हिंदी में होगी अब जेंडर और नारीवाद की बात फेमिनिज़म इन इंडिया के साथ
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Ritika Srivastava

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Ritika Srivastava has completed her M.Phil. in Education from Tata Institute of Social Sciences, Hyderabad. Presently She is pursuing Ph.D. in Education from the same institute. After M.Phil., She worked in the Regional Institute of Education (NCERT) Bhopal as Assistant Professor in Education. She likes to work with children and teachers. She likes to read, write, and discuss contemporary equity and equality issues of education and society.

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जसिंता केरकेट्टाः क्रोध और आशाओं को कविताओं में पिरोती एक आदिवासी कवयित्री

जसिंता केरकेट्टाः विकास के दंश, प्रेम और आशाओं को कविताओं में पिरोती एक कवयित्री

अपने कविता संसार में जल, जंगल, जमीन और आदिवासी अस्मिता की तलाश करने वाली जसिंता केरकेट्टा आज दुनिया के कई हिस्सों में चर्चित हो चुकी हैं। आज वह कई देशों में लेक्चर देती हैं और वॉर्कशॉप कराती हैं। इटली, जर्मनी, फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया के कई विश्वविद्यालयों में कविता संवाद कर चुकी हैं। कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से नवाज़ी जा चुकी हैं। जसिंता झारखंड की पहली आदिवासी कवयित्री हैं जिनकी कविताओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक साथ तीन भाषाओं में प्रकाशित किया गया है।
अरक विरोधी आंदोलन : एक आंदोलन जिसने बताया कि शराब से घर कैसे टूटते हैं!

अरक विरोधी आंदोलन : एक आंदोलन जिसने बताया कि शराब से घर कैसे टूटते...

अरक विरोधी आंदोलन इसबात का अच्छा उदाहरण है कि किस तरह शिक्षा औरतों को सशक्त बनाती है और कैसे पढ़ना-लिखना हमें अपने अधिकारों से वाक़िफ़ कराता है।
इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

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संविधान सभा में हम उन प्रमुख पंद्रह महिला सदस्यों का योगदान आसानी से भुला चुके है या यों कहें कि हमने कभी इसे याद करने या तलाशने की जहमत नहीं की| तो आइये जानते है उन पन्द्रह भारतीय महिलाओं के बारे में जिन्होंने संविधान निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है|  

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पैड खरीदने में माँ को आज भी शर्म आती है

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मासिकधर्म और सैनिटरी पैड पर हमारे घरों में चर्चा करने की बेहद ज़रूरत है और जिसकी शुरुआत हम महिलाओं को ही करनी होगी।
लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

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गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|
उफ्फ! क्या है ये नारीवादी सिद्धांत? आओ जाने!

उफ्फ! क्या है ये ‘नारीवादी सिद्धांत?’ आओ जाने!

नारीवाद के बारे में सभी ने सुना होगा। मगर यह है क्या? इसके दर्शन और सिद्धांत के बारे में ज्यादातर लोगों को नहीं मालूम। इसे पूरी तरह जाने और समझे बिना नारीवाद पर कोई भी बहस या विमर्श बेमानी है। नव उदारवाद के बाद भारतीय समाज में महिलाओं के प्रति आए बदलाव के बाद इन सिद्धांतों को जानना अब और भी जरूरी हो गया है।

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