छत्तीसगढ़ के ही एक हिस्से में जब डीएम आम नागरिक को मारता है उसका मोबाइल तोड़ देता है तब वायरल होते वीडियो को देखते हुए पूरा देश इसके खिलाफ आवाज बुलंद करता है और कुछ घंटों में सीएम भूपेश बघेल डीएम पर कार्रवाई करते हुए बर्खास्त करते हैं साथ ही उस लड़के को नया मोबाइल दे दिया जाता है। लेकिन वहीं जब सीआरपीएफ के जवान तीन आदिवासियों को कथित रूप से मार देते हैं तब पांच दिन बाद सरकार मुआवजा के नाम पर 10 हजार का तीन लिफाफा देती है क्या आदिवासियों की जान की कीमत किसी मोबाइल से भी सस्ती है?