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Ritika Srivastava

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Ritika Srivastava has completed her M.Phil. in Education from Tata Institute of Social Sciences, Hyderabad. Presently She is pursuing Ph.D. in Education from the same institute. After M.Phil., She worked in the Regional Institute of Education (NCERT) Bhopal as Assistant Professor in Education. She likes to work with children and teachers. She likes to read, write, and discuss contemporary equity and equality issues of education and society.

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ख़ास बात: बीएचयू की समाजशास्त्र विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर प्रतिमा गोंड से

ख़ास बात : बीएचयू की समाजशास्त्र विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर प्रतिमा गोंड से

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मुझे कई बार कहा गया कि मैं जाति की राजनीति करती हूं। तो मेरी हर चीज़ में कहीं न कहीं ये जाति का फैक्टर ज़रूर जोड़ा जाता है। चूंकि मैं एक प्रोफेसर हूं, आर्थिक रूप से सशक्त हूं इसलिए मुझे सीधे तौर पर तो कुछ नहीं कहा जाता पर अप्रत्यक्ष तौर पर यह हर बार एहसास दिलाया जाता है।
इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

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संविधान सभा में हम उन प्रमुख पंद्रह महिला सदस्यों का योगदान आसानी से भुला चुके है या यों कहें कि हमने कभी इसे याद करने या तलाशने की जहमत नहीं की| तो आइये जानते है उन पन्द्रह भारतीय महिलाओं के बारे में जिन्होंने संविधान निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है|  
पीरियड्स लीव पर बिहार सरकार का ऐतिहासिक फैसला जिसे हर किसी ने अनदेखा किया

पीरियड्स लीव पर बिहार सरकार का वह फैसला जिसे हर किसी ने अनदेखा किया

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पीरियड्स लीव जैसा प्रगतिशील फैसला लेने वाला बिहार पहला राज्य है। आज से करीब 30 साल पहले बिहार के मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने महिलाओं को पीरियड्स लीव देते हुए महिलाओं के अधिकारों को लेकर एक लैंगिक संवेदनशीलता की ओर एक कदम उठाया था

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पैड खरीदने में माँ को आज भी शर्म आती है

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मासिकधर्म और सैनिटरी पैड पर हमारे घरों में चर्चा करने की बेहद ज़रूरत है और जिसकी शुरुआत हम महिलाओं को ही करनी होगी।
लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

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गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|
उफ्फ! क्या है ये नारीवादी सिद्धांत? आओ जाने!

उफ्फ! क्या है ये ‘नारीवादी सिद्धांत?’ आओ जाने!

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नारीवाद के बारे में सभी ने सुना होगा। मगर यह है क्या? इसके दर्शन और सिद्धांत के बारे में ज्यादातर लोगों को नहीं मालूम। इसे पूरी तरह जाने और समझे बिना नारीवाद पर कोई भी बहस या विमर्श बेमानी है। नव उदारवाद के बाद भारतीय समाज में महिलाओं के प्रति आए बदलाव के बाद इन सिद्धांतों को जानना अब और भी जरूरी हो गया है।

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