हिंदी में होगी अब जेंडर और नारीवाद की बात फेमिनिज़म इन इंडिया के साथ
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Nisha Kardam

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मुझे यात्राएं करनी पसंद है क्योंकि उन यात्राओं से हम हमेशा कुछ नया सीखते हैं साथ ही मुझे गढ़े हुए शब्द तथा उनसे जुड़े हुए सामाजिक संदर्भ या जेंडर संबंधों को चुनौती देना पसंद है।

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यौनिकता और एक औरत का शादीशुदा न होना

यौनिकता और एक औरत का शादीशुदा न होना

लेकिन मुझे ऐसा लगता है कि मुझसे इस तरह के सवाल पूछने का इनका और दूसरे लोगों का वास्तविक उद्देश्य यह जानना होता है कि शादीशुदा न रहते हुए भी मैं सेक्स करती हूं या नहीं? आखिरकार,‘अच्छे चरित्र’ वाली महिलाओं से यह उम्मीद तो बिलकुल नहीं की जाती कि वे वैवाहिक जीवन के दायरे से बाहर भी सेक्स करती हो।
इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

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संविधान सभा में हम उन प्रमुख पंद्रह महिला सदस्यों का योगदान आसानी से भुला चुके है या यों कहें कि हमने कभी इसे याद करने या तलाशने की जहमत नहीं की| तो आइये जानते है उन पन्द्रह भारतीय महिलाओं के बारे में जिन्होंने संविधान निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है|  
ताज बेग़म: वह मुग़ल काल की वह कवियत्री और कृष्ण भक्त जिन्हें भूला दिया गया

ताज बेग़म : मुग़ल काल की कवयित्री और कृष्ण भक्त जिन्हें भूला दिया गया

ष्णभक्त मीरा का नाम सब जानते हैं लेकिन मीरा के समान ताज भी कृष्ण की अनन्य भक्त थी इसके बारे में सब नहीं जानते।

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पैड खरीदने में माँ को आज भी शर्म आती है

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मासिकधर्म और सैनिटरी पैड पर हमारे घरों में चर्चा करने की बेहद ज़रूरत है और जिसकी शुरुआत हम महिलाओं को ही करनी होगी।
लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

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गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|
उफ्फ! क्या है ये नारीवादी सिद्धांत? आओ जाने!

उफ्फ! क्या है ये ‘नारीवादी सिद्धांत?’ आओ जाने!

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नारीवाद के बारे में सभी ने सुना होगा। मगर यह है क्या? इसके दर्शन और सिद्धांत के बारे में ज्यादातर लोगों को नहीं मालूम। इसे पूरी तरह जाने और समझे बिना नारीवाद पर कोई भी बहस या विमर्श बेमानी है। नव उदारवाद के बाद भारतीय समाज में महिलाओं के प्रति आए बदलाव के बाद इन सिद्धांतों को जानना अब और भी जरूरी हो गया है।

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