Monday, January 27, 2020

कविता दलाल : भारत की पहली महिला रेसलर

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कविता भारत की पहली महिला रेसलर हैं जो डब्ल्यूडब्ल्यूई में पहुंची हैं। यूट्यूब पर अपलोड किए गए उनके वीडियो को 35 लाख से ज्यादा लोग देख चुके हैं।

5 ज़रूरी मुद्दे : नागरिकता संशोधन कानून के विरोध प्रदर्शन के बीच जिन्हें याद...

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यह बेहद चिंताजनक है कि देश का ध्यान इन मुद्दों से हटाए जाने में नागरिकता संशोधन कानून ने कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है!

जेएनयू में हुई हिंसा देश के लोकतंत्र पर सीधा हमला है

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जेएनयू में जो भी हुआ, वो जनांदोलनों से हक़पकाए हुए लोगों की क्रूरता थी। ये एक हिंसात्मक प्रतिक्रिया थी, लोगों की एकजुटता और उनके प्रतिरोध के खिलाफ़।
भारतीय मीडिया

सीएए प्रदर्शन के बीच लोकतंत्र के खिलाफ और सत्ता के साथ खड़ा ‘भारतीय मीडिया’

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आज जहां तक निगाह जाती है कुछ अपवादों को छोड़कर हम यही देखते हैं कि लोकतांत्रिक देश भारत का मीडिया लोकतंत्र के खिलाफ उठ खड़ा हुआ है।

ख़ास बात : दिल्ली में रहने वाली यूपी की ‘एक लड़की’ जो नागरिकता संशोधन...

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सीएए के विरोध की मुख्य वजह ये है कि भारत में नागरिकता का आधार धर्म नहीं हो सकता। भारत एक धर्मनिरपेक्ष राज्य है और यह हमारे संविधान की मूल भावना के खिलाफ है।
3 जनवरी को महिलाओं, ट्रांस और क्वेर समुदाय ने सीएए के खिलाफ़ रैली निकाली

दिल्ली में महिलाओं, ट्रांस और क्वीयर समुदाय का सीएए के खिलाफ़ ‘हल्ला बोल’

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सीएए ग़ैरमुसलमानों को धर्म के आधार पर नागरिकता प्रदान करता है जो पूरी तरह से भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक है। इसके अलावा यह असम समझौते का उल्लंघन भी है।

नागरिकता संशोधन क़ानून : सड़कों के अलावा भी है, अहिंसात्मक विरोधों के तरीक़े और...

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हमारे समय के सारे संघर्ष इंसानी अधिकार बचाए रखने के लिए ही हैं, और इंसानी हक़ बचाए रखने के लिए ज़रूरी है इंसानियत बचाए रखना।
नागरिकता संशोधन कानून के ख़िलाफ़ शाहीन बाग की औरतों का सत्याग्रह

नागरिकता संशोधन कानून के ख़िलाफ़ शाहीन बाग की औरतों का सत्याग्रह

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संविधान बचाने की इस लड़ाई में शाहीन बाग की औरतें एक मिसाल कायम कर चुकी हैं, उनका आंदोलन अब सत्याग्रह में बदल चुका है- संविधान को बचाने का सत्याग्रह।
नागरिकता संशोधन क़ानून का 'इस्लामोफ़ोबिक' हिस्सा : माने धर्म की आड़ में, देश के बुनयादी मुद्दे से भटकाने का सरकारी पैतरा

नागरिकता संशोधन क़ानून का ‘इस्लामोफ़ोबिक’ हिस्सा : माने धर्म की आड़ में, देश के...

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सरकार ने सीएए और एनआरसी को समझने की उधेड़-बुन ने देशभर को इस तरह उलझा दिया है कि देश की बुनियादी समस्याओं पर चर्चा करना तो क्या हमने विचार करना भी छोड़ दिया।

नागरिकता संशोधन क़ानून और एनआरसी के ख़िलाफ़ विदेशों में भी विरोध

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राष्ट्र में हर तरफ सीएए व एनआरसी के विरोध में प्रदर्शन चल रहे हैं। प्रदर्शनों की यही लहर भारत की सीमा के पार अंतरराष्ट्रीय फलक पर भी देखने को मिल रही है।

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इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

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