हिंदी में होगी अब जेंडर और नारीवाद की बात फेमिनिज़म इन इंडिया के साथ
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Ritika

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Ritika is a reporter at the core. She knows what it means to be a woman reporter, within the organization and outside. This young enthusiast has been awarded the prestigious Laadli Media Awards and Breakthrough Reframe Media Awards for her gender-sensitive writing. Ritika is biased.

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‘ऋषि पंचमी व्रत’ - पीरियड को पाप मानकर शुद्ध होने का संकीर्ण रिवाज

‘ऋषि पंचमी व्रत’ – पीरियड को पाप मानकर शुद्ध होने का संकीर्ण रिवाज

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ऋषि पंचमी व्रत महिलाओं के पीरियड के दौरान मन्दिर या रसोई जैसे अन्य निषेधों जैसे पापों को दूर करने के लिए किया जाता है|
पंडिता रमाबाई: महिलाओं की शिक्षा के लिए लड़ने वाली समाज सुधारक| #IndianWomenInHistory

पंडिता रमाबाई : महिलाओं की शिक्षा के लिए लड़ने वाली समाज सुधारक | #IndianWomenInHistory

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रमाबाई को भारत में वह पहचान नहीं मिली है जो उनके समकालीन समाजसुधारकों को दी गई पर ये बात कोई नकार नहीं सकता की वह महाराष्ट्र और भारत की सबसे प्रमुख नारीवादी समाज सुधारकों में से एक थी।
इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

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संविधान सभा में हम उन प्रमुख पंद्रह महिला सदस्यों का योगदान आसानी से भुला चुके है या यों कहें कि हमने कभी इसे याद करने या तलाशने की जहमत नहीं की| तो आइये जानते है उन पन्द्रह भारतीय महिलाओं के बारे में जिन्होंने संविधान निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है|  

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पैड खरीदने में माँ को आज भी शर्म आती है

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मासिकधर्म और सैनिटरी पैड पर हमारे घरों में चर्चा करने की बेहद ज़रूरत है और जिसकी शुरुआत हम महिलाओं को ही करनी होगी।
लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

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गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|
उफ्फ! क्या है ये नारीवादी सिद्धांत? आओ जाने!

उफ्फ! क्या है ये ‘नारीवादी सिद्धांत?’ आओ जाने!

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नारीवाद के बारे में सभी ने सुना होगा। मगर यह है क्या? इसके दर्शन और सिद्धांत के बारे में ज्यादातर लोगों को नहीं मालूम। इसे पूरी तरह जाने और समझे बिना नारीवाद पर कोई भी बहस या विमर्श बेमानी है। नव उदारवाद के बाद भारतीय समाज में महिलाओं के प्रति आए बदलाव के बाद इन सिद्धांतों को जानना अब और भी जरूरी हो गया है।

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