Tuesday, December 10, 2019
औरतों की अनकही हसरतें खोलती है ‘लस्ट स्टोरी’

औरतों की अनकही हसरतें खोलती है ‘लस्ट स्टोरी’

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लस्ट स्टोरी समाज के अलग-अलग तबके में आधी आबादी के उस आधे किस्से को बयाँ करती है जिसे हमेशा चरित्रवान और चरित्रहीन के दायरें में समेटा गया है|

पितृसत्ता क्या है? – आइये जाने  

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पितृसत्ता एक ऐसी व्यवस्था के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसमें पुरुषों का महिलाओं पर वर्चस्व रहता है और वे उनका शोषण और उत्पीड़न करते हैं|
जेंडर से बनाई जाती है महिलाएं

‘जेंडर’ से बनाई जाती है महिलाएं

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‘जेंडर’ सामाजिक-सांस्कृतिक संरचना है, जो स्त्रीत्व और पुरुषत्व के गुणों को गढ़ने के सामाजिक नियम व कानूनों का निर्धारण करता है।
फैमिली ग्रुप्स के अश्लील व्हाट्सएप्प मेसेज – एक विश्लेषण

फैमिली ग्रुप्स के अश्लील व्हाट्सएप्प मेसेज – एक विश्लेषण

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आजकल फैमिली ग्रुप में अपने बड़े-बूढ़े और रिश्तेदारों की तरफ से शेयर किये जाने वाले कुछ उन चुनिन्दा भद्दे व्हाट्सएप्प मेसेज के बारे बात करने जा रही हूँ, जो महिलाओं के प्रति व उनसे बनाये जाने वाले रिश्ते के प्रति की अपनी घिनौनी सोच को साझा करते हैं|
क्या है स्त्री-विमर्श का कैरेक्टर? – आइये जाने

क्या है स्त्री-विमर्श का कैरेक्टर? – आइये जाने

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स्त्री-विमर्श अक्सर मध्यवर्गीय स्त्री पर केन्द्रित होता है जिनका पूरा संघर्ष दैहिक स्वतंत्रता से लेकर आर्थिक स्वतंत्रता तक सिमटा हुआ है|
बाल यौन शोषण से कैसे करें बचाव? आइये जाने

बाल यौन शोषण से कैसे करें बचाव? आइये जाने

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बाल यौन-शोषण के बारे में बच्चों को सावधान करने के लिए कई उपाए मौजूद हैंl आइये जानते हैं कि क्या है वे उपाय|
प्राचीन भारत की स्त्रियाँ जो पर्दे में नहीं टॉपलेस रहती थीं

प्राचीन भारत की स्त्रियाँ जो पर्दे में नहीं टॉपलेस रहती थीं

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प्राचीन भारत में स्त्रियों को टॉपलेस घूमने की आजादी थी। यह हमारी सांस्कृतिक गरिमा थी कि इसे सहज भाव से स्वीकार किया जाता था। यह बकायदा एक ऐतिहासिक दस्तावेज है।
संस्कारी लड़कियों के नाम एक खुला खत...

संस्कारी लड़कियों के नाम एक खुला खत…

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पितृसत्तात्मक समाज में लड़कियों का चरित्र सिर्फ दो छोर से बंधा होता है - अच्छा या बुरा| इसके तहत अच्छी लड़की यानी कि संस्कारी लड़की बनना हर लड़की का सपना बन जाता है और वो ज़िन्दगीभर इस सपने को पूरा करने के लिए जद्दोजहद करती रहती है|
यौन उत्पीड़न बनता जा रहा है हर ज़िन्दगी का हिस्सा

यौन उत्पीड़न बनता जा रहा है हर ज़िन्दगी का हिस्सा

यौन उत्पीड़न का मतलब होता है ‘किसी भी तरह का उत्पीड़न जो लिंग पर आधारित हो। यह उत्पीड़न कई तरह का और कई स्तरों पर होता है|

लड़की सांवली है, हमें तो चप्पल घिसनी पड़ेगी!

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‘मैंने कई बार मां बाप के या परिजनों के मुंह से सुना है, अभागी काली लड़की| उसके इतने अच्छे नाक नक्श हैं, बस गोरी होती| इसके बाद मिलियन डॉलर का ऑफर आता है, कौन एक काली लड़की से शादी करेगा| उसके लिए अच्छा लड़का ढूंढना मुश्किल हो जाएगा|’

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ट्रेंडिंग

मैं एक महिला हूं और मुझे एनकाउंटर न्याय नहीं लगता

मैं एक महिला हूं और मुझे एनकाउंटर न्याय नहीं लगता

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महिलाओं के लिए यह विशेष तौर पर सचेत होने का वक्त है। सरकारें अपनी ओर से फास्ट ट्रैक कोर्ट, पुलिस रिफोर्म, प्रशासनिक कार्रवाई आदि पर जोर नहीं दे रही।
इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

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संविधान सभा में हम उन प्रमुख पंद्रह महिला सदस्यों का योगदान आसानी से भुला चुके है या यों कहें कि हमने कभी इसे याद करने या तलाशने की जहमत नहीं की| तो आइये जानते है उन पन्द्रह भारतीय महिलाओं के बारे में जिन्होंने संविधान निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है|  
लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

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गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|
भारत में स्त्री विमर्श और स्त्री संघर्ष: इतिहास के झरोखे से

भारत में स्त्री विमर्श और स्त्री संघर्ष: इतिहास के झरोखे से

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भारत में स्त्री संघर्ष और स्त्री अधिकार के आन्दोलन को इसी रूप में स्वतंत्रता आन्दोलन के परिप्रेक्ष्य में देखने की आवश्यकता है|
उफ्फ! क्या है ये नारीवादी सिद्धांत? आओ जाने!

उफ्फ! क्या है ये ‘नारीवादी सिद्धांत?’ आओ जाने!

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नारीवाद के बारे में सभी ने सुना होगा। मगर यह है क्या? इसके दर्शन और सिद्धांत के बारे में ज्यादातर लोगों को नहीं मालूम। इसे पूरी तरह जाने और समझे बिना नारीवाद पर कोई भी बहस या विमर्श बेमानी है। नव उदारवाद के बाद भारतीय समाज में महिलाओं के प्रति आए बदलाव के बाद इन सिद्धांतों को जानना अब और भी जरूरी हो गया है।