हिंदी में होगी अब जेंडर और नारीवाद की बात फेमिनिज़म इन इंडिया के साथ
Home इंटरसेक्शनल

इंटरसेक्शनल

No posts to display

ट्रेंडिंग

कन्यादान से कन्यामान: प्रगतिशीलता की चादर ओढ़ बाज़ारवाद और रूढ़िवादी परंपराओं को बढ़ावा देते ऐड

कन्यादान से कन्यामान : प्रगतिशीलता की चादर ओढ़ बाज़ारवाद और रूढ़िवादी परंपराओं को बढ़ावा...

0
भारतीय राजनीति में एक चीज बहुत चल रही है, इस शहर का नाम बदल दो, उस योजना का नाम बदल दो, ठीक उसी से प्रेरणा लेकर विज्ञापन जगत में कन्यादान को कन्यामान कहने को कहा गया है। शहर हूबहू वैसा ही रहता है बस नाम बदल जाता है।
पितृसत्ता क्या है? – आइये जाने  

पितृसत्ता क्या है? – आइये जाने  

पितृसत्ता एक ऐसी व्यवस्था के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसमें पुरुषों का महिलाओं पर वर्चस्व रहता है और वे उनका शोषण और उत्पीड़न करते हैं|
पढ़ें, नारीवादी कार्यकर्ता कमला भसीन के 6 ऐसे कोट्स जो बताते हैं नारीवाद क्यों ज़रूरी है

पढ़ें : नारीवादी कार्यकर्ता कमला भसीन के 6 ऐसे कोट्स जो बताते हैं नारीवाद...

कमला भसीन नारीवाद के क्षेत्र का एक जाना-पहचाना नाम हैं जो पिछले 35 से भी अधिक सालों से जेंडर, मानवाधिकार के मुद्दों पर राष्ट्रीय...

आपके पसंदीदा लेख

पैड खरीदने में माँ को आज भी शर्म आती है

पैड खरीदने में माँ को आज भी शर्म आती है

मासिकधर्म और सैनिटरी पैड पर हमारे घरों में चर्चा करने की बेहद ज़रूरत है और जिसकी शुरुआत हम महिलाओं को ही करनी होगी।
लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

6
गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|
उफ्फ! क्या है ये नारीवादी सिद्धांत? आओ जाने!

उफ्फ! क्या है ये ‘नारीवादी सिद्धांत?’ आओ जाने!

2
नारीवाद के बारे में सभी ने सुना होगा। मगर यह है क्या? इसके दर्शन और सिद्धांत के बारे में ज्यादातर लोगों को नहीं मालूम। इसे पूरी तरह जाने और समझे बिना नारीवाद पर कोई भी बहस या विमर्श बेमानी है। नव उदारवाद के बाद भारतीय समाज में महिलाओं के प्रति आए बदलाव के बाद इन सिद्धांतों को जानना अब और भी जरूरी हो गया है।

फॉलो करे

7,127FansLike
2,948FollowersFollow
2,599FollowersFollow
636SubscribersSubscribe
Skip to content