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भारतीय पितृसत्तात्मक समाज में सेक्स या यौन संबंधों पर खुलकर बात करना अश्लीलता और बेशर्मी माना जाता है। ऐसे में सेक्स संबंधी समस्याओं पर लोगों को बात करने में काफी कठिनाई होती है। मेडिकल क्षेत्र में शारीरिक और मानसिक हर समस्या का इलाज संभव है। सेक्स से जुड़ी परेशानियों, झिझक आदि के लिए भी सेक्स थेरेपी का इस्तेमाल डॉक्टर द्वारा किया जाता है। सेक्स थेरेपी अन्य थेरेपी की तरह एक चिकित्सक प्रक्रिया है। इस मनोचिकित्सक प्रक्रिया में जिसमें किसी के यौन संबंधी और मानसिक दिक्कतों पर मरीज और डॉक्टर के बीच बात होती है।

हालांकि, यौन संबंधों के विषय में खुलकर बात करना भारत में किसी चुनौती से कम नहीं है। लोगों के मन में सेक्स को लेकर कई तरह के संकोच होते हैं लेकिन इस विषय से जुड़े टैबू के कारण वे इस पर खुलकर बात नहीं कर पाते हैं। सेक्स से जुड़ी परेशानी के लिए लोग डॉक्टर के पास जाने में हिचकिचाहट महसूस करते हैं।

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सेक्स और टॉक्सिक मैस्क्यूलिनिटी

पितृसत्तात्मक समाज में पुरुषों का सेक्स से संबंधित परेशानियों के लिए डॉक्टर या थेरेपिस्ट के पास जाना उनकी मर्दानगी पर सवाल माना जाता है। भारतीय पुरुषों पर मर्दानगी का ऐसा लेबल चिपका हुआ है कि सेक्स थेरेपी उनके लिए सही नहीं है। हालांकि इस टैबू से हटकर कुछ पुरुष अपनी यौन समस्याओं के लिए थेरेपिस्ट या डॉक्टरों की मदद लेते हैं। लेकिन यहां भी उनकी मर्दानगी उन्हें यह इजाज़त नहीं देती कि वह अपने सेक्स पार्टनर के साथ सेक्स थेरेपी लें।

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यौन संबंधों के विषय में खुलकर बात करना भारत में किसी चुनौती से कम नहीं है। लोगों के मन में सेक्स को लेकर कई तरह के संकोच होते हैं लेकिन इस विषय से जुड़े टैबू के कारण वे इस पर खुलकर बात नहीं कर पाते हैं। सेक्स से जुड़ी परेशानी के लिए लोग डॉक्टर के पास जाने में हिचकिचाहट महसूस करते हैं।

पुरुष प्रधान समाज में यह धारणा है कि अपने पार्टनर के साथ यौन परेशानी साझा करना पुरुषों की ‘बेइज्ज़ती’ है, इसलिए पुरुष ज्यादातर अकेले परामर्श लेने जाते हैं। यौन संबंधी परेशानी जेंडर के दायरे से परे किसी को भी हो सकती है, यह एक आम बात है। पुरुष तो अपने बनाए टैबू से अलग जाकर समस्या का समाधान थेरेपी से ढूंढ लेता है। महिलाएं अपनी सेक्स समस्या को लेकर कई तरह के सवाल होते हैं। वह कहां जाएं? किससे बात करें? क्या यौन समस्या आम है? ऐसे तमाम सवाल एक महिला के दिमाग में सबसे पहले आते हैं।

सेक्स थेरेपी से जुड़े भ्रम

भारत में सेक्स एजुकेशन की कमी के कारण अपने ही शरीर के बारे में पूरी जानकारी ना होना कई तरह की समस्याओं को जन्म देता है। यौन क्रिया के लिए जब कोई महिला अपने साथी से संपर्क में आती है और वह शारीरिक और मानसिक असंतुष्टि की समस्या का सामना करती है तो न तो उसे परेशानी का उचित कारण पता होता है न ही उसका समाधान।

भारत में सेक्स शब्द को ही अश्लील माना जाता है इसलिए इससे जुड़ी हर बात अश्लील हो जाती है। ऐसे में सेक्स थेरेपी इससे कैसे अछूती रहती। जानकारी के अभाव में सेक्स थेरेपी को लेकर कई मिथ्य मौजूद हैं। सही मायने में कहा जाए तो सेक्स के बारे में सही जानकारी कम और भ्रांतियां लोगों के बीच ज्यादा फैली हैं। उसी का नतीजा है कि सेक्स थेरेपी से जुड़े भ्रम। लोग अक्सर सेक्स शब्द सुनकर यही सोचते हैं कि इसका संबंध सिर्फ शारीरिक क्रिया से है लेकिन सेक्स थेरेपी मनोविज्ञान का भी विषय है। डॉक्टर और मरीज़ के बीच बातचीत कर काउंसलिंग के जरिए व्यक्ति अपनी समस्या का निदान हासिल करता है, वह अपने शरीर को बेहतर तरीके से जान और समझ सकता है।

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अपने पार्टनर के साथ सेक्स थेरेपी लेना शर्मनाक कैसे

आमतौर पर ऐसा होता है कि व्यक्ति सेक्स संबंधी परेशानी के लिए थेरेपिस्ट से बात कर लेगा लेकिन अपने पार्टनर से ही सब कुछ छिपाता है। इसलिए क्योंकि उन्हें लगता है कि कहीं उनकी छवि उनके पार्टनर की नज़रों में खराब न हो जाए, जबकि यह बिल्कुल गलत है। सेक्स थेरेपी पार्टनर के साथ भी आसानी से ली जा सकती है।

आजकल की जीवनशैली का लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर काफी असर देखा जा रहा है। यौन संबंधी समस्याओं में भी मानसिक स्वास्थ्य का असर अधिक पाया जाता है। लोग अपनी यौन संबंधों की परेशानियों पर अधिक बात ना करने की वजह से लंबे समय तक इस परेशानी का सामना करते हैं। लेकिन सेक्स थेरेपी एक सकारात्मक उपाय है। लोग अपने स्वास्थ्य के लिए अपने साथी के साथ अच्छे संबंधों के लिए सेक्स थेरेपी की मदद ले सकते हैं।

इंसान के शरीर को मानसिक ,शारीरिक, भावनात्मक रूप से स्वस्थ रखने में सेक्स थेरेपी कारगर है। भारत जहां यौन संबंधों पर ‘कामसूत्र’ जैसी किताब लिखी गई, उस भारतीय पितृसत्तात्मक समाज में सेक्स से जुड़े कई टैबू बनाए गए हैं। इनसे ऊपर उठकर समाज में सेक्स थेरेपी पर बेझिझक बात करना और लोगों के बीच तक इसे पहुंचाना बेहद जरूरी है।

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तस्वीर साभार : The Marriage Geek

पेशे से एक पत्रकार ,जज्बातों को शब्दों में लिखने वाली 'लेखिका'
हिंदी साहित्य विषय पर दिल्ली विश्वविद्यालय से BA(Hons) और MA(Hons) मे शिक्षा ग्रहण की फिर जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में शिक्षा ली । मूलतः उत्तर प्रदेश से सम्बद्ध रखती हूँ और दिल्ली में परवरिश हुई । शहरी और ग्रामीण दोनों परिवेशों में नारी आस्मिता पर पितृसत्ता का प्रभाव देखा है जिसे बेहतर जानने और बदलने के लिए 'फेमनिज़म इन इंडिया' से जुड़ी हूँ और लोगों तक अपनी बात पहुँचाना चाहतीं हूँ।

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