हिंदी में होगी अब जेंडर और नारीवाद की बात फेमिनिज़म इन इंडिया के साथ
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Anjali Chauhan

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पेशे से एक पत्रकार ,जज्बातों को शब्दों में लिखने वाली 'लेखिका' हिंदी साहित्य विषय पर दिल्ली विश्वविद्यालय से BA(Hons) और MA(Hons) मे शिक्षा ग्रहण की फिर जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में शिक्षा ली । मूलतः उत्तर प्रदेश से सम्बद्ध रखती हूँ और दिल्ली में परवरिश हुई । शहरी और ग्रामीण दोनों परिवेशों में नारी आस्मिता पर पितृसत्ता का प्रभाव देखा है जिसे बेहतर जानने और बदलने के लिए 'फेमनिज़म इन इंडिया' से जुड़ी हूँ और लोगों तक अपनी बात पहुँचाना चाहतीं हूँ।

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महादेवी वर्मा

महादेवी वर्मा: नारी-चेतना की ‘अद्वितीय विचारक’ | #IndianWomenInHistory

हिंदी साहित्य के छायावादी युग की प्रसिद्ध और प्रतिष्ठित कवियत्री महादेवी वर्मा की गद्य एवं पद्य की रचनाओं से उनके व्यक्तित्व के दो पहलू देखने को मिलते हैं|
तारा रानी श्रीवास्तव: स्वतंत्रता की लड़ाई में शामिल गुमनाम सेनानी| #IndianWomenInHistory

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हमारा यह पुरुष-प्रधान समाज कहता है कि एक औरत अपने पति के पीछे ही चलती है पर तारा रानी श्रीवास्तव ने इस कथन को पूरी तरह गलत साबित किया है।
जेंडर आधारित हिंसा के खिलाफ़ बागपत की महिलाओं का ‘साहस’

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उत्तर प्रदेश का बागपत जिला पित्तृसत्तामक ढांचे का क्रूर उदाहरण है, जहां महिलाएं आज भी घर की चारहदीवारी में कैद होकर रहने के लिए मजबूर हैं।

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गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|
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नारीवाद के बारे में सभी ने सुना होगा। मगर यह है क्या? इसके दर्शन और सिद्धांत के बारे में ज्यादातर लोगों को नहीं मालूम। इसे पूरी तरह जाने और समझे बिना नारीवाद पर कोई भी बहस या विमर्श बेमानी है। नव उदारवाद के बाद भारतीय समाज में महिलाओं के प्रति आए बदलाव के बाद इन सिद्धांतों को जानना अब और भी जरूरी हो गया है।

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