Monday, November 18, 2019
सालूमरदा थिमक्का

पर्यावरण संरक्षण के लिए 107 साल की सालूमरदा थिमक्का की ज़ारी है मुहिम

सालूमरदा थिमक्का को लोग 'वृक्ष माता' के नाम से भी जानते हैं। ये पर्यावरण को सुरक्षित रखने के क्षेत्र में पिछले 80 सालों से निरंतर काम कर रही हैं।
वीमेन विथ डिसेबिलिटीज़ इंडिया नेटवर्क : भारतीय विकलांग महिलाओं के विकास की दिशा में एक अहम पहल

वीमेन विथ डिसेबिलिटीज़ इंडिया नेटवर्क : भारतीय विकलांग महिलाओं के विकास की दिशा में...

वीमेन विथ डिसेबिलिटीज़ इंडिया नेटवर्क की यह मीटिंग भारतीय विकलांग महिलाओं के विकास और उनकी वर्तमान स्थिति को बेहतर बनाने की दिशा में एक अहम पहल साबित हुई।
माहवारी जागरूकता के लिए गांव-गांव जाती हैं मौसम जैसी लड़कियाँ

माहवारी जागरूकता के लिए गांव-गांव जाती हैं मौसम कुमारी जैसी लड़कियाँ

मौसम कुमारी रजौली प्रखंड गांव की एक आम लड़की है। मौसम एक यूथ लीडर है जो पिछले तीन सालों से महिला स्वास्थ्य पर चर्चा करती है।
एस्थर डफ्लो

नोबेल विजेता अर्थशास्त्री एस्थर डफ्लो का परिचय किसी की पत्नी होना नहीं

एस्थर को डेवलपमेंट अर्थशास्त्र के लिए दुनियाभर में महत्वपूर्ण नाम माना जाता है, उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे सेक्टर में कई अभिनव प्रयोग किये हैं।
दलित बच्चों की हत्या दिखाती है 'स्वच्छ भारत' का ज़मीनी सच

दलित बच्चों की हत्या दिखाती है ‘स्वच्छ भारत’ का ज़मीनी सच

साल 2019 तक बहुतेरे गाँव में स्वच्छ भारत मिशन की गूँज तक भी सुनाई नहीं पड़ती और खुले में शौच करने के लिए दलित बच्चों की हत्या इसका जीवंत उदाहरण है।

चिन्मयानंद जैसों की पार्टी का ‘विश्वगुरु’ बनने की कल्पना ही बेमानी है

एसआईटी ने चिन्मयानंद के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज ही नहीं किया है। बल्कि उनपर अपने पद का दुरुपयोग कर यौन शोषण की धारा लगायी गयी है।
ग्रेटा थनबर्ग

ग्रेटा थनबर्ग की तरह दुनिया को ‘जलवायु परिवर्तन’ की चिंता होनी चाहिए

आज हम विकास की अंधी दौड़ में पगला रहे हैं ऐसे में ग्रेटा का इस तरह सामने आना ज़रूरी और प्रेरणादायक है। हमें अब अपने स्तर पर प्रयास शुरू करने की ज़रूरत है।

महिलाओं को लेकर पूर्वाग्रह से ग्रसित भारतीय पुलिस कैसे करेगी महिलाओं की सुरक्षा?

गैर सरकारी संस्था कॉमन कॉज ने सीएसडीएस और लोकनीति के साथ मिलकर एक रिपोर्ट प्रकाशित की है जो भारतीय पुलिस में जेंडर की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है।
हाउडी मोदी

हाउडी मोदी : ‘सब अच्छा होता’ अगर भव्य आयोजन के बाहर लगे ‘हक़’ के...

अमेरिका के ह्यूस्टन में जैसे ही एनआरजी स्टेडियम में 'हाउडी मोदी' कार्यक्रम के बाहर प्रदर्शनकारियों ने कार्यक्रम स्थल में इकट्ठा होना शुरू कर दिया।
कल्पना सरोज

कल्पना सरोज : संघर्षों से लेकर सफल उद्यमी बनने तक सफ़रनामा

कल्पना सरोज के दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत का ही नतीजा है कि साल 2013 में उन्हें ट्रेड और इंडस्ट्री के लिए पद्म श्री से भी सम्मानित किया गया था।

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इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

इन 15 महिलाओं ने भारतीय संविधान बनाने में दिया था अपना योगदान

संविधान सभा में हम उन प्रमुख पंद्रह महिला सदस्यों का योगदान आसानी से भुला चुके है या यों कहें कि हमने कभी इसे याद करने या तलाशने की जहमत नहीं की| तो आइये जानते है उन पन्द्रह भारतीय महिलाओं के बारे में जिन्होंने संविधान निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है|  
लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

लैंगिक समानता : क्यों हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौती है?

गाँव हो या शहर व्यवहार से लेकर काम तक लैंगिक समानता हमारे समाज में मौजूद है, जो हमारे देश के लिए एजेंडा 2030 को पूरा करने में बड़ी चुनौती है|
भारत में स्त्री विमर्श और स्त्री संघर्ष: इतिहास के झरोखे से

भारत में स्त्री विमर्श और स्त्री संघर्ष: इतिहास के झरोखे से

भारत में स्त्री संघर्ष और स्त्री अधिकार के आन्दोलन को इसी रूप में स्वतंत्रता आन्दोलन के परिप्रेक्ष्य में देखने की आवश्यकता है|
रानी अब्बक्का चौटा: भारत की पहली महिला स्वतंत्रता सेनानी | #IndianWomenInHistory

रानी अब्बक्का चौटा: भारत की पहली महिला स्वतंत्रता सेनानी | #IndianWomenInHistory

रानी अब्बक्का चौटा का स्थान न सिर्फ इतिहास में महत्वपूर्ण है बल्कि वे आज के समय में भी एक सशक्त महिला के रूप में बेहतरीन उदाहरण हैं।
उफ्फ! क्या है ये नारीवादी सिद्धांत? आओ जाने!

उफ्फ! क्या है ये ‘नारीवादी सिद्धांत?’ आओ जाने!

नारीवाद के बारे में सभी ने सुना होगा। मगर यह है क्या? इसके दर्शन और सिद्धांत के बारे में ज्यादातर लोगों को नहीं मालूम। इसे पूरी तरह जाने और समझे बिना नारीवाद पर कोई भी बहस या विमर्श बेमानी है। नव उदारवाद के बाद भारतीय समाज में महिलाओं के प्रति आए बदलाव के बाद इन सिद्धांतों को जानना अब और भी जरूरी हो गया है।