“चुप रहो, खुलकर मत हंसो, औरतों को एक हद में रहना चाहिए, ऐसे-वैसे कपड़े मत पहनो” और पता नहीं क्या-क्या कहकर औरतों को चुप कराया जाता है। हमारे समाज को हमेशा से ही अपनी बातों को खुलकर रखने वाली और खुद को एक्सप्रेस करनेवाली से औरतों से दिक्कत रही है। तो आइए, जानते हैं आखिर क्यों समाज को दिक्कत है, उन औरतों से जो अपने आपको खुलकर एक्सप्रेस करती हैं।
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Kirti is the Digital Editor at Feminism in India (Hindi). She has done a Hindi Diploma in Journalism from the Indian Institute of Mass Communication, Delhi. She is passionate about movies and music.


