समाजख़बर मैरिटल रेप कानून के अभाव में आखिर कबतक महिलाएं करती रहेंगी यौन हिंसा का सामना?

मैरिटल रेप कानून के अभाव में आखिर कबतक महिलाएं करती रहेंगी यौन हिंसा का सामना?

नैशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 के अनुसार 18-49 साल की उम्र की शादीशुदा महिलाओं में से 83 फीसदी ने अपने मौजूदा पति के साथ रिश्ते में यौन हिंसा का सामना किया है और 13 फीसदी ने बताया कि उनके पूर्व पति ने उनके साथ यौन हिंसा की थी।

वैवाहिक बलात्कार, शादी के रिश्ते में पति या पत्नी की सहमति के बिना अपने साथी के साथ शारीरिक संबंध बनाना है। भारत में सामाजिक नैतिकता और पितृसत्ता की मूल भूमिका ने संबंधों को आकार देने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पितृसत्तात्मक मानसिकता अक्सर विवाहित बंधन को एक कवच के रूप में मानती है जो ‘मैरिटल रेप’ जैसे अपराध को बलात्कार कहने से मुक्त कर देती है। पितृसत्ता यह मानती है कि एक पति का अपनी पत्नी के शरीर पर पूरा हक है। उसी आधार पर भारतीय कानून व्यवस्था में वैवाहिक बलात्कार के ख़िलाफ़ कोई ठोस कानून अभी तक नहीं है।  

भारतीय शादीशुदा जीवन में महिलाओं की यौनिकता और यौन संबंध एक गहरा और संवेदनशील मुद्दा है क्योंकि इसमें स्त्री के पक्ष को कभी न स्वीकार किया जाता है न ही उस नज़रिये से देखा जाता है। विवाहित संबंधों में यौन शोषण और बलात्कार की स्थितियों की ख़बरें सामने आने के बावजूद इस पर जनता में जागरूकता की बड़ी कमी है और इस पर सामाजिक चर्चा न के बराबर होती है। विवाह के बाद रिश्तों में एक स्त्री के यौन संबंधों को लेकर सहमति को कोई महत्व नहीं दिया जाता है। एक पत्नी की यौन संबंधों में सहमति भी उतनी ही ज़रूरी है जितनी पति की होती है लेकिन पुरुषवादी सोच से ग्रसित रिश्तों में इस पक्ष को सबसे पहले नज़रअंदाज किया जाता है।

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में एक नवविवाहित स्त्री की मौत की घटना सामने आई है। मीडिया में आई ख़बरों के मुताबिक़ इंजीनियर पति ने शादी की पहली रात को परफॉर्मेंस एन्हैंसमेंट पिल्स का सेवन करके अपनी पत्नी के साथ यौन संबंध बनाए।

हमीरपुर में पति द्वारा पत्नी का मैरिटल रेप

फेमिनिज़म इन इंडिया के लिए रितिका बैनर्जी

हाल ही में उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में एक नवविवाहित महिला की मौत की घटना सामने आई है। मीडिया में आई ख़बरों के मुताबिक़ इंजीनियर पति ने शादी की पहली रात को परफॉर्मेंस एन्हैंसमेंट पिल्स का सेवन करके अपनी पत्नी के साथ यौन संबंध बनाए। इसके परिणामस्वरूप पत्नी की स्थिति गंभीर रूप से खराब हो गई और उसे गंभीर शारीरिक चोटें आई। फ्री प्रेस जर्नल में छपी रिपोर्ट की ख़बर के अनुसार पति ने अपनी पत्नी के साथ पिल्स खाकर यौन संबंध बनाए थे, जिसके बाद उसकी तबीयत खराब होनी शुरू हो गई। बाद में महिला को कानपुर के एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया।

यौन संबंध के दौरान महिला के गुप्तांगों को आई चोट के बाद उसके शरीर में संक्रमण फैल गया जिसके बाद उसकी मौत हो गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक पति ने यह माना है कि उसने पत्नी के साथ ये गोलियां खाकर यौन संबंध बनाए थे। महिला के रिश्तेदारों ने थाना सुपरिटेंडेंट को एक प्रार्थना पत्र सौंपा जिसमें पति और उसके परिवार के खिलाफ़ कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है। ख़बर लहरिया में प्रकाशित जानकारी के अनुसार पति और उसके परिवार वाले घर से फरार हैं। 

“मेरा पति रोज मेरे साथ यौन हिंसा करता था”

हमीरपुर में हुई यह घटना महज एक घटना नहीं है। भारतीय पितृसत्तात्मक समाज में शादी के रिश्ते में महिलाओं के साथ होने वाला यौन शोषण और बलात्कार की खबरें सामने आती रहती है। अदालतों में मेरिटल रेप को लेकर कई टिप्पणियां की जा चुकी है। लेकिन भारत अभी भी उन देशों में से एक है जहां वैवाहिक बलात्कार को अपराध नहीं माना जाता है। कोलकाता की रहने वाली रीता (बदला हुआ नाम) इसी तरह अपनी शादी में यौन हिंसा और बलात्कार का सामना करने के बाद कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं। अपनी कहानी बताते हुए वह कहती हैं, “एक रात मेरे पति ने सेक्स करते हुए बताया कि उसकी महिलाओं में कोई दिलचस्पी नहीं है। उसे यह शादी अपने परिवार के कारण करनी पड़ी है। यह सब जानकर मैं काफ़ी परेशान हुई और मुझे इसके बारे में ज्यादा कोई जानकारी भी नहीं थी। इसलिए, ये लगता रहा कि यह घटना, एक फेज है या वह झूठ कह रहा है। हालांकि इसके बावजूद मेरा पति मेरे साथ यौन संबंध बनाता रहा। लेकिन वह सेक्स के कई ऐसे तरीके के लिए मजबूर करता जिसके चलते मुझे कई बार गंभीर चोटें भी आयी। वह न केवल मेरे साथ मेरी मर्जी के बगैर यौन संबंध बनाता, बल्कि मेरे परिवार से पैसे भी मांगे।” 

Indian judicial system and women
फेमिनिज़म इन इंडिया के लिए रितिका बैनर्जी

रीता ने इस विषय पर आगे बताया, “मुझे कभी भी उसने पत्नी या इंसान समझ कर नहीं छुआ, न ही अच्छा व्यवहार किया। जब भी वह घर आता, मेरे साथ यौन हिंसा करता और अलग-अलग तरह से यौन संबंध बनाने के लिए भी कहता। वह नशा भी करता और मेरे खुलकर विरोध करने पर मुझे मारता-पीटता। मुझे निवस्त्र करके भी पीटा गया ताकि मैं खुद के बचाव के लिए कमरे से बाहर भी न जा सकूं। इन सबके बीच मैंने जब भी घर-परिवार में बताने की कोशिश की गई, तो मुझे कहा गया कि बच्चा कर लो सब ठीक हो जाएगा।” 

वह आगे बताती है, “जब मैं थक गई थी और उस घर में खुद को अन्य पुरुषों के सामने भी असुरक्षित महसूस करने लगी थी तब मैंने वहां से निकलने का सोचा। वर्तमान में कई सालों से एक मुकदमा लड़ रही हूं, जिसमें महिलाओं के खिलाफ़ होने वाली घरेलू हिंसा और दहेज से जुड़ी धाराओं पर केस चल रहा है। हालांकि शुरुआत में जब मामला दर्ज कराया, तो ससुराल वालों ने केस वापस लेने का दबाव बनाया था। लेकिन मैं इंसाफ चाहती हूं और यह लड़ाई लड़ती रहूंगी।”

भारतीय समाज में यौन शोषण और बलात्कार के मामलों में चुप्पियों को सामान्य माना जाता है। महिलाओं के साथ यौन शोषण, हिंसा को छुपाना और मैरिटल रेप के मामलों में पति-पत्नी के बीच का मामला कहकर संबोधित करने का चलन है। इस तरह से हमारे पुरुषवादी समाज में वैवाहिक बलात्कार को मंजूरी मिली हुई है। शादी के बाद महिलाओं को पुरुष की संपत्ति समझा जाता है और उसकी खुद की कोई शारीरिक स्वायत्ता पर कोई बात नहीं करता है। साथ ही शादी के रिश्ते में पुरुष की यौन अपेक्षाओं को ही महत्व दिया जाता है। बिजनेस लाइन में छपी रिपोर्ट के अनुसार नैशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 के अनुसार 18-49 साल की उम्र की शादीशुदा महिलाओं में से 83 फीसदी ने अपने मौजूदा पति के साथ रिश्ते में यौन हिंसा का सामना किया है और 13 फीसदी ने बताया कि उनके पूर्व पति ने उनके साथ यौन हिंसा की थी। 

वह नशा भी करता और मेरे खुलकर विरोध करने पर मुझे मारता-पीटता। मुझे निवस्त्र करके भी पीटा गया ताकि मैं खुद के बचाव के लिए कमरे से बाहर भी न जा सकूं। इन सबके बीच मैंने जब भी घर-परिवार में बताने की कोशिश की गई, तो मुझे कहा गया कि बच्चा कर लो सब ठीक हो जाएगा।” 

शादी, प्यार और सम्मान का बंधन है, बलात्कार का नहीं। किसी भी रिश्ते में, खासकर शादी में, महिलाओं का शारीरिक और मानसिक सम्मान और सर्वोपरि है। वैवाहिक बलात्कार एक जघन्य अपराध है और किसी भी परिस्थिति में इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। टॉक्सिक रिश्ते किसी व्यक्ति की गरिमा और खुशी को छीन लेते हैं। समाज को यह समझना होगा कि वैवाहिक बलात्कार वास्तविक है और शादी के रिश्तों में महिलाएं यौन हिंसा और बलात्कार का सामना सिर्फ इस वजह से नहीं सह सकती है कि पति और पत्नी के बीच का मामला है। एक स्वस्थ समाज वही है जहां सम्मान और सहमति सर्वोपरि हो।


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