हिंदी में होगी अब जेंडर और नारीवाद की बात फेमिनिज़म इन इंडिया के साथ
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Preeti Kumari

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मेरा नाम प्रीति है। मैं दिल्ली से हूँ। मैंने जे.एन.यू. से हिंदी विषय में मास्टर किया है। वर्तमान में दिल्ली विश्वविद्यालय से 'हिन्दी के नारीवादी उपन्यासों में स्त्री-मुक्ति की अवधारणा: मैत्रेयी पुष्पा के उपन्यासों के संदर्भ में'' विषय पर शोध कर रही हूं। मैं एक लेखक बनना चाहती हूं। मुझे नारीवादी बहसों और अवधारणाओं के विषयो पर पढ़ना-लिखना पसन्द है।

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पितृसत्ता क्या है? – आइये जाने  

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पितृसत्ता एक ऐसी व्यवस्था के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसमें पुरुषों का महिलाओं पर वर्चस्व रहता है और वे उनका शोषण और उत्पीड़न करते हैं|
पढ़ें, नारीवादी कार्यकर्ता कमला भसीन के 6 ऐसे कोट्स जो बताते हैं नारीवाद क्यों ज़रूरी है

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कमला भसीन नारीवाद के क्षेत्र का एक जाना-पहचाना नाम हैं जो पिछले 35 से भी अधिक सालों से जेंडर, मानवाधिकार के मुद्दों पर राष्ट्रीय...
इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

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संविधान सभा में हम उन प्रमुख पंद्रह महिला सदस्यों का योगदान आसानी से भुला चुके है या यों कहें कि हमने कभी इसे याद करने या तलाशने की जहमत नहीं की| तो आइये जानते है उन पन्द्रह भारतीय महिलाओं के बारे में जिन्होंने संविधान निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है|  

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गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|
उफ्फ! क्या है ये नारीवादी सिद्धांत? आओ जाने!

उफ्फ! क्या है ये ‘नारीवादी सिद्धांत?’ आओ जाने!

नारीवाद के बारे में सभी ने सुना होगा। मगर यह है क्या? इसके दर्शन और सिद्धांत के बारे में ज्यादातर लोगों को नहीं मालूम। इसे पूरी तरह जाने और समझे बिना नारीवाद पर कोई भी बहस या विमर्श बेमानी है। नव उदारवाद के बाद भारतीय समाज में महिलाओं के प्रति आए बदलाव के बाद इन सिद्धांतों को जानना अब और भी जरूरी हो गया है।

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