लैंगिक दायरों से परे होती है प्यार की परिभाषा

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हमारे यहाँ तो प्रेम कहानियाँ ही लड़का-लड़की वाली गायी जाती है| पर इसका मतलब ये नहीं कि प्यार का दायरा सिर्फ यहीं तक है, वास्तविकता ये है कि प्यार की कहानी लड़का-लड़की तक सीमित सिर्फ इसलिए है क्योंकि समलैंगिक प्रेम कहानियाँ आज भी अंधेरे बक्से में बंद है|

नागरिकता संशोधन क़ानून और एनआरसी के ख़िलाफ़ विदेशों में भी विरोध

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राष्ट्र में हर तरफ सीएए व एनआरसी के विरोध में प्रदर्शन चल रहे हैं। प्रदर्शनों की यही लहर भारत की सीमा के पार अंतरराष्ट्रीय फलक पर भी देखने को मिल रही है।

जेएनयू में हुई हिंसा देश के लोकतंत्र पर सीधा हमला है

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जेएनयू में जो भी हुआ, वो जनांदोलनों से हक़पकाए हुए लोगों की क्रूरता थी। ये एक हिंसात्मक प्रतिक्रिया थी, लोगों की एकजुटता और उनके प्रतिरोध के खिलाफ़।

काश ! समाज में ‘जेंडर संवेदना’ उतनी हो कि स्त्री विमर्श का विषय न...

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लैंगिक विभेद की सख्त चट्टानों, मोटे-मोटे ढेलों से टकराने के बारम्बार के अनुभवों के कारण समानता की छद्म चेतना को बनाए रखना असम्भव हो गया।

‘लिपस्टिक लगाने से रेप होगा’: प्रोग्रसिव सोच का दोहरा सच

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पितृसत्ता में जीने वाले पुरुष प्रगतिशीलता का जामा पहनकर महिलाओं के खिलाफ सड़ी सोच और वीभत्स सोच को बढ़ावा देते है|
हैरेसमैंट की एक घटना : जब शिक्षक बनने लगा भक्षक

हैरेसमैंट की एक घटना : जब शिक्षक बनने लगा भक्षक

हैरेसमैंट या छेड़छाड़, कहने को तो ये छोटा सा शब्द है। पर जिसपर ये बीतता है ये वही जानता है कि ये सिर्फ एक शब्द मात्र नहीं है बल्कि एक वीभत्स घटना है

सशक्त व्यक्तित्व की जिंदा मिशाल है गाँव की ये महिलाएं

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छोटे-छोटे प्रयासों से समाज में बड़े बदलाव लाने वाली उत्तर प्रदेश के गाँव की ये महिलाएं समाज के लिए सशक्त व्यक्तित्व की जिन्दा मिशाल है|
जेंडर आधारित भेदभाव को चुनौती देने का ‘साहस’ करते किशोर-किशोरियां

जेंडर आधारित भेदभाव को चुनौती देने का ‘साहस’ करते किशोर-किशोरियां

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जेंडर का ढांचा लड़कियों के आज़ाद पंखों को कतरने और उनकी क्षमताओं को कैद करने का काम करता हैं, वहीं ये लड़कों को मर्दानगी के विषैले जाल में फंसता है।
भारतीय मीडिया पर इतनी सिमटी क्यों हैं LGBTQIA+ की खबरें

भारतीय मीडिया पर इतनी सिमटी क्यों हैं LGBTQIA+ की खबरें

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सुप्रीम कोर्ट ने धारा 377 हटाकर समलैंगिकता को वैधीकरण की सौगात मिली, तब मीडिया ने पहली बार इस पर सही कवरेज की। हालांकि कुछ दिन बाद सब ज्यों का त्यों हो गया।

प्रेग्नेंट सेरेना विलियम्स की बेबाक तस्वीरें

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सेरेना विलियम्स ने प्रेग्नेंसी के दौरान न्यूड फोटोशूट करवाया| ये फोटोशूट उन्होंने वैनिटी फेयर मैगजीन के कवर पेज के लिए करवाया था|

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सपना राठी का वीडियो वायरल करना समाज की पितृसत्तात्मक घटिया मानसिकता है

सपना राठी का वीडियो वायरल करना समाज की पितृसत्तात्मक घटिया मानसिकता है

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सपना राठी का विरोध उनके विचारों के आधार पर किया जाना चाहिए। न की उनके शरीर और शारीरिक संबंधों के आधार पर चारित्रिक टिप्पणी करके।
इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

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संविधान सभा में हम उन प्रमुख पंद्रह महिला सदस्यों का योगदान आसानी से भुला चुके है या यों कहें कि हमने कभी इसे याद करने या तलाशने की जहमत नहीं की| तो आइये जानते है उन पन्द्रह भारतीय महिलाओं के बारे में जिन्होंने संविधान निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है|  
लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

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गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|
थप्पड़

‘थप्पड़’ – क्यों मारा, नहीं मार सकता।’- वक्त की माँग है ये ज़रूरी सवाल

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मर्दों को पीटने का हक किसने दिया, वे अपने जीवनसाथी पर हाथ कैसे उठा सकते हैं। यही सवाल पूछती नज़र आती है तापसी पन्नू और अनुभव सिन्हा की नई फिल्म- थप्पड़।
पीरियड

हमारे समाज में पीरियड का क़िस्सा : भुज में ‘पीरियड’ के दौरान भेदभाव और...

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स्वामी कृष्णस्वरुप की इन बातों से साफ़ है कि किस तरह धर्म की हवा शिक्षा पर न केवल हावी होती है, बल्कि उसकी जड़ों को भी दीमक की तरह खोखली करने लगती है।