Tuesday, December 10, 2019
दिल्ली से हैदराबाद : यौन हिंसा की घटनाएँ और सोशल मीडिया की चिंताजनक भूमिका

दिल्ली से हैदराबाद : यौन हिंसा की घटनाएँ और सोशल मीडिया की चिंताजनक भूमिका

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आईपीसी सेक्शन 228-A के अनुसार, पीड़ित की पहचान का खुलासा करना दंडनीय अपराध है। इसके बावजूद यौन हिंसा की खबरों को किसी ‘सनसनी’ की तरह प्रकाशित की जाती है।

मी लॉर्ड ! अब हम गैरबराबरी के खिलाफ किसका दरवाज़ा खटखटाएं – ‘सबरीमाला स्पेशल’

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सबरीमाला पर एक कड़ा फैसला दे चुका सुप्रीम कोर्ट इस बार यह फैसला नहीं ले पाया कि सबरीमाला मंदिर की प्रथा की नींव पितृसत्ता की बुनियाद पर ही टिकी हुई है।
थर्ड जेंडर से जुड़ी ये बातें बहुत कम लोग जानते हैं

थर्ड जेंडर से जुड़ी ये बातें बहुत कम लोग जानते हैं

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पूरे हिजड़े समुदाय को सामाजिक संरचना की दृष्टि से सात समाज या घरानों में बांटा जा सकता है, हर घराने के मुखिया को नायक कहा जाता है|
अंग्रेजी भाषा में क्यों सिमटी हैं 'यौनिकता'?

अंग्रेजी भाषा में क्यों सिमटी हैं ‘यौनिकता’?

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दुर्भाग्यवश यौनिकता पर ज़्यादातर सामग्री अंग्रेज़ी में ही मिलती है और हमें अपनी भाषा में उसे जानने समझने के लिए अनुवाद पर निर्भर होना पड़ता है।

‘शोभा नहीं देता इतना बड़ा पेट फूलाकर किसी के सामने आना’ कहने वाले जरुर...

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प्रिया मलिक ने हाल ही में बंग स्टूडियो और द दिल्ली न्यू कंपनी के माध्यम से भारतीय पारंपरिक पोशाक में अपनी गर्भावस्था का फोटोशूट करवाया| यह फोटोशूट हिंदू धर्म की तीन देवी – लक्ष्मी, सरस्वती और दुर्गा पर आधारित था|
गर्भनिरोध के ऐसे तरीके, जिनसे आप हैं बेखबर

गर्भनिरोध के ऐसे तरीके, जिनसे आप हैं बेखबर

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ऐसे बहुत से अन्य गर्भनिरोधक तरीके हैं, जिनके बारे में शहरी क्षेत्रों में भी जागरूकता सीमित है। आइए जानते हैं कि बर्थ कंट्रोल के अन्य तरीके क्या हैं|
औरत के ‘ओर्गेज्म’ की बात पर हम मुंह क्यों चुराते हैं?

औरत के ‘ओर्गेज्म’ की बात पर हम मुंह क्यों चुराते हैं?  

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कई ऐसे रिसर्च बताते हैं कि 62 फीसद महिलाओं को ओर्गेज्म मास्टरबेशन के वक्त आता है। ओर्गेज्म भी दूसरे सामान्य और प्राकृतिक प्रक्रियाओं का ही एक हिस्सा है। स्वास्थ्य पर इसका सीधा असर है।
बेघर लोग

चुनावी मौसम में उनलोगों की बात जो इसबार मतदान नहीं कर पायेंगें

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बेघर और वंचित तबकों मतदान के अधिकार से दूर होना न केवल शासन की बल्कि हमारे समाज, देश और विचारधारा की विफलता को दिखाता है|

गांधी के बहाने सच के प्रयोगों की बात

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गेराल्डाइन फोर्ब्स लिखती हैं कि यूरोप की नज़र में भारत एक अत्यंत पिछ्ड़ा हुआ देश था क्योंकि यहाँ की स्त्रियों की दुर्दशा जैसी दुनिया में कहीं नहीं थी।

पीरियड से जुड़ी एक खौफनाक प्रथा ‘छौपदी’

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नेपाल में पीरियड के दौरान लड़की को घर के बाहर झोपड़ी में या पशुओं के बाड़े में रहने पर मजबूर होना पड़ता है, इस प्रथा को छौपदी कहा जाता है|

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ट्रेंडिंग

मैं एक महिला हूं और मुझे एनकाउंटर न्याय नहीं लगता

मैं एक महिला हूं और मुझे एनकाउंटर न्याय नहीं लगता

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महिलाओं के लिए यह विशेष तौर पर सचेत होने का वक्त है। सरकारें अपनी ओर से फास्ट ट्रैक कोर्ट, पुलिस रिफोर्म, प्रशासनिक कार्रवाई आदि पर जोर नहीं दे रही।
इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

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संविधान सभा में हम उन प्रमुख पंद्रह महिला सदस्यों का योगदान आसानी से भुला चुके है या यों कहें कि हमने कभी इसे याद करने या तलाशने की जहमत नहीं की| तो आइये जानते है उन पन्द्रह भारतीय महिलाओं के बारे में जिन्होंने संविधान निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है|  
लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

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गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|
भारत में स्त्री विमर्श और स्त्री संघर्ष: इतिहास के झरोखे से

भारत में स्त्री विमर्श और स्त्री संघर्ष: इतिहास के झरोखे से

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भारत में स्त्री संघर्ष और स्त्री अधिकार के आन्दोलन को इसी रूप में स्वतंत्रता आन्दोलन के परिप्रेक्ष्य में देखने की आवश्यकता है|
उफ्फ! क्या है ये नारीवादी सिद्धांत? आओ जाने!

उफ्फ! क्या है ये ‘नारीवादी सिद्धांत?’ आओ जाने!

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नारीवाद के बारे में सभी ने सुना होगा। मगर यह है क्या? इसके दर्शन और सिद्धांत के बारे में ज्यादातर लोगों को नहीं मालूम। इसे पूरी तरह जाने और समझे बिना नारीवाद पर कोई भी बहस या विमर्श बेमानी है। नव उदारवाद के बाद भारतीय समाज में महिलाओं के प्रति आए बदलाव के बाद इन सिद्धांतों को जानना अब और भी जरूरी हो गया है।