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अगर हम भारतीय शास्त्रीय वाद्य यंत्र बजाने वाली महिला कलाकारों की तलाश करें तो यहाँ हमें आधी आबादी का आधा हिस्सा भी बड़ी मुश्किल से देखने को मिलता है| पर वो कहते है न कि ‘खोजने से तो खुदा भी मिल जाते है|’ इसी तलाश की एक अहम मुकाम हैं – भारतीय शास्त्रीय संगीत क्षेत्र की दिग्गज कलाकार हैं विदुषी डॉ कमला शंकर| भारत की पहली स्लाइड गिटारवादिका विदुषी डॉ कमला शंकर पूरी दुनिया में अपनी बहुमुखी प्रतिभा और गिटारवादन का लोहा मनवा चुकी हैं| ‘शंकर गिटार’ की आविष्कारक कमला शंकर जी को साल 2013 में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा संगीत के राष्ट्रीय पुरस्कार “राष्ट्रीय कुमार गंधर्व सम्मान” से भी सम्मानित किया जा चुका है| आज आपके सामने प्रस्तुत है भारत की पहली स्लाइड गिटारवादिका विदुषी डॉ कमला शंकर जी से स्वाती सिंह की ख़ास बात :

स्वाती : आप विज्ञान की छात्रा रही हैं, ऐसे में संगीत क्षेत्र को चुनने की प्रेरणा आपको कैसे मिली?

कमला शंकर : भले ही मैं विज्ञान की छात्रा रही हूँ, लेकिन संगीत के प्रति लगाव मुझे मेरी माँ से मिला| माता जी स्वयं कर्नाटक शास्त्रीय संगीत से गायन करती रही हैं और इन्होंने इसकी विधिवत शिक्षा भी ली है| जब मैं छह साल की और मेरी बहन चार साल की थी, तब से माँ ने दोनों बहनों को संगीत की शिक्षा देनी शुरू कर दी थी| इसतरह मेरी माँ ने मेरा परिचय संगीत के सुरों, स्वरों और अलंकार से करवाया और तब से लेकर आज तक माँ मेरी प्रेरणास्रोत रही हैं|

स्वाती : संगीत पृष्ठभूमि से न होने के कारण शुरूआती दौर में आपको किन संघर्षों का सामना करना पड़ा?

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कमला शंकर : ये कहना ठीक नहीं होगा कि मेरी पृष्ठभूमि संगीत से जुड़ी नहीं रही है| मेरी माता जी स्वयं शास्त्रीय संगीत की गायिका रही हैं और वहीं मेरे पिता जी के मामा शातुर सुब्रमणियास्वामी यानी ‘शातुर एजीएस’ के नाम से विख्यात है| इसी तरह मेरे ननिहाल पक्ष में भी कई लोग संगीत क्षेत्र से जुड़े हैं| लेकिन अगर बात करें मेरे परिवार की तो यहाँ अधिकतर लोग शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र से जुड़े हैं| पर उनका संगीत पर प्रति हमेशा से लगाव रहा है| शुरूआती दौर में मेरे संघर्ष किसी भी युवा कलाकार से कम नहीं रहे, क्योंकि मुझे परिवार की तरफ से संगीत में आगे बढ़ने के लिए सकारात्मक माहौल तो मिला था, लेकिन ये प्रसिद्धि मुझे विरासत में नहीं मिली और न ही मेरा ताल्लुक किसी संगीत घराने से रहा है| पर मैंने हमेशा मेहनत, साधना और कर्तव्यनिष्ठा को वरीयता दी है, जिसने मेरे हर संघर्ष में साथ दिया है|

लोग इसी नजरिये से देखते थे कि ‘अरे ये तो बहुत सामान्य है| क्या बजा पाएगी| महिला है, अच्छा चलो सुन लेते है|’

स्वाती : आधुनिकता के दौर में जब हमारी पसंद आधुनिक चीज़ों की तरफ होती है ऐसे में आपने शास्त्रीय गिटार क्यों चुना? कृपया ‘शंकर गिटार’ के बारे में भी कुछ बताएं|

कमला शंकर : बेशक आधुनिक दौर में लोग आधुनिक चीज़ों को वरीयता देते है, लेकिन शास्त्रीय संगीत का अपना विशिष्ठ स्थान रहा है, जो आज भी कायम है| मेरा झुकाव बचपन से शास्त्रीय संगीत की तरफ रहा है| मैंने शुरूआती छह साल शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ली| इसके बाद बारह साल की उम्र में मेरा रुझान हवाईयन गिटार यानी कि स्लाइड गिटार की तरफ हुआ| उस दौर में बनारस में हवाईयन गिटार बजाने की बड़ी धूम थी| कलकत्ता के बाद बनारस ही एक ऐसा शहर था जहाँ स्लाइड गिटार बजाने का चलन काफी था| कई कार्यक्रमों में स्लाइड को देखने के बाद इसकी तकनीक और स्वर मुझे प्रिय लगने लगे और मेरा रुझान स्लाइड गिटार की तरफ बढ़ा और मैंने इसे अपना बनाकर साधना शुरू कर दी| मैं इसे अपने से अलग सोच ही नहीं सकती हूँ|

इसके बाद मैंने शंकर गिटार को बनाया| इसकी खासियत ये है कि इसमें कोई ध्वनि यंत्र (साउंड होल) नहीं है और ये एक ही लकड़ी का बना हुआ यंत्र है| इसमें मुख्य चार तार होते हैं| तीन चिकारी के तार और ग्यारह तरद के तार| इसतरह मैंने शंकर गिटार बनाया जो कि मेरा मुख्य वाद्ययंत्र है|

स्वाती : एक महिला गिटारवादिका के तौर पर अपने अनुभव बताएं| क्या कभी ऐसा महसूस हुआ कि महिला कलाकार को कहीं-न-कहीं कमतर या बेचारगी की नज़रों से देखा जाता है?

कमला शंकर : महिला गिटारवादिका के तौर पर यूँ तो मेरा अनुभव सुखद रहा है, जिसका मुख्य कारण है – मेरे परिवार का साथ| मेरा मानना है कि अगर आपका परिवार आपके साथ है तो ये अपने आप में ढ़ेरों मुश्किलों को ढेर कर देता है| हाँ लेकिन ये ज़रूर है कि अगर आपका ताल्लुक किसी संगीत घराने से नहीं है तो ही संगीत क्षेत्र में आपके बढ़ते कदम बेहद ज़ल्दी लोगों को खटकने लगते है| युवावस्था में जब मैं रेडियो में प्रस्तुति के जाती तो अक्सर सीनियर कलाकारों से मुलाक़ात हो जाया करती थी, जो मुझे हमेशा कहते कि ‘अरे! तुम्हारे पिता तो डॉक्टर हैं| तुम कहाँ ये गिटार वगैरह बजा रही हो| ज्यादा टिक नहीं पाओगी|’ मैं ये सुनती और घर आकर फिर अपनी साधना में लग जाती|

मैंने हमेशा मेहनत, साधना और कर्तव्यनिष्ठा को वरीयता दी है, जिसने मेरे हर संघर्ष में साथ दिया है|

अब बात करूं अगर महिलाओं को कमतर आंकने की तो मेरा अनुभव ये रहा है कि अगर संगीत क्षेत्र में आप ग्लैमर से दूर रहते हैं और सादगी पसंद है तो लोग आपको हमेशा कम आंकते है| मैं खुद भी सादगी पसंद हूँ, ऐसे में शुरूआती दौर में मेरी प्रस्तुति (खासकर वे जो पहली बार मेरे वादन को सुनते थे) को लोग इसी नजरिये से देखते थे कि ‘अरे ये तो बहुत सामान्य है| क्या बजा पाएगी| महिला है, अच्छा चलो सुन लेते है|’ लेकिन ये बात ज्यादा समय तक नहीं चल पायी और लोगों को मेरा संगीत पसंद आने लगा|

और पढ़ें : ख़ास बात : ‘परिवार और समाज’ पर क्विअर नारीवादी एक्टिविस्ट प्रमदा मेनन के साथ

स्वाती : आप एक सफल गिटारवादिका के साथ-साथ एक शिक्षिका भी हैं, ऐसे में युवा-पीढ़ी को शास्त्रीय संगीत से जोड़ने के लिए कृपया अपने प्रयासों के बारे में बताएं|

कमला शंकर : युवाओं को संगीत क्षेत्र से जोड़ने की दिशा में मेरा प्रयास अनवरत रूप से जारी है| मेरे पास अलग-अलग जगहों से शिष्य गिटार सीखने आते हैं| बीते आठ सालों से जयपुर का युवा कलाकार निर्मल सैनी गुरु-शिष्य परंपरा के तहत मुझसे गिटार सीख रहा है| इसी कड़ी में डॉ संजय वर्मा (बनारस), सुभ्रदीप दास (बंगाल) और श्रीकांत यजुर्वेदी (बंगलौर) जैसे अलग-अलग शिष्य और शिष्याओं ने मुझसे गिटार बजाना सीखा है और सीख रहे हैं| इसके साथ ही, मैंने शंकरा आर्ट्स फाउंडेशन की स्थापना की है जो पिछले करीब दस सालों से लगातार युवा कलाकारों को शास्त्रीय संगीत से जोड़ने और शास्त्रीय संगीत के प्रचार-प्रसार के लिए काम करता है| इसके साथ ही, शंकरा आर्ट्स फाउंडेशन के हर कार्यक्रम में एक युवा कलाकार को भी अपनी कला के प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, जिससे योग्य युवा कलाकारों को एक प्रभावी मंच मिले| इसका उद्देश्य इस विचार या यों कहें कि चलन को तोड़ना है कि ‘किसी संगीत घराने से ताल्लुक रखने वाले कलाकार ही मंच के हकदार होते है|’

स्वाती : बतौर सफल और प्रसिद्ध महिला गिटारवादिका आप महिला कलाकारों को क्या संदेश देना चाहेंगीं?

कमला शंकर : अभी तक अपने जीवन में मैंने हर महिला को बेहद दृढ़संकल्प से काम करते देखा है| फिर चाहे उनका ताल्लुक कला से हो या संगीत या फिर किसी अन्य क्षेत्र से| ऐसे में मैं बस उनसे यही कहना चाहूँगीं कि आप यूं ही प्रयास करने और आगे बढ़ें, क्योंकि सही दिशा में आपके बढ़ते कदम पूरे समाज को सही दिशा देते है|


तस्वीर साभार : विदुषी डॉ कमला शंकर

Swati lives in Varanasi and has completed her B.A. in Sociology and M.A in Mass Communication and Journalism from Banaras Hindu University. She has completed her Post-Graduate Diploma course in Human Rights from the Indian Institute of Human Rights, New Delhi. She has also written her first Hindi book named 'Control Z'. She likes reading books, writing and blogging.

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