हिंदी में होगी अब जेंडर और नारीवाद की बात फेमिनिज़म इन इंडिया के साथ
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Vanshika Pal

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मेरा नाम वांशिक पाल है| दिल्ली विश्वविद्यालय के गार्गी कॉलेज की छात्रा हूँ| दिल्ली में ही हमेशा से रही हूँ, तो दिल्ली की गलियों को ही देखा है, लेकिन ताज्जुब की बात तो यह है की अभी तक पूरी दिल्ली नहीं देखी| बात करें मेरे बारें में तो अभी तक मुझे इतना ही पता है, जितना मेरे आधार कार्ड पर फिट हो सकें| अपने बारें में कभी इतनी गहराई में सोचनें का मौका ही नहीं मिला, क्योंकि अभी तक के सारे फैसले घरवालों ने लिए है| अब सोचती हूँ, तो लगता है जैसे अभी तक तो कुछ किया ही नहीं है| बाकी पेंटिंग करना, गाने सुनना, किताबें पढ़ना और छोटे बाल रखना मेरे कुछ शौक है| हर जगह गलतियाँ करना जैसे मेरा एक मात्र काम है| बाकी ज़िंदगी में कुछ नया सीखने की कोशिश में लगी रहती हूँ, लेकिन उनसे बोर भी बहुत जल्दी हो जाती हूँ| सिनेमा देखना, गानों के साथ गाने गाना और आस पास की कहानियों को अपने फोन में रखना जैसे एक मात्र प्यार है| बाकी हर एक बात पर "क्यों?" पूछना पसंद करती हूँ|

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पितृसत्ता क्या है? – आइये जाने  

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पितृसत्ता एक ऐसी व्यवस्था के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसमें पुरुषों का महिलाओं पर वर्चस्व रहता है और वे उनका शोषण और उत्पीड़न करते हैं|
लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

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गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|
गालियों का केंद्र हमेशा महिलाएं ही क्यों होती हैं

गालियों का केंद्र हमेशा महिलाएं ही क्यों होती हैं ?

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इन गालियों का संबंध होता है केवल महिलाओं की ‘योनि’ से क्योंकि पितृसत्ता में महिला का जीवन और उसकी इज्ज़त-आबरू सब कुछ सिर्फ योनि से जुड़ा हुआ है।

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पैड खरीदने में माँ को आज भी शर्म आती है

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मासिकधर्म और सैनिटरी पैड पर हमारे घरों में चर्चा करने की बेहद ज़रूरत है और जिसकी शुरुआत हम महिलाओं को ही करनी होगी।
लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

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गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|
उफ्फ! क्या है ये नारीवादी सिद्धांत? आओ जाने!

उफ्फ! क्या है ये ‘नारीवादी सिद्धांत?’ आओ जाने!

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नारीवाद के बारे में सभी ने सुना होगा। मगर यह है क्या? इसके दर्शन और सिद्धांत के बारे में ज्यादातर लोगों को नहीं मालूम। इसे पूरी तरह जाने और समझे बिना नारीवाद पर कोई भी बहस या विमर्श बेमानी है। नव उदारवाद के बाद भारतीय समाज में महिलाओं के प्रति आए बदलाव के बाद इन सिद्धांतों को जानना अब और भी जरूरी हो गया है।

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