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दो लोगों की सहमति से बनाया गया शारीरिक संबंध गलत नहीं होता है क्योंकि उसमें दो लोग सेक्सशुअल कंसेंट के साथ जुड़ते हैं। साथ ही यह एक बिल्कुल निजी मुद्दा है कि दो लोगों ने आपस में अपनी मर्ज़ी से संबंध बनाए हैं। ऐसे भी बालिग यानि एडल्ट की श्रेणी में आने के बाद यह दो लोगों का आपसी मामला है कि उन्होंने आपसी सहमति से संबंध बनाया है। लेकिन सेक्स करने के बाद अपने पार्टनर की निजी बातों को शेयर करना, क्या यह प्राइवेसी के तहत नहीं आता है? लोगों के लिए अपनी निजता सबसे कीमती होती है लेकिन सामने वाले या अपने पार्टनर की प्राइवेसी उनके लिए कोई अहमियत नहीं रखती है।

आप इसे ऐसे भी समझ सकते हैं कि जब अपने डाटा प्राइवेसी की बात आती है, तब हर कोई सर्तक हो जाता है लेकिन जब बात सामनेवाले की प्राइवेसी पर आती है, तब आप न्युट्रल हो जाते हैं क्योंकि आपको ऐसा लगता है कि यह मेरे साथ नहीं होगा मगर यही सोच तब गलत साबित हो जाती है, जब आपकी ही प्राइवेसी खुलेआम सोशल मीडिया पर शेयर होने लगती है।    

न्यायालय के अनुसार निजता का अधिकार एक मौलिक अधिकार है, जिसे संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत सरंक्षण प्राप्त है। निजता का अधिकार केवल कागजों में सिमटे रहने के लिए नहीं बना है बल्कि यह कई महत्वपूर्ण अधिकारों की आधारशिला के समान है। निजता का अधिकार लोगों की गरिमा को बनाए रखने के लिए ही बनाया गया है क्योंकि यह एक प्रकार का आवरण है, जिसके तहत हमारी निजी बातें हमारे तक ही सीमित रहती हैं और उनके साथ जिनके साथ हम साझा करना चाहते हैं। साथ ही हम अपने शरीर पर किसी अधिकार देते हैं, यह भी निजता के अधिकार के तहत ही आता है लेकिन इसके साथ सेक्शुअल कंसेंट भी शामिल हो जाता है।

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लड़कियां जब अपने पार्टनर पर भरोसा करके अपनी निजी तस्वीरें अपने पार्टनर को भेजती हैं, उस वक्त भी कई बार उनके पार्टनर द्वारा इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर किया जाता है। यही नहीं सेक्स के दौरान अपने पार्टनर के व्यवहार के बारे में भी लोग खुलेआम चर्चा करते दिख जाते हैं।

सेक्सुअल कंसेंट का सीधा अर्थ है, सेक्स करने से पहले दो लोगों के बीच आपसी सहमति पर चर्चा होना। अगर एक पार्टनर सेक्स करने से इनकार कर देता है, तब उसकी असहमति को स्वीकार करना ही सेक्सुअल कंसेंट के दायरे में आता है। सेक्सुअल कंसेंट के बिना किया गया सेक्स रेप के दायरे में आता है, जो एक अपराध है। हालांकि, एक-दूसरे की निजता का सम्मान ना करना भी अपराध ही है लेकिन सेक्सुअल कंसेंट के बाद सेक्स करने के बाद भी निजता का सम्मान ना करना भी अपराध के दायरे में आता है। सामने वाले की गरिमा को सेक्स संबंधित बातों से ठेस पहुंचाना भी अपराध ही है। अधिकांश मामलों में सेक्सुअल कंसेंट मिलने के बाद अपने पार्टनर की निजी बातों को शेयर करना निजता के अधिकार के हनन के अनुसार अपराध के दायरे में आना चाहिए।

यही बात दो लोगों द्वारा सहमति से बनाए गए संबंध पर भी लागू होती है। यही कारण है कि सेक्सुअल कंसेंट के साथ एक दूसरे की प्राइवेसी का ख्याल रखना भी सेक्सुअल कंसेंट का हिस्सा माना जाना चाहिए। हालांकि, लोग इसे समझते नहीं है और अपने पार्टनर की निजी बातें अपने दोस्तों के साथ शेयर करने लगते हैं। लड़कियां जब अपने पार्टनर पर भरोसा करके अपनी निजी तस्वीरें अपने पार्टनर को भेजती हैं, उस वक्त भी कई बार उनके पार्टनर द्वारा इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर किया जाता है। यही नहीं सेक्स के दौरान अपने पार्टनर के व्यवहार के बारे में भी लोग खुलेआम चर्चा करते दिख जाते हैं। जैसे- टाइमिंग क्या थी?, लड़की ने ब्लीड किया या नहीं? इस तरह की निजी बातें भी शेयर की जाती हैं।

मेरी एक दोस्त ने अपने पार्टनर के साथ संबंध बनाया था, जिसमें दोनों की सहमति शामिल थी। मगर सेक्स के बाद उस लड़के ने लड़की की निजी बातों को अपने दोस्तों के साथ साझा कर दिया, जिसे निजता के अधिकार का उल्लंघन कहना गलत नहीं होगा। साथ ही सेक्स करने के लिए कमरे की व्यवस्था करवाने तक की बात और उसकी वर्जिनिटी को लेकर बातें उस लड़के ने अपने दोस्तों से साझा की थी। मेरी दोस्त को यह बात तब पता चली, जब उस लड़के के दोस्त ने ही उस लड़की को आकर सारी बातें कहीं। जब मेरी दोस्त ने मुझे ये सब बताया, तब उसकी जुबान पर केवल एक ही सवाल था, “क्या मैंने गलत किया? क्या वह मेरी निजी बातें सारी जगह शेयर कर देगा? जबकि मैंने केवल भरोसे के कारण उसे सेक्सुअल कंसेंट दिया था।”

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किसी की निजी बातों को केवल अपनी मर्दानगी दिखाने के लिए शेयर करना लड़कों का सबसे फेवरेट टाइम पास होता है क्योंकि उन्हें लगता है कि उन्होंने अपने पार्टनर की निजी बातों को शेयर करके कोई महान काम किया है। मेरे एक मेल फ्रेंड ने मुझे बताया, “हम लड़कों के बीच ऐसी बातें बिल्कुल आम होती हैं क्योंकि अधिकांश लड़कों को यही लगता है कि अगर मैंने लड़की को ‘चीखने’ पर मजबूर कर दिया है, इसका मतलब मैंने लड़की को बहुत प्लेज़र दिया है। इतना ही नहीं अगर लड़की की योनि से खून निकल जाए, तब तो मर्दांगी का लेवल सबसे ऊपरी स्तर पर पहुंच जाता है। लड़कों के बीच अगर लड़कियों की वर्जनिटी को लेकर भी खूब बातें होती हैं। वे आपस में सीधे पूछते हैं कि तेरी गर्ल फ्रेंड वर्जिन है? तूने जब उसे छुआ, तब उसने कैसे रिएक्ट किया? और लड़के अपनी मर्दानगी दिखाने के लिए सारी बातें बढ़ा-चढ़ाकर बोल देते हैं।”

हालांकि, इस वाकये को देखकर यही लगता है कि पुरुष प्रधान समाज होने के कारण लड़कियों की प्राइवेसी का इश्तेहार बनना बंद नहीं होगा। बिना इजाज़त फोटो शेयर अपराध है मगर तब भी लोग ऐसा करते ही है और बड़े ही सूकुन से बातें बनाते हैं कि उन्होंने अपने पार्टनर की फोटो फारवर्ड की है। जब तक लड़कियों को भोग की वस्तु समझा जाएगा, तब तक लड़कियों की प्राइवेसी शाम की चाय की चुस्कियों में मिलती ही रहेगी।  

सेक्सुअल कंसेंट का अर्थ केवल सेक्स के लिए हामी भरना नहीं होता है बल्कि सामने वाले की प्राइवेसी को बनाए रखना भी होना है लेकिन लोग इसे नहीं समझते और सेक्स के दौरान की गई चीजों के बारे में शेयर करना अपनी प्राथमिकता मान लेते हैं। मेरी नजर से अगर देखे, तो ये एक व्यक्ति की प्राइवेसी का हनन तो है ही। साथ में एक-दूसरे के भरोसे को क्षति पहुंचाना भी है। यह मुद्दा लड़के, लड़कियों तक सीमित ना होते हुए एक जेंडर न्युट्रल मुद्दा है, जहां सेक्सुअल कंसेंट के साथ जुड़ने पर एक-दूसरे की निजता का भी पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए।  

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तस्वीर साभार : सिमलिन जे फेमिनिज़म इन इंडिया के लिए

सौम्या ज्योत्स्ना बिहार से हैं तथा मीडिया और लेखन में कई सालों से सक्रिय हैं। नारीवादी मुद्दों पर अपनी आवाज़ बुलंद करना ये अपनी जिम्मेदारी समझती हैं क्योंकि स्याही की ताकत सबसे बुलंद होती है।

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