ता के खिलाफ दो महिलाओं के सफर की कहानीBy Sahil Firoz 6 min read | Jul 15, 2025
पूमनी का उपन्यास ‘हीट’ : जाति और वर्ग की दीवारों को लांघती एक तमिल कहानी By Sahil Firoz 7 min read | Jul 9, 2025
अरुणा रॉय की ‘द पर्सनल इज़ पॉलिटिकल’: जहां निजी अनुभव बनते हैं राजनीतिक बदलाव की बुनियादBy Shivani Khatri 7 min read | Jul 8, 2025
सितारे ज़मीन पर: संवेदनशीलता से बुनी गई एक सरल लेकिन असरदार फिल्मBy Sonali Rai 6 min read | Jul 4, 2025
भारतीय मेनस्ट्रीम सिनेमा में सांस्कृतिक विविधता की समस्यात्मक पेशकशBy Sahil Firoz 7 min read | Jul 3, 2025
मन्नू भंडारी की दीपा की दुनिया: जब प्रेम स्वतंत्र चेतना से टकराता हैBy Rupam Mishra 7 min read | Jun 30, 2025