संस्कृतिफोटो निबन्ध मिलिए फैशन जगत की ‘बार्बी डॉल’ से

मिलिए फैशन जगत की ‘बार्बी डॉल’ से

न्यादक डकी थॉट की, एक सूडानी-आस्ट्रेलियाई मॉडल है| इन दिनों इन्स्टाग्राम में भी न्यादक की तस्वीरें चर्चा में है|

बचपन में उसे अपने गहरे रंग, बालों और पतले शरीर के कारण अक्सर लोगों के तानों, मजाक और बेज्ज़ती का शिकार होना पड़ता था| उस वक़्त पढ़े-लिखे, सभ्य, आधुनिक और तकनीक से लैस लोगों को अपने इस व्यवहार पर तनिक भी पछतावा नहीं होता था| वे उस बच्ची को इंसान की बजाय जानवर समझकर कुछ भी कहते, बिना ये सोचे कि शारीरिक बनावट का फैसला उस बच्ची ने खुद नहीं लिया| उसने अपने लिए गहरे रंग की चमड़ी को नहीं चुना या फिर उसने पतले शरीर को खुद के लिए नहीं चुना| खैर, वे लोग भी समाज में सुंदरता के बने बनाये उस ढर्रे को मानते हुए हर उस इंसान को नकारते रहे जो उस सांचे में सटीक न बैठे, बिना ये सोचे कि आने वाला समय किस तरफ करवट लेगा| ये कहानी है न्यादक डकी थॉट की, जो कि एक सूडानी-आस्ट्रेलियाई मॉडल है|

न्यादक न केवल खूबसूरत है बल्कि वे उतनी ही साहसी भी है|

वैसे सदियों पुरानी सुंदरता की कहानी को मानने और लागू करने की सुंदरता परंपरा आज भी कायम है| आज भी हम इंसान की सुंदरता समाज की ‘सुंदर वाली परिभाषा’ से ही आंकते है| पर वो कहते है न कि हर पल समय एक सा नहीं होता है और बदलाव ही प्रकृति का नियम है| इसी तर्ज पर, न्यादक डकी थॉट ने सुंदरता की उस बनी-बनाई परिभाषा को चुनौती देना शुरू किया है जिसके तहत गोरे रंग, सुनहरे बाल और भरे शरीर को ही सुंदरता माना जाता है|

न्यादक ने अपने शरीर को अपनी ताकत बनाया और अपनी सुंदरता को ‘टीन वोग्यु’ और ‘डब्ल्यू मैगज़ीन’ जैसी दुनिया की कई मशहूर पत्रिका में प्रदर्शित किया| इन दिनों इन्स्टाग्राम में भी न्यादक की तस्वीरें चर्चा में है| लोग उन्हें बार्बी डॉल मान रहे हैं| अलग-अलग लिबास के ज़रिए दुनियाभर की संस्कृति को अपने रंग में समेटकर न्यादक दुनिया को सुंदरता की नई सकारात्मक परिभाषा गढ़ने का संदेश दे रही है| बचपन में उनकी रंगत और शारीरिक बनावट का मजाक उड़ाने वालों ने कभी नहीं सोचा होगा कि उन्हें दिखने वाली न्यादक की यही कमी एकदिन उसकी खूबी बन जायेगी, जिससे दुनियाभर में उसकी पहचान होगी| आज फैशन जगत में न्यादक की अपनी ख़ास पहचान बन चुकी है|

सदियों पुरानी सुंदरता की कहानी को मानने और लागू करने की सुंदरता परंपरा आज भी कायम है|

न्यादक न केवल खूबसूरत है बल्कि वे उतनी ही साहसी भी है| जिस उम्र में हम अपनी रंगत और शारीरिक बनावट को लेकर बेहद संवेदनशील होते है और सुंदरता की परिभाषा में खरे उतरने के लिए तरह-तरह के नुस्खे अपनाते है ऐसे में न्यादक अपने आपको अपनी तरह स्वीकारते हुए न केवल दुनिया का सामना कर रही है बल्कि दुनियाभर में लोगों को बिना किसी ब्लीच या ट्रीटमेंट के अपनी त्वचा को प्यार करने का संदेश देते हुए फैशन जगत में एक नये दौर का आगाज़ कर रही है|

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About the author(s)

Swati lives in Varanasi and has completed her B.A. in Sociology and M.A in Mass Communication and Journalism from Banaras Hindu University. She has completed her Post-Graduate Diploma course in Human Rights from the Indian Institute of Human Rights, New Delhi. She has also written her first Hindi book named 'Control Z'. She likes reading books, writing and blogging.

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